जापान के पूर्व मंत्री ने भारत सरकार के रुख़ को कहा- लापरवाह, बढ़ा विवाद

जापान के पूर्व मंत्री ने भारत सरकार के रुख़ को कहा- लापरवाह, बढ़ा विवाद

जापान के पूर्व उप अर्थव्यवस्था, व्यापार एवं उद्योग मंत्री हिदेकी माकिहारा

इमेज स्रोत, @hmakihara

इमेज कैप्शन, जापान के पूर्व उप अर्थव्यवस्था, व्यापार एवं उद्योग मंत्री हिदेकी माकिहारा

प्रकाशित

पढ़ने का समय: 5 मिनट

जापान के एक पूर्व मंत्री ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के ज़रिए मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल परियोजना में देरी के लिए भारत को ज़िम्मेदार ठहराते हुए विवाद खड़ा कर दिया.

जापान के पूर्व उप अर्थव्यवस्था, व्यापार और उद्योग मंत्री हिदेकी माकिहारा की इस टिप्पणी को भारत की विपक्षी पार्टियों ने हाथोंहाथ लिया और मोदी सरकार की तीखी आलोचना की.

कांग्रेस के राज्यसभा सांसद और पार्टी के मीडिया पब्लिसिटी डिपार्टमेंट के चेयरमैन पवन खेड़ा ने शुक्रवार इसे शर्मनाक बताते हुए कहा कि भारत की सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक बुनियादी ढांचा साझेदारियों में से एक को इतनी ख़राब तरीक़े से संभाला गया कि अब सरकार की अक्षमता की आलोचना विदेशी अधिकारी भी करने लगे हैं.

पूरे मामले पर भारत ने शुक्रवार को कहा कि भारत और जापान के बीच सहयोग बेहतर ढंग से आगे बढ़ रहा है और दोनों पक्ष 2027 में इस परियोजना के पहले चरण की शुरुआत पर सहमत हैं.

जापान के पूर्व उप अर्थव्यवस्था, व्यापार एवं उद्योग मंत्री हिदेकी माकिहारा, जो अपने कार्यकाल के दौरान इस रेल परियोजना से जुड़े थे, ने 15 जुलाई को सोशल मीडिया पर आरोप लगाया कि परियोजना से जुड़ी बैठकों और वार्ताओं में भारतीय पक्ष की लापरवाह कार्यशैली साफ़ दिखाई दी और भारत ने अपने वादे पूरे नहीं किए.

जापान

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, 19 मई 2026 को जापान के क्योटो शहर के क्योटो स्टेशन पर खड़ी शिंकानसेन हाई-स्पीड ट्रेन

भारत का जवाब

जब विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल से साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान माकिहारा के आरोपों पर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि यह “एक व्यक्ति की राय है और तथ्यों से काफ़ी अलग है.”

जायसवाल ने कहा कि मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल परियोजना पर भारत और जापान के बीच बातचीत “सकारात्मक ढंग से आगे बढ़ रही है.” उन्होंने कहा कि परियोजना का निर्माण कार्य “तेज़ी से आगे बढ़ा है” और योजना के अनुसार, इसका पहला चरण 2027 में शुरू किया जाएगा.

उन्होंने कहा कि चूंकि जापान परियोजना के लिए ई20 ट्रेन सिरीज़ केवल 2030 के शुरुआती वर्षों में ही उपलब्ध करा सकेगा, क्योंकि यह ट्रेन अभी विकास के चरण में है, इसलिए “दोनों पक्षों ने भारतीय हाई-स्पीड ट्रेन के साथ परिचालन शुरू करने पर सहमति बनाई है.”

जायसवाल ने कहा, “इसके अनुरूप सिग्नलिंग उपकरणों का ऑर्डर दिया गया है और वे अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप हैं. इस संदर्भ में जापान की ओर से कोई प्रस्ताव हासिल नहीं हुआ था.”

उन्होंने कहा, “परियोजना का क्रियान्वयन इस साझा लक्ष्य के अनुरूप है कि हाई-स्पीड ट्रेन परियोजना को जल्द से जल्द शुरू किया जाए.”

रणधीर जायसवाल

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल

जापान के पूर्व मंत्री ने क्या कहा

जापान के पूर्व न्याय मंत्री भी रह चुके माकिहारा की सोशल मीडिया पोस्ट एक ऑनलाइन लेख से जुड़ी थी, जिसे भारत में कार्यरत जापानी इंजीनियर इसाओ त्सुजिमुरा ने लिखा था.

लेख में दावा किया गया था कि भारत परियोजना के पहले चरण के लिए यूरोपीय मूल की सिग्नलिंग प्रणाली और नई भारतीय हाई-स्पीड ट्रेन का उपयोग करना चाहता है, जबकि इस परियोजना की अधिकांश वित्तीय सहायता जापान दे रहा है.

त्सुजिमुरा ने यह भी दावा किया कि यूरोपीय मूल की सिग्नलिंग प्रणाली जापान की शिंकानसेन बुलेट ट्रेन के साथ अनुकूल नहीं होगी और “भारत की शिंकानसेन परियोजना लगभग निश्चित रूप से एक अधूरा सपना बनकर रह जाएगी.”

