न्यूज डायरी:गोवा में छह सीजेपी कार्यकर्ताओं को रिहा करने का आदेश; गुजरात में जिग्नेश मेवाणी के खिलाफ एफआईआर – National Updates Goa Cjp Activists Release High Court Order Gujarat Jignesh Mevani Fir North East West South

न्यूज डायरी:गोवा में छह सीजेपी कार्यकर्ताओं को रिहा करने का आदेश; गुजरात में जिग्नेश मेवाणी के खिलाफ एफआईआर – National Updates Goa Cjp Activists Release High Court Order Gujarat Jignesh Mevani Fir North East West South

बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा पीठ ने रविवार रात कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के छह कार्यकर्ताओं को तत्काल रिहा करने का आदेश दिया। गोवा पुलिस ने राजधानी पणजी के आजाद मैदान में प्रदर्शन के दौरान उन्हें हिरासत में लिया था। हिरासत में लिए गए लोगों में होटल कारोबारी जैक सुखीजा, कार्यकर्ता आमरीन शेख, आदित्य परुलेकर और भूपेश बिन समेत अन्य शामिल थे। अधिवक्ता मेलिसा सिमोस ने अवैध हिरासत के खिलाफ बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता नोर्मा अल्वारेस ने जस्टिस वाल्मीकि मेनेजेस और जस्टिस अमित जमसांडेकर की पीठ के सामने पक्ष रखा। अल्वारेस ने बताया कि सुनवाई शाम 7.30 बजे शुरू हुई और रात 8.45 बजे समाप्त हुई।ऑनलाइन सुनवाई में शामिल सरकारी वकील ने आश्वासन दिया कि सभी छह लोगों को तुरंत रिहा कर दिया जाएगा। अब इस मामले की सोमवार को सुनवाई होगी।




गुजरात: कांग्रेस विधायक जिग्नेश मेवाणी के खिलाफ FIR दर्ज, पुलिस के काम में बाधा डालने का आरोप


कांग्रेस विधायक जिग्नेश मेवाणी के खिलाफ गुजरात के गांधीनगर में FIR दर्ज की गई है। पेठापुर पुलिस स्टेशन में दर्ज प्राथमिकी में मेवाणी पर अपने समर्थकों के साथ पुलिस स्टेशन पहुंचकर पुलिसकर्मियों को सरकारी काम करने से रोकने का आरोप लगाया गया है। FIR के मुताबिक, 9 अक्टूबर को गांधीनगर में चुनाव प्रचार के दौरान पुलिस पेठापुर पुलिस स्टेशन में कांग्रेस उम्मीदवार से जुड़ी एक शिकायत के मामले में उनका बयान दर्ज कर रही थी। इसी दौरान जिग्नेश मेवाणी अपने समर्थकों के साथ पुलिस स्टेशन पहुंचे। आरोप है कि उन्होंने पुलिस के काम में बाधा डाली। इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है। इनमें गैरकानूनी जमावड़ा, साझा उद्देश्य के तहत किए गए अपराध की जिम्मेदारी, दंगा करने, सरकारी कर्मचारी के काम में बाधा डालने और आपराधिक धमकी देने से जुड़ी धाराएं शामिल हैं। प्राथमिकी में जानबूझकर अपमान करने, लोगों में डर या अफवाह फैलाने, समुदायों के बीच वैमनस्य बढ़ाने और नफरत या दुर्भावना को बढ़ावा देने से संबंधित धाराएं भी लगाई गई हैं।

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