इंदौर वनमंडल में 250 से ज्यादा का स्टाफ है। 60 फीसद वनकर्मियों ने इंदौर रेंज में पोस्टिंग की इच्छा जताई। यहां तक कि मनपसंद पोस्टिंग के लिए विधायकों से …और पढ़ें

HighLights
- चोरल जैसे अतिसंवेदनशील वनक्षेत्र में वनकर्मियों के पास बीटों का अतिरिक्त प्रभार दे रखा है
- खास बात यह है कि वनकर्मियों के अलावा अधिकारियों ने भी इंदौर रेंज में पोस्टिंग को लेकर रूचि दिखाई है
- इंदौर वनमंडल में एक प्रभारी अधिकारी ने भी वनकर्मियों को पोस्टिंग दिलाने में मदद की है
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। इंदौर वनमंडल ने मंगलवार शाम वनकर्मियों के तबादले कर दिए। जहां महू-मानपुर के जंगलों की सुरक्षा करने में वनकर्मियों की दिलचस्पी कम रही है। बल्कि इनका मोह इंदौर रेंज में ड्यूटी करने में अधिक है। जबकि इंदौर रेंज में जंगल के नाम पर कुछ भी नहीं है।
तबादला सूची में ऐसे कई वनकर्मी है, जिन्हें तीन साल में दोबारा इंदौर रेंज में पदस्थापना दी गई है। जबकि इन्होंने अपने कार्यकाल के दस से पंद्रह साल इंदौर रेंज में बिताए हैं। इसके चलते ही महू-मानपुर रेंज की दो से तीन सबरेंज और बीटें खाली पड़ी है।
यहां तक कि चोरल जैसे अतिसंवेदनशील वनक्षेत्र में वनकर्मियों के पास बीटों का अतिरिक्त प्रभार दे रखा है। खास बात यह है कि वनकर्मियों के अलावा अधिकारियों ने भी इंदौर रेंज में पोस्टिंग को लेकर रूचि दिखाई है।
इंदौर वनमंडल में 250 से ज्यादा का स्टाफ है। इंदौर, चोरल, महू और मानपुर के अलावा सामाजिक वानिकी से 44 आवेदन आए थे, जिसमें 60 फीसद वनकर्मियों ने इंदौर रेंज में पोस्टिंग की इच्छा जताई। यहां तक कि मनपसंद पोस्टिंग के लिए विधायकों से लेकर इंदौर वृत्त के वरिष्ठ अधिकारियों के चक्कर लगाए हैं। यहां तक कि इंदौर वनमंडल में एक प्रभारी अधिकारी ने भी वनकर्मियों को पोस्टिंग दिलाने में मदद की है।
दो डिप्टी रेंजर को स्पेशल में रखा गया है। जबकि महू में मांगलिया, मानपुर में पेड़मी और बलखेडा और चोरल सबरेंज खाली है। ऐसी ही स्थिति इन रेंज की आठ बीटों में भी बनी है। कुछ वनकर्मियों ने तबादला सूची को लेकर सवाल खड़े कर दिए है। यहां तक कि मुख्यालय में वरिष्ठ अधिकारियों को भी गलत ढंग से पोस्टिंग दिए जाने की शिकायत की है। डीएफओ लाल सुधाकर सिंह का कहना है कि नियमानुसार तबादले किए गए है।
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