नशे से जुड़ा अपराध, हत्या से भी ज्यादा गंभीर : जिला कोर्ट, सामान्य प्रकरण की तरह चलेगा नाबालिग के खिलाफ केस, किशोर न्यायालय भेजने से किया इंकार

नशे से जुड़ा अपराध, हत्या से भी ज्यादा गंभीर : जिला कोर्ट, सामान्य प्रकरण की तरह चलेगा नाबालिग के खिलाफ केस, किशोर न्यायालय भेजने से किया इंकार

नाबालिग के अभिभावक ने जिला कोर्ट में आवेदन प्रस्तुत कर कहा था कि नाबालिग की आयु 17 वर्ष 9 माह है। उसके केस को किशोर न्याय बोर्ड भेजा जाए। शासन की ओर स…और पढ़ें

Publish Date: Thu, 16 Jul 2026 10:40:55 AM (IST)Updated Date: Thu, 16 Jul 2026 10:40:55 AM (IST)

नशे से जुड़ा अपराध, हत्या से भी ज्यादा गंभीर : जिला कोर्ट, सामान्य प्रकरण की तरह चलेगा नाबालिग के खिलाफ केस, किशोर न्यायालय भेजने से किया इंकार
कोर्ट ने कर दी याचिका खारिज। (प्रतीकात्मक तस्वीर)

HighLights

  1. विशेष न्यायालय ने नशे का कारोबार करने वाले नाबालिग का मामला किशोर न्यायालय को भेजे जाने से इंकार कर दिया
  2. नाबालिग के अभिभावक ने इस संबंध में याचिका प्रस्तुत की थी जिसे कोर्ट ने निरस्त कर दिया
  3. सजा से बचने के लिए नाबालिगों से ड्रग की खरीदी-बिक्री और परिवहन का काम लिया जाता है

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। नशे के कारोबार का अपराध, हत्या के अपराध से भी ज्यादा गंभीर है। हत्या के मामले में आरोपित केवल एक या दो लोगों की हत्या करता है, जबकि नारकोटिक्स ड्रग्स बड़ी संख्या में निर्दोष युवाओं को धीमी मौत की ओर ले जाते हैं। यह समाज पर घातक असर डालने वाला मामला है। इस टिप्पणी के साथ विशेष न्यायालय ने नशे का कारोबार करने वाले नाबालिग का मामला किशोर न्यायालय को भेजे जाने से इंकार कर दिया। नाबालिग के अभिभावक ने इस संबंध में याचिका प्रस्तुत की थी जिसे कोर्ट ने निरस्त कर दिया।

अपर लोक अभियोजक श्याम दांगी ने बताया कि 22 मई को पुलिस ने नागदा निवासी नावेद खान और फरहान खान को गिरफ्तार किया था। आरोपितों से एमडी ड्रग बरामद हुई थी। पूछताछ में उन्होंने बताया था कि ये ड्रग उन्होंने मंदसौर निवासी नाबालिग से खरीदी थी। इस पर पुलिस ने उसे भी आरोपित बनाते हुए गिरफ्तार कर लिया।

सजा से बचने के लिए नाबालिगों से ड्रग की खरीदी-बिक्री और परिवहन का काम लिया जाता है

नाबालिग के अभिभावक ने जिला कोर्ट में आवेदन प्रस्तुत किया था। इसमें कहा था कि नाबालिग की आयु 17 वर्ष 9 माह है। उसके केस को किशोर न्याय बोर्ड भेजा जाए। शासन की ओर से एजीपी दांगी ने यह कहते हुए विरोध किया कि नशे के कारोबार में आजीवन कारावास तक की सजा होती है। इससे बचने के लिए नाबालिगों से ड्रग की खरीदी-बिक्री और परिवहन का काम लिया जाता है।

वह अपराध करने में मानसिक रूप से सक्षम है

आरोपित की आयु वयस्क होने में भले ही तीन माह कम है, लेकिन वह अपराध करने में मानसिक रूप से सक्षम है। उसमें किए गए काम के परिणाम समझने की क्षमता है। कोर्ट के आदेश पर एमवाय अस्पताल के चार डाक्टरों ने उसकी जांच कर उसे अपराध के परिणाम और उसकी गंभीरता को समझने में योग्य माना है। इस पर कोर्ट ने नाबालिग के अभिभावकों की ओर से प्रस्तुत आवेदन निरस्त कर दिया।

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