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8 जुलाई को इसराइली मीडिया ने अमेरिका की नीतियों में तुर्की के पक्ष में कथित झुकाव को लेकर बढ़ती चिंता की ख़बर दी.
रिपोर्टों के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का तुर्की को फिर से अत्याधुनिक हथियार मुहैया कराने के प्रति सकारात्मक रवैया इसराइल के लिए परेशानी वाला है और इससे क्षेत्र में शक्ति का संतुलन बिगड़ जाएगा.
वहां के एक्सपर्ट्स का मानना है कि ये स्थिति इसराइल के लिए नुक़सानदेह साबित हो सकती है.
हाल के दिनों में इसराइली मीडिया में इस बात को लेकर सबसे ज़्यादा चर्चा रही कि ट्रंप तुर्की को एफ़-35 लड़ाकू विमानों की बिक्री को मंज़ूरी देने पर विचार कर रहे हैं. कई विश्लेषकों का मानना है कि ऐसा क़दम क्षेत्र में इसराइल की “सैन्य बढ़त” को कमज़ोर कर सकता है.
8 जुलाई के अख़बारों के पहले पन्नों पर भी ट्रंप और अर्दोआन की मुलाक़ात को लेकर चिंता साफ़ दिखाई दी. मध्यमार्गी अख़बार मारिव की मुख्य सुर्ख़ी थी, “डर का शिखर सम्मेलन.”
उदारवादी अख़बार हारेत्ज़ ने पहले पन्ने पर लिखा, “ट्रंप ने अर्दोआन का साथ दिया”, जबकि लोकप्रिय अख़बार येदिओत अहरोनोत ने ट्रंप और अर्दोआन की तस्वीर के साथ सुर्ख़ी लगाई, “कनेक्टेड.”
‘नया क्षेत्रीय समीकरण’
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मध्यमार्गी अख़बार येदिओत अहरोनोत में एक्सपर्ट नदाव एयाल ने नेटो शिखर सम्मेलन को “पाखंड का तमाशा” बताया. उन्होंने कहा कि अमेरिका में इसराइल का प्रभाव कम हुआ है और अमेरिकी प्रशासन के भीतर तुर्की के प्रति समर्थन लगातार बढ़ रहा है.
ट्रंप ने तुर्की की जो तारीफ़ की उसे येदिओत अहरोनोत ने प्रमुखता से छापा. अख़बार ने ट्रंप के उस बयान का ज़िक्र किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि अर्दोआन ने तुर्की को “सैन्य रूप से बेहद मज़बूत देश” बना दिया है. साथ ही, अख़बार ने तुर्की को एफ़-35 लड़ाकू विमान बेचने की संभावित मंज़ूरी को लेकर इसराइल की चिंताओं का भी ज़िक्र किया.
अख़बार ने प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू के हवाले से कहा कि इसराइल का लक्ष्य “समुद्री मार्गों और समुद्री व्यापार की आज़ादी की सुरक्षा सुनिश्चित करना” है.
नेतन्याहू ने कहा, “अर्दोआन इसराइल के विनाश और यरूशलम पर क़ब्ज़ा करने की बात करते हैं. वह हमास की मेज़बानी करते हैं. ऐसे शासन को विमान नहीं मिलने चाहिए.”
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मारिव की राजनीतिक संवाददाता अन्ना बार्स्की ने कहा कि एफ़-35 लड़ाकू विमानों को लेकर विवाद अमेरिका और इसराइल के रिश्तों में आ रहे बड़े बदलाव को दर्शाता है.
बार्स्की के मुताबिक, ट्रंप का यह बयान कि “हम अपने दोस्तों पर प्रतिबंध नहीं लगाना चाहते”, इस बात को दिखाता है कि वर्षों के तनाव के बावजूद अमेरिका अब भी तुर्की को नेटो का एक अहम सहयोगी मानता है. उन्होंने कहा कि यह टिप्पणी बताती है कि ट्रंप पुरानी असहमतियों के बजाय रणनीतिक हितों को प्राथमिकता देने के लिए तैयार हैं.
बार्स्की ने यह भी कहा कि ट्रंप का यह कहना कि “इसराइल हमारा क़रीबी सहयोगी है, लेकिन वही एकमात्र प्राथमिकता नहीं है”, क्षेत्र के प्रति अमेरिका के बदलते नज़रिये का संकेत देता है.
बार्स्की के अनुसार, अमेरिका अब तुर्की को “नए क्षेत्रीय समीकरण” का एक अहम साझेदार मानने लगा है. उनका कहना है कि अमेरिकी नीति अब इसराइल के साथ अपने पुराने गठबंधन और व्यापक भू-राजनीतिक (जियो-पॉलिटिकल) हितों के बीच संतुलन बनाने की दिशा में बढ़ रही है.
दक्षिणपंथी अख़बार यिस्राएल हायोम के संवाददाता एरियल काहाना ने कहा कि अर्दोआन से “इसराइल को ख़तरा बढ़ता जा रहा है. “उन्होंने तुर्की की सैन्य महत्वाकांक्षाओं और क्षेत्रीय सक्रियता को इसराइल की सुरक्षा के लिए सीधी चुनौती बताया.
दक्षिणपंथी और नेतन्याहू समर्थक चैनल 14 के एक विश्लेषक ने चेतावनी दी कि ट्रंप की तुर्की को एफ़-35 लड़ाकू विमान बेचने की इच्छा ने अर्दोआन को इसराइल पर बढ़त दे दी है जो उसके (इसराइल) लिए ख़तरनाक साबित हो सकती है.
उन्होंने कहा कि तुर्की सीरिया में एयर डिफ़ेंस सिस्टम तैनात करने पर विचार कर रहा है, ताकि इसराइली वायुसेना की गतिविधियों को “सीमित” किया जा सके और भूमध्य सागर में इसराइली नौसेना की सक्रियता पर भी अंकुश लगाया जा सके.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित
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