कैच द रेन:जल संरक्षण को जनआंदोलन बनाना जरूरी, हर बूंद बचाने और जल स्रोतों की रक्षा पर जोर – Catch The Rain: Why Water Conservation Needs To Become A People Movement

कैच द रेन:जल संरक्षण को जनआंदोलन बनाना जरूरी, हर बूंद बचाने और जल स्रोतों की रक्षा पर जोर – Catch The Rain: Why Water Conservation Needs To Become A People Movement

पानी हमारे गांवों, खेतों और पूरे जीवन का आधार है। यही हमारी आजीविका, खेती, पर्यावरण और विकास को सहारा देता है। इसलिए जल संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज का साझा दायित्व है। यदि हम आज अपने जल स्रोतों की रक्षा नहीं करेंगे तो आने वाली पीढ़ियों के सामने पेयजल का गंभीर संकट खड़ा हो सकता है। इसी सोच के साथ ‘पेयजल का सम्मान और संरक्षण’ अभियान 21 जुलाई से 4 अगस्त तक पूरे देश  में चलाया गया।

यह अभियान ‘जल संचय जनभागीदारी : कैच द रेन-2026’ से जुड़ा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात के 135वें संस्करण में वर्षा जल संचयन और जनभागीदारी का आह्वान किया था। उसी को आगे बढ़ाते हुए यह अभियान वर्षा जल संग्रह, भूजल पुनर्भरण, नए रिचार्ज ढांचे बनाने, जल स्रोतों के संरक्षण और लोगों की भागीदारी पर केंद्रित है। इसका मूल संदेश है कि हर घर जल की सफलता तभी संभव है, जब जल के स्रोत सुरक्षित रहेंगे।

कैच द रेन:जल संरक्षण को जनआंदोलन बनाना जरूरी, हर बूंद बचाने और जल स्रोतों की रक्षा पर जोर – Catch The Rain: Why Water Conservation Needs To Become A People Movement


भारत के सामने जल संरक्षण की चुनौती लगातार बढ़ रही है। दुनिया की लगभग 18 प्रतिशत आबादी भारत में रहती है, जबकि हमारे पास दुनिया के केवल 4 प्रतिशत मीठे जल संसाधन हैं। बढ़ती आबादी, शहरीकरण और जलवायु परिवर्तन के कारण नदियों, तालाबों और भूजल पर दबाव बढ़ रहा है। ऐसे समय में हमें अपनी पारंपरिक जल संरक्षण प्रणालियों से भी सीखने की जरूरत है।

राजस्थान के जोहड़, पश्चिम भारत की बावड़ियां, दक्षिण भारत के मंदिर तालाब और गंगा के मैदानी क्षेत्रों के गांवों के तालाब इस बात के उदाहरण हैं कि समाज ने मिलकर जल संरक्षण की मजबूत परंपरा बनाई थी। आज आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक तरीकों के साथ इस विरासत  को और मजबूत किया जा सकता है।

15.8 करोड़ से अधिक ग्रामीण परिवारों तक नल से जल पहुंचा

इस अभियान से कम लागत, वैज्ञानिक योजना और सामुदायिक भागीदारी के आधार पर जल संरक्षण को बढ़ावा मिलता है। इसका फोकस तीन ‘सी’-कम्युनिटी, कॉस्ट और सीएसआर पर है। अभियान के तहत वर्षा जल संग्रह, भूजल रिचार्ज और जल भंडारण संरचनाओं के निर्माण को बढ़ावा दिया जा रहा है। वहीं ‘जल सेवा आकलन’ के माध्यम से ग्राम पंचायतें ग्रामीण पेयजल योजनाओं की नियमित समीक्षा भी कर रही हैं। जल जीवन मिशन ने ग्रामीण भारत में पेयजल व्यवस्था को नई दिशा दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आज 15.8 करोड़ से अधिक ग्रामीण परिवारों तक नल से जल पहुंच चुका है। इससे खासकर महिलाओं का जीवन आसान हुआ है, जिन्हें पहले दूर-दूर से पानी लाना पड़ता था।


जनभागीदारी इस अभियान की सबसे बड़ी ताकत

गांवों में ग्राम पंचायतों के माध्यम से ‘हर घर जल संरक्षण संकल्प’ दिलाया जा रहा है। जल चौपालों में पानी का बजट, भूजल रिचार्ज और ग्राम पंचायत विकास योजना में जल संरक्षण को शामिल करने पर चर्चा हो रही है। कुओं, तालाबों और जलग्रहण क्षेत्रों की सफाई, पुराने बोरवेल का पुनर्जीवन, रिचार्ज संरचनाओं का निर्माण और जल स्रोतों के आसपास पौधरोपण जैसे कार्य भी किए जा रहे हैं। इन गतिविधियों को वीबी-जी राम-जी, डीएमएफ, कैम्पा, वाटरशेड विकास कार्यक्रम और स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) जैसी योजनाओं से जोड़ा गया है। जनभागीदारी इस अभियान की सबसे बड़ी ताकत है।

श्रमदान, पानी बचाने के संदेश, युवाओं की भागीदारी और लोक जल उत्सव जैसे कार्यक्रम लोगों को जल संरक्षण से जोड़ रहे हैं। इसके साथ ही जिला कलेक्टरों के लिए डिसीजन सपोर्ट सिस्टम (डीएसएस) भी तैयार किया गया है, जिससे जल स्रोतों की वैज्ञानिक योजना, भूजल रिचार्ज और गांव स्तर पर जल बजट बनाने में मदद मिलेगी।


जल जीवन मिशन के तहत 8.6 लाख करोड़ का निवेश

जल जीवन मिशन के तहत देश में 8.6 लाख करोड़ रुपये का निवेश कर ग्रामीण पेयजल का मजबूत ढांचा तैयार किया गया है। लेकिन इसकी वास्तविक सफलता तभी होगी, जब हम जल स्रोतों का संरक्षण करेंगे और गांवों को अपनी जल योजनाओं की जिम्मेदारी स्वयं निभाने के लिए सक्षम बनाएंगे। विकसित भारत-2047 के लक्ष्य की ओर बढ़ते हुए जल संरक्षण को जनआंदोलन बनाना समय की सबसे बड़ी जरूरत है। सरकार अपनी भूमिका निभा रही है, लेकिन पानी की हर बूंद बचाने की जिम्मेदारी समाज की भी है। वर्षा जल का संग्रह, भूजल का पुनर्भरण, पारंपरिक जल स्रोतों का पुनर्जीवन और सामुदायिक भागीदारी ही देश को जल सुरक्षित भविष्य की ओर ले जा सकती है। तभी हर घर तक सुरक्षित पेयजल की यह उपलब्धि आने वाली पीढ़ियों तक कायम रह सकेगी।

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