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- This Is The Waste In The Face Of Drought; 10 Million Liters Of Water Is Leaking, Enough To Fill Three Tanks.
इंदौर6 मिनट पहलेलेखक: नीता सिसौदिया
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इस बार बारिश सिर्फ 23 इंच होने से शहर जलसंकट की दहलीज पर खड़ा है। इसके बावजूद जलूद से इंदौर आने वाली नर्मदा लाइन में रोज करीब 10 एमएलडी यानी एक करोड़ लीटर पानी लीकेज के कारण जंगल में बहकर बर्बाद हो रहा है।
यह पानी शहर की तीन पानी की टंकियों को भर सकता है। एक टंकी की क्षमता करीब 30 लाख लीटर पानी की होती है। जलूद से महू के बीच कई जगह लीकेज हैं। ओल्ड बीपी टैंक से जुड़ी 1200 एमएम ग्रेविटी पाइपलाइन में भी पानी ओवरफ्लो होकर जंगल में जा रहा है।
निगम अधिकारियों ने कई बार मौके का निरीक्षण किया, लेकिन स्थायी समाधान नहीं हुआ। जलूद के मेंटेनेंस का जिम्मा रामकी कंपनी के पास है। निगम एक तरफ गर्मी में पानी की उपलब्धता बनाए रखने की तैयारी कर रहा है, वहीं बर्बाद हो रहे पानी को लेकर अफसरों को चिंता नहीं है।
- 8-10 एमएलडी पानी की रोज हो रही बर्बादी
- 406 एमएलडी कुल पानी मिलता है तीनों चरणों से
- 105 टंकियां रोज भरी जाती है जलूद पंप से
लीकेज क्यों: कहीं जोड़ खराब, कहीं मेंटेनेंस नहीं
- पुरानी पाइपलाइन: जलूद से महू के बीच पुरानी लाइन में कई जगह लीकेज की समस्या।
- जोड़ में खराबी: बड़ी मात्रा में पानी के दबाव से कमजोर हिस्सों और जॉइंट से रिसाव बढ़ा।
- ग्रेविटी लाइन में समस्या: ओल्ड बीपी टैंक से जुड़ी बड़ी लाइन में लीकेज के साथ ओवरफ्लो हो रहा है।
- मेंटेनेंस में देरी: लीकेज की जानकारी होने और निरीक्षण के बाद भी स्थायी मरम्मत नहीं हुई।
लीकेज की जानकारी है लेकिन फिर भी सुधार के लिए कदम नहीं उठा रहे
नर्मदा के पहले- दूसरे चरण से करीब 101 एमएलडी पानी मिलता है और इसे शहर तक लाने में बिजली, पंपिंग व मेंटेनेंस पर खर्च होता है। लाइन की निगरानी के लिए स्काडा सिस्टम की बात भी हुई थी। एमआईसी सदस्य अभिषेक शर्मा, अपर आयुक्त आशीष पाठक, दोनों कार्यपालन यंत्री, सहायक यंत्री रोहित राय मौके का दौरा कर चुके हैं। नर्मदा जलूद सिस्टम में लीकेज की जानकारी होने के बावजूद स्थायी सुधार नहीं हुआ। इसके बावजूद रोज लाखों लीटर पानी बह रहा है।
जलूद पंप में जलकुंभी… कम बहाव का संकेत नर्मदा में बहाव कम होने पर जलकुंभी तेजी से आगे बढ़ने के बजाय एक जगह जमा हो सकती है। जलूद के आसपास इसका जमा होना नदी में कम बहाव की स्थिति का संकेत हो सकता है।
जलकुंभी और गाद से भी पंपिंग रुकी, 105 टंकियों का भराव घटा अफसरों के अनुसार नर्मदा नदी में जलकुंभी और गाद के कारण पंपिंग प्रभावित हुई थी। जलकुंभी हटाने के लिए पंप बंद करने पड़े और बाद में फॉल्ट के कारण भी कुछ समय व्यवस्था प्रभावित रही। जलूद से रोज 105 टंकियां भरी जाती हैं। निगम के अनुसार पहले और दूसरे चरण से करीब 101 एमएलडी और तीसरे चरण से करीब 305 एमएलडी पानी मिलता है। इस तरह रोज करीब 406 एमएलडी पानी जलूद से लिया जाता है।
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