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नरसिंहपुर जिले के खैरी सांकल गांव में सात हजार घनमीटर अवैध रेत पकड़े जाने के बाद भी रेत माफियाओं के हौसले बुलंद हैं। प्रशासन की लगातार कार्रवाई के बावजूद नर्मदा और उसकी सहायक नदियों से रेत का अवैध खेल धड़ल्ले से जारी है। ताजा मामला सोमवार को करेली जनपद के सगुन घाट से सामने आया, जहां माफिया बेखौफ होकर नर्मदा नदी की बीच धार से नावों के जरिए रेत निकाल रहे हैं। सगुन घाट से नावों के जरिए रेत को किनारे लाया जा रहा है और फिर ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में भरकर रातीकरार की तरफ इसकी तस्करी की जा रही है। हैरानी की बात यह है कि धरमपुरी में सरकार की मंजूर की गई खदान मौजूद है, जिसके पास सगुन और रातीकरार घाटों की सुरक्षा की जिम्मेदारी अधिकृत कंपनी ‘पावर मैक’ की है। इसके बावजूद कंपनी की टीम ने इस अवैध काम पर आंखें मूंद रखी हैं, जिससे माफिया और कंपनी के बीच मिलीभगत का शक गहरा गया है। सोमवार सुबह करीब 5 बजे जब मीडिया की टीम सगुन घाट पहुंची, तो वहां का नजारा चौंकाने वाला था। तड़के सुबह से ही दर्जनों ट्रैक्टर-ट्रॉलियां लाइन लगाकर रेत भर रही थीं और नदी में चार नावें रेत निकालने में जुटी थीं। मीडिया के कैमरों को देखकर भी रेत चोरों के चेहरे पर कोई डर नहीं था; वे बेहद इत्मीनान से अपना काम करते रहे। तस्करी में नाबालिग भी शामिल, प्रशासन को भेजे गए वीडियो इस अवैध काम में एक और चिंताजनक बात यह सामने आई कि रेत के खनन और परिवहन में नाबालिग बच्चों से भी मजदूरी कराई जा रही है। जब उनसे इस काम के पीछे के आकाओं के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने चुप्पी साध ली। कार्रवाई का इंतजार मीडिया टीम ने मौके से जियो टैगिंग (लोकेशन वाले) वीडियो बनाकर कलेक्टर को व्हाट्सएप पर भेजे। हालांकि, निजी कारणों से छुट्टी पर होने की वजह से वे इन्हें देख नहीं सकीं। खनिज विभाग के निरीक्षक स्तर के अधिकारी भी सोमवार को जिले से बाहर थे, जिन्हें ये वीडियो फॉरवर्ड किए गए हैं। सूत्रों के मुताबिक, यह पूरा मामला अब प्रशासन के आला अधिकारियों की नजर में आ चुका है और जल्द ही टास्क फोर्स कमेटी इस घाट पर एक्शन ले सकती है।
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