नीति आयोग द्वारा ‘इंदौर आर्थिक क्षेत्र’ की व्यापक विकास योजना को आधिकारिक रूप से जारी कर दिया गया है। इस योजना के तहत इंदौर और उसके आसपास के 8 जिलों (इंदौर, उज्जैन, धार, रतलाम, देवास, खरगोन, खंडवा और शाजापुर) को शामिल कर देश के सबसे बड़े आर्थिक क्षेत्र के रुप में विकसित किया जाएगा।

HighLights
- देश के सबसे बड़े आर्थिक क्षेत्र के रूप में विकसित किया जाएगा
- इंदौर में 28 अक्टूबर को होने वाली ”अर्बन ग्रोथ कॉन्क्लेव 2.0” में इसकी घोषणा होगी
- नीति आयोग के सहयोग से इंदौर आर्थिक क्षेत्र के विकास का मास्टर प्लान तैयार किया जाएगा
उदय प्रताप सिंह, इंदौर : नीति आयोग द्वारा ‘इंदौर आर्थिक क्षेत्र’ की व्यापक विकास योजना को आधिकारिक रूप से जारी कर दिया गया है। इस योजना के तहत इंदौर और उसके आसपास के 8 जिलों (इंदौर, उज्जैन, धार, रतलाम, देवास, खरगोन, खंडवा और शाजापुर) को शामिल कर देश के सबसे बड़े आर्थिक क्षेत्र के रुप में विकसित किया जाएगा।
इंदौर में 28 अक्टूबर को होने वाली ”अर्बन ग्रोथ कॉन्क्लेव 2.0” में इसकी घोषणा होगी। नीति आयोग के सहयोग से इंदौर आर्थिक क्षेत्र के विकास का मास्टर प्लान तैयार किया जाएगा और इस क्षेत्र की मौजूदा 3.52 लाख करोड़ की अर्थव्यवस्था को 2047 तक 57.06 लाख करोड़ तक पहुंचाया जाएगा।
इस विकास एजेंडे को जमीन पर उतारने के लिए क्षेत्र में 80 से अधिक विशिष्ट परियोजनाओं और 20 से अधिक नीतिगत सुधारों को मंजूरी दी गई है। इसे इंदौर उज्जैन मेट्रोपालिटन रीजन अथॉरिटी संचालित करेगी। कमेटी के गठित होने के पूर्व आठों जिलों के कलेक्टर इसके लिए काम करेंगे। मुख्यमंत्री इसकी अध्यक्षता करेंगे। यह अथॉरिटी सभी 8 जिलों के नगर निकायों और विकास प्राधिकरणों के साथ मिलकर काम करेगी।
इस तरह आर्थिक विकास का रोडमैप होगा तैयार
- इंफ्रास्ट्रक्चर कनेक्टिविटी : 1,100 किलोमीटर लंबी सड़के,हाईवे , 864 किलोमीटर इंटरसिटी रेल नेटवर्क और इंदौर-उज्जैन-देवास को जोड़ने के लिए 118 किलोमीटर की रीजनल मेट्रो व मेट्रो रेल परियोजनाओं पर हो रहा काम।
- ”इंदौर फ्यूचर सिटी” और औद्योगिक हब : 5,000 एकड़ में ”इंदौर फ्यूचर सिटी” बसाई जाएगी। इसके अलावा फार्मा, टेक्सटाइल, आटोमोटिव और इलेक्ट्रिक व्हीकल, उद्योगों के लिए लगभग 6,700 एकड़ में नए औद्योगिक और खाद्य प्रसंस्करण (फूड प्रोसेसिंग) हब विकसित किए जाएंगे। इसमें उज्जैन और रतलाम के बीच बनने वाला 2,000 एकड़ का ”इंटरनेशनल फूड प्रोसेसिंग हब” प्रमुख है।
- रोजगार और कौशल विकास : शिक्षा को उद्योग से जोड़ने के लिए 500 एकड़ में एक ”बिजनेस स्कूल हब” और क्षेत्र के 5 अलग-अलग जिलों में ”एकीकृत कौशल प्रशिक्षण केंद्र” स्थापित किए जाएंगे। आईआईटी इंदौर के पास 200 एकड़ में आईटी, एआई (AI) और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर तैयार करेंगे।
ग्राेंथ कान्क्लेव में जमीन पर काम शुरू करने के लिए तीन बड़े समझौतों होंगे
- औद्योगिक उपयोग के लिए पानी: मध्य प्रदेश के औद्योगिक नीति विभाग और शहरी विकास विभाग के बीच समझौता हुआ है। इसके माध्यम से उद्योगों को सीवरेज से उपचारित पानी दिया जाएगा।
- पीपीपी मॉडल को बढ़ावा: महाराष्ट्र इंस्टीट्यूट फार ट्रांसफार्मेशन के साथ मिलकर मध्य प्रदेश सरकार सार्वजनिक-निजी भागीदारी क्षमता निर्माण पर काम करेगी।
- होटल क्षेत्र में कचरा प्रबंधन: होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन वेस्टर्न इंडिया के साथ मिलकर राज्य के आतिथ्य क्षेत्र में भोजन की बर्बादी रोकने, वैज्ञानिक अपशिष्ट प्रबंधन और रेनवाटर हार्वेस्टिंग को अनिवार्य किया जाएगा।
ग्रोथ कांक्लेव में होगी ये नीतिगत घोषणाएं
- मध्य प्रदेश शहरी किफायती आवास और पर्यावास नीति
- उपचारित अपशिष्ट जल के पुनर्चक्रण और पुन: उपयोग की नीति 2026
देश के प्रमुख आर्थिक क्षेत्र से तुलना
- प्रमुख क्षेत्र सूरत आर्थिकी क्षेत्र विशाखापट्टनम आर्थिकी क्षेत्र इंदौर आर्थिकी क्षेत्र
- आबादी (2023 अनुमानित) 15.7 मिलियन 16.5 मिलियन 18.5 मिलियन
- क्षेत्रफल (वर्ग किमी में) 21,217 38,000 49,262
- जीडीपी (वित्तीय वर्ष 2023) 6.85 लाख करोड़ 4.94 लाख करोड़ 3.56 लाख करोड़
- जीडीपी पर केपिटा (वित्तीय वर्ष 2023) 3.71 लाख रुपये 3 लाख रुपये 1.92 लाख रुपये
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