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दतिया के पूर्व सीएमओ नागेंद्र सिंह गुर्जर को क्लर्क सुसाइड मामले में अदालत से बड़ा झटका लगा है। झांसी कोर्ट के अपर सत्र न्यायाधीश अनुभव द्विवेदी ने बुधवार (19 जून) को उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने अपराध को गंभीर मानते हुए राहत देने से इनकार कर दिया है। जमानत नामंजूर होने के बाद अब गुर्जर पर गिरफ्तारी की तलवार लटक गई है। अपर सत्र न्यायाधीश अनुभव द्विवेदी ने अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए अहम टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा, “अभियुक्त द्वारा किया गया अपराध गंभीर प्रकृति का है। प्रथम दृष्टया केस डायरी में इसके खिलाफ पर्याप्त सामग्री उपलब्ध है।” इन सभी तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए कोर्ट ने अग्रिम जमानत प्रार्थना पत्र को स्वीकार करने योग्य नहीं माना। सुनवाई के दौरान सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता ने भी आरोपी को जमानत दिए जाने का कड़ा विरोध किया था। मृतक की पत्नी ने दर्ज कराई थी लिखित आपत्ति
आरोपी सीएमओ नागेंद्र सिंह गुर्जर ने गिरफ्तारी से बचने के लिए झांसी कोर्ट की शरण ली थी। जब याचिका पर सुनवाई चल रही थी, तब मृतक क्लर्क दिलीप सिंह की पत्नी माधुरी ने अदालत में अपनी लिखित आपत्ति प्रस्तुत की। माधुरी ने कोर्ट से अपील की थी कि आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका को निरस्त किया जाए। पत्नी और सरकारी वकील के विरोध तथा केस की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने यह फैसला सुनाया। फर्जी फाइल बनाने का दबाव और मारपीट
थाना प्रेमनगर क्षेत्र के नराईपुरा मोहल्ला निवासी क्लर्क दिलीप सिंह ने 22 फरवरी 2026 को अपने घर की पहली मंजिल वाले कमरे में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। जान देने से पहले दिलीप ने एक वीडियो भी बनाया था। मृतक की पत्नी माधुरी सिंह ने बताया कि नगर पालिका कार्यालय में पदस्थ राजेश दुबे और धर्मेंद्र शर्मा उनके पति पर फर्जी फाइल तैयार करने का दबाव बनाते थे। जब दिलीप ने इस गलत काम से इनकार किया, तो उनके साथ मारपीट की गई थी। काम से हटाकर लगाई थी कचरा गाड़ियों की गिनती की ड्यूटी
पत्नी के मुताबिक, इस विवाद के बाद तत्कालीन सीएमओ नागेंद्र सिंह गुर्जर ने 17 फरवरी को दिलीप को उनके मूल काम से हटा दिया। उन्हें प्रताड़ित करने के लिए कचरा गाड़ियों की गणना के काम में लगा दिया गया। इस कार्रवाई से दिलीप के सम्मान को गहरी ठेस पहुंची और वे इसे बर्दाश्त नहीं कर पाए। लगातार मानसिक रूप से परेशान रहने के कारण उन्होंने सुसाइड कर लिया। 19 अप्रैल 2026 को पत्नी की शिकायत पर प्रेमनगर थाने में तीनों आरोपियों के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने समेत अन्य धाराओं में केस दर्ज किया गया था। इस एफआईआर के बाद ही सीएमओ का दतिया से ट्रांसफर कर दिया गया था।
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