
नाना ने उस दिन बताया था कि, वे और उनके पिता शंकर लक्ष्मण के बड़े प्रशंसक थे। एक बार शंकर लक्ष्मण का हॉकी मैच देखने वे पुणे पहुंचे। स्टेडियम के गेट पर उन्हें अंदर जाने नहीं दिया गया। मैच देखने की जिद ऐसी थी कि पिता ने बाहर अपनी घड़ी बेच दी और उससे मिले पैसों से टिकट खरीदा। इसके बाद उन्होंने स्टेडियम में जाकर पूरा मैच देखा। यही जुड़ाव आगे चलकर शंकर लक्ष्मण और नाना पाटेकर की आत्मीयता में बदल गया।
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