माकिहारा ने जापानी भाषा में अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि वह भारत की शिंकानसेन परियोजना से व्यक्तिगत रूप से जुड़े थे, “लेकिन अंतरराष्ट्रीय बैठकों और वार्ताओं में सबसे अधिक जो चीज़ सामने आई, वह भारतीय पक्ष की बार-बार दिखाई देने वाली बेहद लापरवाह कार्यशैली थी.”

उन्होंने लिखा, “वे किसी भी क़ीमत पर अपने वादे नहीं निभाते. अगर कोई वादा करते भी हैं, तो तुरंत उससे पलट जाते हैं. आख़िर तक केवल अपने हितों को आगे बढ़ाते रहते हैं. परियोजना के प्रभारी मंत्री विशेष रूप से बेहद ख़राब थे. जब शीर्ष स्तर का व्यक्ति ही ऐसा हो, तो किसी भी तरह का अच्छा व्यवहार संभव नहीं है.”

माकिहारा ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें “100 प्रतिशत यक़ीन है कि परियोजना के आगे नहीं बढ़ने की पूरी ज़िम्मेदारी भारतीय पक्ष की है.”

भारत

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, 29 जून 2026 को महाराष्ट्र के बोइसर में मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल परियोजना के निर्माण स्थल का एक सामान्य दृश्य

अमेरिकी मीडिया आउटलेट ब्लूमबर्ग ने अपनी एक रिपोर्ट में लिखा है, ”पश्चिमी भारत में 508 किलोमीटर लंबी हाई-स्पीड रेल परियोजना, जो देश की आर्थिक राजधानी मुंबई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गृह राज्य गुजरात के अहमदाबाद से जोड़ेगी, भूमि अधिग्रहण में देरी के कारण पिछड़ गई.”

”जब भारत और जापान ने 2015 में इस परियोजना पर समझौता किया था, तब इसे सात वर्षों में 976.3 अरब रुपये (करीब 10.1 अरब डॉलर) की अनुमानित लागत से पूरा किया जाना था. जापान ने परियोजना के लिए 81 प्रतिशत फंड देने पर सहमति जताई थी और इसमें उसकी शिंकानसेन तकनीक का इस्तेमाल किया जाना है.”

ब्लूमबर्ग से भारत के रेल मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने कहा कि दोनों देशों के बीच बातचीत सकारात्मक ढंग से आगे बढ़ रही है. उन्होंने कहा, “जापान 2030 के शुरुआती वर्षों में ई10 सिरीज़ की ट्रेन उपलब्ध कराएगा. यह ट्रेन अभी विकास के चरण में है.”

प्रवक्ता ने कहा कि निर्माण कार्य तेज़ी से आगे बढ़ रहा है और परियोजना का पहला चरण 2027 में शुरू कर दिया जाएगा.

नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन की वेबसाइट के अनुसार, भारत की पहली बुलेट ट्रेन परियोजना के तहत महाराष्ट्र और गुजरात के बीच 508 किलोमीटर लंबा हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर बनाया जा रहा है. इस ट्रेन की अधिकतम गति 320 किलोमीटर प्रति घंटा होगी, इसमें 10 स्टेशन होंगे और यह मुंबई, वापी, सूरत, आनंद, वडोदरा और अहमदाबाद की अर्थव्यवस्थाओं को जोड़ने में मदद करेगी.

जापान

हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर का पहला चरण, जो सूरत और बिलिमोरा के बीच है, अब 15 अगस्त 2027 तक शुरू होने की उम्मीद है. हालांकि 2017 में शुरू हुई यह परियोजना लगातार देरी और लागत बढ़ने की समस्या से जूझ रही है और 2023 की समयसीमा पहले ही चूक चुकी है.

जापान की प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची इस महीने की शुरुआत में तीन दिन की भारत यात्रा पर आई थीं. इस यात्रा का मक़सद आर्थिक संबंधों को और गहरा करने के साथ सुरक्षा सहयोग को मज़बूत करना था. कहा जा रहा है कि दोनों देश अमेरिका और चीन के साथ अपने संबंधों में संतुलन बनाने की कोशिश कर रहे हैं.

पिछले एक वर्ष में भारत और जापान के बीच लगभग 120 कारोबारी समझौतों पर हस्ताक्षर हुए हैं, जिनसे भारत में 10 अरब डॉलर से अधिक के जापानी निवेश का रास्ता साफ़ हुआ है.

ब्लूमबर्ग के मुताबिक़ जापान भारत को द्विपक्षीय आधार पर सबसे अधिक विकास सहायता देने वाला देश है. जापान ने 2024-25 में 439 अरब येन (क़रीब 2.7 अरब डॉलर) के विकास ऋण दिए. इन धनराशि का उपयोग नई दिल्ली मेट्रो से लेकर बुलेट ट्रेन जैसी परियोजनाओं में किया गया है.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

BBC News हिन्दी को चुनें और पाइए न्यूज़ अलर्ट, लाइव टीवी, पॉडकास्ट… सब एक जगह

कृपया नोट करें: नया ऐप ब्रिटेन और अमेरिका में उपलब्ध नहीं है.

Source link
#जपन #क #परव #मतर #न #भरत #सरकर #क #रख #क #कह #लपरवह #बढ #ववद

Comments

No comments yet. Why don’t you start the discussion?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *