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डीम्ड अनुमति में उलझा इंदौर नगर निगम, हाईकोर्ट ने बिल्डिंग गिराने पर लगाई रोक

डीम्ड अनुमति में उलझा इंदौर नगर निगम, हाईकोर्ट ने बिल्डिंग गिराने पर लगाई रोक

याचिकाकर्ता का कहना था कि उसने नक्शा स्वीकृति के लिए आवेदन लगाया था, लेकिन नगर निगम ने एक माह तक उसे न तो स्वीकृत किया न ही उसे अस्वीकृत। ऐसे में नियम …और पढ़ें

Publish Date: Sat, 13 Jun 2026 12:06:17 PM (IST)Updated Date: Sat, 13 Jun 2026 12:06:17 PM (IST)

डीम्ड अनुमति में उलझा इंदौर नगर निगम, हाईकोर्ट ने बिल्डिंग गिराने पर लगाई रोक
हाई कोर्ट ने कार्रवाई पर लगाई रोक। (प्रतीकात्मक तस्वीर)

HighLights

  1. कोर्ट में कहा नक्शा निरस्त कर दिया, कागज नहीं दे पाए, 15 दिन का मिला समय
  2. नगर निगम ने एक माह तक नक्शा न तो स्वीकृत किया न ही अस्वीकृत
  3. ऐसे में नियमों के मुताबिक नक्शा स्वीकृत माना जाएगा और नक्शे के हिसाब से ही निर्माण किया जा रहा है

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। नक्शा स्वीकृत करने की कानूनी समय सीमा का पालन नहीं करना नगर निगम के लिए मुसीबत बन गया है। ऐसे ही एक मामले में नगर निगम ने मकान तोडऩे का नोटिस जारी किया था, जिस पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है। शुक्रवार को जस्टिस पवन कुमार द्विवेदी की कोर्ट में इसको लेकर दायर याचिका पर सुनवाई हुई।

इस दौरान कोर्ट में याचिकाकर्ता का कहना था कि उसने नक्शा स्वीकृति के लिए आवेदन लगाया था, लेकिन नगर निगम ने एक माह तक उसे न तो स्वीकृत किया न ही उसे अस्वीकृत। ऐसे में नियमों के मुताबिक नक्शा स्वीकृत माना जाएगा, और तय नक्शे के हिसाब से ही मकान निर्माण किया जा रहा है। जबकि नगर निगम का जवाब था कि नक्शा अस्वीकृत कर दिया गया था। लेकिन उसके दस्तावेज नगर निगम कोर्ट में नहीं रख पाया। जिसके बाद कोर्ट ने अगली सुनवाई तक मकान तोडऩे पर रोक लगा दी। साथ ही नगर निगम को इसके दस्तावेज पेश करने के लिए कहा है।

नगर निगम ने जारी किया था नोटिस

नगर निगम के विजयनगर जोन से अभिषेक पटेल को 15 मई 2026 को नोटिस जारी कर कहा था कि उनके द्वारा मकान का जो निर्माण किया जा रहा है वो बिना स्वीकृत नक्शे के किया जा रहा है, इसलिए उसे 15 दिनों के भीतर हटाया जाए। जिसके खिलाफ उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। कोर्ट में उनके वकीलों ने दलील दी कि उनकी ओर से भवन निर्माण के लिए 19 जनवरी 2026 को नक्शा स्वीकृति के लिए आवेदन लगाया गया था। नगर निगम ने न तो आवेदन को स्वीकृत किया और न ही अस्वीकृत। जबकि नगर पालिक निगम अधिनियम के अनुसार 30 दिन के भीतर निर्णय नहीं होने पर नक्शे की डिम्ड स्वीकृति मानी जाएगी।

याचिकाकर्ता का दावा है कि उसने निर्माण कार्य उसी नक्शे के अनुसार किया है जो स्वीकृति के लिए प्रस्तुत किया गया था। वहीं नगर निगम की ओर से इस दलील का विरोध करते हुए कहा गया कि रिकॉर्ड के हिसाब से आवेदन निरस्त किया जा चुका था। निगम के वकील ने कोर्ट को बताया कि विवादित नोटिस में 28 मार्च 2025, 28 फरवरी 2026 और 13 मार्च 2026 के पूर्व नोटिसों का भी उल्लेख है, जिससे आवेदन निरस्त होने की संभावना दिखाई देती है। हालांकि संबंधित दस्तावेज फिलहाल रिकॉर्ड पर उपलब्ध नहीं हैं।

हाई कोर्ट ने नगर निगम को दस्तावेज पेश करने को कहा

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पाया कि रिकॉर्ड पर ऐसा कोई दस्तावेज मौजूद नहीं है जिससे स्पष्ट हो कि नक्शा आवेदन को स्वीकृत या अस्वीकृत किया गया था। इस पर अदालत ने नगर निगम को निर्देश दिया कि वह अगली सुनवाई तक आवेदन पर की गई पूरी कार्रवाई और यह जानकारी रिकॉर्ड पर प्रस्तुत करे कि क्या आवेदन को किसी स्पष्ट आदेश से निरस्त किया गया था। मामले की अगली सुनवाई 29 जून 2026 से शुरू होने वाले सप्ताह में होगी। तब तक हाईकोर्ट ने अंतरिम आदेश देते हुए याचिकाकर्ता के भवन को तोडऩे पर रोक लगा दी है।

क्या है डिम्ड स्वीकृति

नगर निगम में नक्शा स्वीकृति के लिए 30 दिनों की समय सीमा तय की गई है। मध्यप्रदेश नगर पालिक निगम अधिनियम, 1956 की धारा 295(3) के तहत नगर निगम में नक्शा स्वीकृति के लिए आवेदन आने के 30 दिनों के भीतर उस पर नगर निगम को फैसला लेना होता है। इस बीच नक्शे को स्वीकृत करना होता है या अस्वीकृत। यदि समय सीमा में नक्शा स्वीकृत नहीं किया जाता है तो उसे स्वत: स्वीकृत (डिम्ड स्वीकृति) माना जाता है।

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