खड़गे ने परिसीमन को लेकर पीएम को चिट्‌ठी लिखी:चर्चा के लिए समय मांगा, कहा-लोकसभा सदस्यों की संख्या अगले 25 साल तक 543 ही रखें

खड़गे ने परिसीमन को लेकर पीएम को चिट्‌ठी लिखी:चर्चा के लिए समय मांगा, कहा-लोकसभा सदस्यों की संख्या अगले 25 साल तक 543 ही रखें

खड़गे ने परिसीमन को लेकर पीएम को चिट्‌ठी लिखी:चर्चा के लिए समय मांगा, कहा-लोकसभा सदस्यों की संख्या अगले 25 साल तक 543 ही रखें


कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने गुरुवार को पीएम नरेंद्र मोदी को चिट्‌ठी लिखकर परिसीमन पर चर्चा के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की। खड़गे ने मोदी से आग्रह किया कि वे परिसीमन के लिए सरकार के प्रस्तावों को सभी राजनीतिक दलों के साथ शेयर करें। उन्होंने सभी दलों और राज्य सरकारों को इन प्रस्तावों का अध्ययन करने के लिए पर्याप्त समय देने को कहा। लोकसभा में राज्यवार मौजूदा संख्या बल को अगले 25 साल तक 543 बनाए बनाए रखने की मांग की है। 2029 के लोकसभा चुनावों से महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण लागू करें। खड़गे बोले- पहले भी पीएम को लेटर लिखा था खड़गे ने कहा, ‘मैंने इससे पहले 16 जुलाई को पीएम को पत्र लिखकर परिसीमन के लिए सरकार के प्रस्तावों पर चर्चा करने के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाने का अनुरोध किया था।’ कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा, ‘केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू के संसद का विशेष सत्र बुलाने के संकेत दिए जाने के बाद मैं कहना चाहता हूं कि कृपया फिर से जबरदस्ती करने की कोशिश न करें, जैसा कि आपने 16 और 17 अप्रैल को किया था।’ रिजिजू ने कहा था- विशेष सत्र बुलाना सरकार का फैसला इंडिया टुडे को दिए इंटरव्यू में किरेन रिजिजू से पूछा गया था कि क्या सरकार किसी और बैठक या विशेष सत्र पर विचार कर रही है। हालांकि, जब उनसे पूछा गया कि क्या इसका मतलब यह है कि कोई विशेष सत्र हो सकता है, तो रिजिजू ने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। 17 अप्रैल को प्रस्ताव लोकसभा में गिर गया था 17 अप्रैल को महिला आरक्षण बिल से जुड़ा संविधान का 131वां संशोधन बिल सरकार लोकसभा में पास नहीं करा पाई। इसमें संसद की 543 सीटें बढ़ाकर 850 करने का प्रावधान था। लोकसभा में बिल पर 21 घंटे की चर्चा के बाद वोटिंग हुई थी। उपस्थित 528 सांसदों ने वोट डाले थे। पक्ष में 298, विपक्ष में 230 वोट पड़े थे। बिल पास कराने के लिए दो तिहाई बहुमत की जरूरत थी। 528 का दो तिहाई 352 होता है। इस तरह बिल 54 वोट से गिर गया। सरकार ने दो बिल वोटिंग के लिए पेश ही नहीं किए थे पहला- परिसीमन संशोधन संविधान बिल 2026 दूसरा- केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) बिल 2026 सरकार ने इन पर वोटिंग कराने से इनकार कर दिया था। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा था कि दोनों बिल पहले से जुड़े हुए हैं, इसलिए वोटिंग की जरूरत नहीं है। तीन बिल, जिनके लिए संसद का विशेष सत्र बुलाया गया था ——————-
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