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सिंगरौली के चितरंगी स्थित नौडिया गांव की रहने वाली दिव्यांग बेटी राधा पनिका ने बुधवार को कलेक्ट्रेट पहुंचकर प्रशासन से मदद की मांग की। परिवार का कहना है कि NCL की ब्लॉक-बी परियोजना में उनकी जमीन, घर और खेत ले लिए गए थे, लेकिन उनके पिता को आज तक नौकरी नहीं मिली। पिता श्याम सुंदर पनिका के मुताबिक, उन्हें 5 साल पहले नोटिस नंबर 1467 के जरिए सरकारी जमीन पर बने मकान का मुआवजा मिला था। यह मुआवजा CCL के गोरबी प्रोजेक्ट की तरफ से दिया गया था और साथ में कंपनी में नौकरी देने का वादा भी किया गया था। लेकिन जो मुआवजा मिला, उससे परिवार का गुजारा होना मुश्किल था। नौकरी के लिए लगाए 50 से ज्यादा चक्कर जमीन-जायदाद जाने के बाद अधिकारियों ने श्याम सुंदर को अजंता राधा अर्थ मूवर्स लिमिटेड में काम दिलाने का भरोसा दिया था। परिवार 2020-21 से लगातार दफ्तरों के चक्कर काट रहा है। श्याम सुंदर का कहना है कि वे 20-25 बार कंपनी और करीब 30 बार NCL के बड़े साहबों (GM) के दफ्तर जा चुके हैं, पर हर बार बस आश्वासन ही मिला। 300 रुपए रोज की मजदूरी भी पक्की नहीं घर में पति-पत्नी और तीन बच्चों को मिलाकर 5 लोग हैं। घर का खर्च मजदूरी से चलता है, जिसमें रोज के 300 रुपए भी बड़ी मुश्किल से मिल पाते हैं। परिवार की सबसे बड़ी चिंता बेटी राधा की पढ़ाई है। पिता ने कर्ज लेकर सतना में बेटी का D.El.Ed (टीचिंग कोर्स) में एडमिशन कराया था, लेकिन अब फीस भरने के लिए पैसे नहीं बचे हैं। जमीन पर घिसटते हुए कलेक्ट्रेट पहुंची दिव्यांग बेटी मदद की उम्मीद में पूरा परिवार एडमिशन के कागज लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचा। दोनों पैरों से दिव्यांग राधा पनिका जमीन पर घिसटते हुए कलेक्ट्रेट के अंदर गई और पिता को नौकरी दिलाने या अपनी पढ़ाई के लिए मदद की गुहार लगाई। तहसीलदार ने बैठाया व्हीलचेयर पर, दिया आश्वासन वहां मौजूद तहसीलदार सविता यादव ने जब राधा को देखा, तो तुरंत उसे व्हीलचेयर पर बैठाया और उसकी पूरी बात सुनी। राधा ने अपनी पढ़ाई या पिता की नौकरी का इंतजाम कराने की बात कही। तहसीलदार ने मामले की जांच कराकर जल्द से जल्द मदद का भरोसा दिया है।
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