
जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार यह भी पता लगाया जा रहा है कि जिन लोगों के नाम पर जमीन खरीदी गई क्या रजिस्ट्री के दस्तावेज फिरोज अपने पास रखता था। आशंका है कि ऐसा करके संपत्तियों पर नियंत्रण बनाए रखा जाता था और नाम धारकों के लिए उन्हें दूसरे व्यक्ति को बेचना आसान नहीं था। जमीन की बिक्री या अन्य लेनदेन के बदले संबंधित लोगों को कमीशन देने की बात भी सामने आई है। हालांकि इन दावों की पुष्टि होना बाकी है। लोकायुक्त की टीम अब संपत्तियों के दस्तावेज, रजिस्ट्री रिकॉर्ड और भुगतान से जुड़े तथ्यों का मिलान कर रही है। जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा कि कितनी संपत्तियां दूसरों के नाम पर खरीदी गईं और उनमें फिरोज की वास्तविक निवेश कितना था।
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