देश में मतदाता सूची के पुनरीक्षण और वोटिंग के अधिकार को लेकर जारी बहस के बीच सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस उज्ज्वल भुइयां ने बड़ी टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि अगर किसी प्रक्रिया से लाखों भारतीय नागरिकों का मतदान का अधिकार छिनता है, तो यह अपने आप में मनमानी है और संविधान की व्यवस्था को नकारने जैसा है। रविवार को हैदराबाद स्थित नालसर विधि विश्वविद्यालय में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने साफ-साफ कहा कि लाखों नागरिकों को उनके ही देश में मतदान के अधिकार से वंचित कर दोयम दर्जे का नागरिक बनाने को किसी भी तरह के तर्क देकर सही नहीं ठहराया जा सकता।
संविधान में नागरिकों के दो वर्ग नहीं हो सकते: जज भुइयां
जस्टिस भुइयां ने कहा कि भारतीय संविधान में नागरिकों के दो अलग-अलग वर्गों की व्यवस्था नहीं है। ऐसा नहीं हो सकता कि एक वर्ग को मतदान का अधिकार मिले और दूसरे वर्ग को इससे वंचित कर दिया जाए। उन्होंने कहा कि यदि कोई प्रक्रिया बड़े पैमाने पर नागरिकों को वोट देने के अधिकार से वंचित करती है, तो वह सांविधानिक प्रावधानों के खिलाफ होगी। उन्होंने कहा कि ऐसी प्रक्रिया को मनमाना माना जाएगा।
एसआईआर को लेकर उठते रहे हैं सवाल
जस्टिस भुइयां की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब चुनाव आयोग की विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया (एसआईआर) को लेकर सवाल उठ रहे हैं। द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में एसआईआर से जुड़े फैसलों और आदेशों पर कम से कम 14 बार आपत्ति जताई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों चुनाव आयुक्तों ने अपनी जानकारी या सिफारिश के बिना फैसले और आदेश जारी किए जाने पर सवाल उठाए थे।
चुनाव आयोग ने क्या कहा था?
दो चुनाव आयुक्तों की कथित आपत्तियों से जुड़ी रिपोर्ट सामने आने के बाद चुनाव आयोग ने कहा था कि किसी भी संस्थान में विचारों और टिप्पणियों में मतभेद चर्चा और विचार-विमर्श का हिस्सा हैं। आयोग ने यह भी कहा था कि उसके सभी आदेशों को पूरा कानूनी समर्थन हासिल है और उन्हें स्थापित वैधानिक प्रक्रियाओं के तहत जारी किया जाता है।

कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर साधा निशाना
जस्टिस भुइयां की टिप्पणी के बाद कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर हमला बोला है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर जज भुइयां के बयान का सहारा लेते हुए कहा कि इस टिप्पणी से मुख्य चुनाव आयुक्त की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने दावा किया कि ज्ञानेश कुमार ने संविधान के प्रावधानों और उसकी भावना का उल्लंघन किया है और अब उनके पास अपने पद पर बने रहने का नैतिक अधिकार नहीं है।
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