क्या मशाल मार्च से डरे वीसी?:एसआरएफटीआई प्रशासन और छात्र संघ आमने-सामने, परिसर में दाखिल हुई पुलिस – Kolkata Srfti Campus Police Entry Student Protest Torch Rally

क्या मशाल मार्च से डरे वीसी?:एसआरएफटीआई प्रशासन और छात्र संघ आमने-सामने, परिसर में दाखिल हुई पुलिस – Kolkata Srfti Campus Police Entry Student Protest Torch Rally

क्या मशाल मार्च से डरे वीसी?:एसआरएफटीआई प्रशासन और छात्र संघ आमने-सामने, परिसर में दाखिल हुई पुलिस – Kolkata Srfti Campus Police Entry Student Protest Torch Rally

एसआरएफटीआई में धरना तीसरे दिन भी जारी
– फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

सत्यजीत रे फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट (एसआरएफटीआई) परिसर में 27 सितंबर और चार अक्तूबर को दक्षिणपंथी समूहों के साथ हुई झड़पों के बाद, संस्थान परिसर में सुरक्षा बढ़ाने की मांग को लेकर छात्रों ने मशाल रैली निकाली। इसके बाद, मंगलवार देर रात पुलिस एसआरएफटीआई परिसर में दाखिल हो गई। एसआरएफटीआई के अधिकारियों ने पुलिस के आने की पुष्टि करते हुए बताया कि लगभग 50 छात्रों ने बिना किसी पूर्व सूचना या अनुमति के मशाल मार्च निकाला। वे परिसर के विभिन्न हिस्सों से गुजरे, जिसमें गेस्ट हाउस के पास का आवासीय क्षेत्र भी शामिल था।


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संस्थान ने क्या आरोप लगाया?

संस्थान के एक अधिकारी ने बताया कि मशालें लिए हुए और डराने-धमकाने वाले नारे लगाते हुए छात्रों ने लगभग एक घंटे तक वहां डर और बेचैनी का माहौल बना दिया। अधिकारी ने कहा, ‘इसे शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन नहीं कहा जा सकता। वे कानून को अपने हाथ में नहीं ले सकते और संस्थान को अपने कब्जे में नहीं ले सकते।’ संस्थान के एक कर्मचारी ने बताया कि बुधवार सुबह भी कुछ पुलिसकर्मी परिसर में मौजूद थे।

छात्र संघ ने क्या जवाब दिया?

वहीं, छात्र संघ ने आरोप लगाया कि रात करीब 11:30 बजे 10-15 पुलिसकर्मी परिसर में दाखिल हुए और गेस्ट हाउस के पास चले गए, जहां कुलपति (वाइस-चांसलर) रहते हैं। छात्र संघ ने कहा कि परिसर के भीतर और मुख्य गेट के आसपास उनका शांतिपूर्ण मार्च शाम करीब 6:30 बजे ही खत्म हो गया था। उन्होंने सवाल उठाया कि प्रशासन ने कई घंटों बाद पुलिसकर्मियों को क्यों तैनात किया। छात्र संघ का आरोप है कि इसके बाद चार छात्र प्रतिनिधियों ने कुलपति से संपर्क कर इस तैनाती पर चर्चा करने और लिखित स्पष्टीकरण मांगा, लेकिन उन्होंने बात करने से इनकार कर दिया। उन्होंने यह भी दावा किया कि परिसर में तैनात ज्यादातर पुलिसकर्मियों ने पहचान पत्र (बैज) नहीं लगाए थे, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर चिंताएं पैदा हो गई हैं।

कुलपति के इस दावे पर कि उन्हें मशाल मार्च से डर लगा, छात्र संघ ने कहा कि उन्होंने यह सुनिश्चित किया था कि गेस्ट हाउस के आसपास के इलाके में कोई छात्र न रहे। साथ ही, उन्होंने अपने दावे के समर्थन में वीडियो और तस्वीरें पेश करने की पेशकश भी की। 27 सितंबर को आरएसएस से जुड़े एक संगठन के साथ हुए टकराव के बाद, 28 सितंबर से एसआरएफटीआई में कक्षाएं बंद हैं।

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चार अक्तूबर को तनाव तब और बढ़ गया जब आरएसएस से जुड़े ‘बंगीय हिंदू जागरण मंच’ के सदस्य संस्थान के मुख्य गेट की ओर बढ़े; इस दौरान कथित तौर पर बोतलें और ईंटें फेंकी गईं। छात्र 12 अक्तूबर से कुलपति (वाइस-चांसलर) के कार्यालय के बाहर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं। 16 अक्तूबर को जब संस्थान प्रशासन ने छात्रों से हॉस्टल खाली करने को कहा, तो उन्होंने ऐसा करने से इनकार कर दिया।

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