
ई-5 हाथी उग्र जेन अल्फा है। लिहाजा इसकी सघन निगरानी की जा रही है और लोगों से अपील की जा रही है कि इससे जितना ज्यादा दूर रह सकते हैं उतना दूर रहे। उसे चौंकाने वाली या परेशान करने वाली गतिविधियां नहीं करने की अपील भी लोगों से वन विभाग ने की है। डीएफओ मैहर विद्याभूषण मिश्रा ने बताया है कि इस हाथी ने 9 से 10 सितंबर के बीच गोरसरी पहाड़ से नीचे उतर कर मानव आबादी वाले क्षेत्र के ग्राम किरहाई, ओबरा, छिरहाई, चोरखरी, भीषमपुर, पठरा, छांइन आदि क्षेत्रों में विचरण करता रहा है। इस दौरान कच्चे घरों और फसलों को इसने नुकसान पहुंचाया है। हालांकि 10 सितंबर के दिन को वह गोरसरीपहाड़ी की ओर निकल गया था। लेकिन रात को फिर से इन्हीं ग्रामीण क्षेत्रों में आ सकता है। डीएफओ ने कहा है कि हाथी को टार्ज या तेज रोशनी नहीं दिखाए। खेत में अगर फसल नुकसान कर रहा है तो उसे भगाने के प्रयास में निकट न जाएं। फसल हानि पर तय नियमों के अनुसार क्षतिपूर्ति प्रावधानित है। जंगल के किनारे हाथी के विचरण के दौरान कच्चे मकानों में निवास न करने की सलाह भी दी गई है। डीएफओ ने कहा है कि विगत रात्रि भी हाथी के मूवमेंट के अनुसार लोगों को घरों से निकाल कर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है।
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