नीट पेपर लीक विरोध में गिरफ्तार छात्रों के गंभीर आरोप:  बातचीत के बहाने बुलाकर जेल भेजा, अपराधियों जैसा व्यवहार किया; अपशब्द कहे-मानसिक रूप से प्रताड़ित किया – Indore News

नीट पेपर लीक विरोध में गिरफ्तार छात्रों के गंभीर आरोप: बातचीत के बहाने बुलाकर जेल भेजा, अपराधियों जैसा व्यवहार किया; अपशब्द कहे-मानसिक रूप से प्रताड़ित किया – Indore News

नीट पेपर लीक विरोध में गिरफ्तार छात्रों के गंभीर आरोप:  बातचीत के बहाने बुलाकर जेल भेजा, अपराधियों जैसा व्यवहार किया; अपशब्द कहे-मानसिक रूप से प्रताड़ित किया – Indore News


नीट पेपर लीक के विरोध में 23 जुलाई को इंदौर में प्रस्तावित ‘न्याय यात्रा’ से पहले गिरफ्तार किए गए छह छात्र नेताओं ने रिहाई के बाद पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका आरोप है कि उन्हें डीसीपी से बातचीत के बहाने ले जाकर धारा 151 के तहत जेल भेज दिया गया। उनसे अपराधियों जैसा व्यवहार किया गया। पुलिसकर्मियों ने अपशब्द कहे और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया। उनका यह भी कहना है कि मोबाइल छीन लिए गए और चार दिनों तक उनके परिवारों को उनकी जानकारी तक नहीं दी गई। जिससे परिजन परेशान रहे। ‘डीसीपी से चर्चा’ कहकर बुलाया, फिर थाने ले गए नेशनल एजुकेटेड यूथ यूनियन के राधे जाट ने बताया कि पुलिस ने उन्हें यह कहकर बुलाया था कि डीसीपी से न्याय यात्रा को लेकर चर्चा कराई जाएगी। इसी भरोसे पर वे पुलिस के साथ चले गए। उनका आरोप है कि रास्ते में उनके मोबाइल फोन बंद करवा दिए गए। इसके बाद पहले जिला अस्पताल चौकी और फिर चंदन नगर थाने ले जाया गया। अगले दिन मेडिकल परीक्षण कराने के बाद एसीपी जूनी इंदौर के समक्ष पेश किया गया और फिर जेल भेज दिया गया। ‘पुलिस को पहले ही दी थी यात्रा की जानकारी’ राधे जाट ने कहा कि उन्होंने हमेशा पुलिस का सहयोग किया। न्याय यात्रा के लिए एक दिन पहले पुलिस कमिश्नर कार्यालय जाकर अनुमति भी मांगी थी और एसीपी को यात्रा की पूरी रूपरेखा बताई थी। उनके अनुसार रैली में करीब 10 हजार लोगों के शामिल होने की संभावना थी। अपराधियों जैसा व्यवहार किया छात्र नेताओं का आरोप है कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे सुरेंद्र यादव के साथ पुलिस ने अपशब्द कहे और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया। उनका कहना है कि उनके साथ अपराधियों जैसा व्यवहार किया गया। इस मामले में विजय चौधरी, चंद्रशेखर गुर्जर, गौरव परिहार और हरिप्रपन्न गोस्वामी को भी गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। चार दिन तक परिवार को नहीं दी जानकारी रिहा हुए छात्र नेताओं का कहना है कि चार दिनों तक उनके परिवारों को यह तक नहीं बताया गया कि वे कहां हैं। रिहाई के समय उनसे बॉन्ड ओवर भी भरवाया गया। उनका कहना है कि उन्होंने पहले भी एमपीपीएससी, पटवारी भर्ती घोटाले और अन्य छात्र आंदोलनों में प्रदर्शन किए हैं, लेकिन पहले कभी इस तरह की कार्रवाई नहीं हुई। कमिश्नरी व्यवस्था और धारा 151 की समीक्षा की मांग छात्र नेताओं ने इंदौर में लागू कमिश्नरी व्यवस्था और धारा 151 के कथित दुरुपयोग की समीक्षा की मांग की है। उनका कहना है कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने वाले छात्रों के साथ अपराधियों जैसा व्यवहार नहीं होना चाहिए। उन्होंने यह भी नाराजगी जताई कि गिरफ्तारी के बाद किसी भी राजनीतिक दल के नेता ने उनका हालचाल तक नहीं पूछा।

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