मध्यप्रदेश में वर्ग-2 और वर्ग-3 शिक्षक भर्ती में पद बढ़ाने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों का प्रदर्शन अब और तीखा हो गया है। 10 दिन से भूख हड़ताल पर बैठे अभ्यर्थियों ने मजबूरी में शिक्षा मंत्री और मुख्यमंत्री के नाम अपने खून से पत्र लिखा। अभ्यर्थियों का कहना है कि इतने दिनों से आंदोलन के बावजूद सरकार का कोई अधिकारी, मंत्री या प्रतिनिधि उनसे बातचीत करने नहीं पहुंचा। अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया कि सरकार और लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा वास्तविक स्थिति से गुमराह किया जा रहा है। उनका दावा है कि प्रदेश में प्राथमिक शिक्षकों के हजारों पद लंबे समय से खाली हैं, इसके बावजूद भर्ती में सीमित पद ही निकाले जा रहे हैं।

1.15 लाख से ज्यादा पद खाली होने का दावा
अभ्यर्थियों के मुताबिक, स्कूल शिक्षा विभाग और जनजातीय कार्य विभाग में प्राथमिक शिक्षक के करीब 1.09 लाख पद रिक्त हैं। उनका कहना है कि 2022 और 2023 में प्राथमिक शिक्षकों के माध्यमिक शिक्षक पद पर पदोन्नत होने के बाद बड़ी संख्या में प्राथमिक शिक्षक के पद खाली हुए। इसके बावजूद पर्याप्त पदों पर भर्ती नहीं की गई। अभ्यर्थियों का दावा है कि करीब 30 हजार से अधिक पात्र प्राथमिक शिक्षक पद वृद्धि की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि 13,089 प्राथमिक शिक्षक पद निकाले गए, लेकिन इनमें से भी करीब 3,200 पद विशेष शिक्षकों के लिए और बड़ी संख्या में पद अतिथि शिक्षकों के लिए रखे गए।
वर्ग-2 में भी सीमित पदों पर नाराजगी
वर्ग-2 अभ्यर्थियों ने भी भर्ती में बेहद कम पद निकाले जाने पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि अलग-अलग विषयों और श्रेणियों में 40, 50 और 70 जैसे सीमित पद निकाले गए, जबकि विभाग में बड़ी संख्या में पद रिक्त हैं। अभ्यर्थियों का दावा है कि वर्ग-2 में भी करीब 50 प्रतिशत पद खाली हैं। इसी वजह से वर्ग-2 के अभ्यर्थी भी भर्ती में पद बढ़ाने की मांग कर रहे हैं।
सरकारी स्कूल के बच्चों के नाम पर वोट, भर्ती में अनदेखी
आंदोलनकारियों ने सरकार पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश के मजदूर, किसान और मध्यम वर्ग के परिवारों के बच्चे सरकारी स्कूलों में पढ़ते हैं। सरकार के पास शिक्षा का बजट और विभाग में रिक्त पदों की जानकारी पहले से है, फिर भी पर्याप्त भर्ती क्यों नहीं निकाली जा रही? अभ्यर्थियों ने कहा कि जब 1.15 लाख से अधिक पद रिक्त होने का दावा किया जा रहा है तो इतनी कम संख्या में पद निकालने का औचित्य क्या है? उनका कहना है कि सरकार और विभाग के जिम्मेदार लोग टीवी बहसों में सवालों का सीधा जवाब देने के बजाय अपनी बात रखने लगते हैं।
अब धैर्य का इम्तिहान खत्म हो रहा
भूख हड़ताल पर बैठे अभ्यर्थियों ने चेतावनी दी कि लगातार अनदेखी से बेरोजगार युवाओं में आक्रोश बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार को अभी भी जो निर्णय उसके अधिकार क्षेत्र में हैं, उन्हें कर लेना चाहिए। अभ्यर्थियों ने कहा कि 10 दिन तक भूख हड़ताल के बाद खून से पत्र लिखने की नौबत आना सरकार और आंदोलनकारियों के बीच संवादहीनता को दिखाता है। उन्होंने मांग की कि मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री स्वयं अभ्यर्थियों से बातचीत करें और वर्ग-2 व वर्ग-3 में रिक्त पदों के आधार पर पद वृद्धि का निर्णय लें।
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