15 जून को तबादला अवधि खत्म होने के तीन दिन पहले पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने संविदा कर्मियों के स्थानांतरण (स्थान परिवर्तन) के लिए नई नीति जारी की है।
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आदेश के अनुसार कुछ विशेष मामलों में संविदा कर्मचारियों के स्थान परिवर्तन की प्रक्रिया तय नियमों और शर्तों के अंतर्गत पूरी की जा सकेगी। विभाग ने स्पष्ट किया है कि योजनाओं एवं कार्यक्रमों में कार्यरत संविदा कर्मियों को कार्य विशेष के लिए नियुक्त किया जाता है। अब तक उनके स्थान परिवर्तन के संबंध में कोई स्पष्ट नीति नहीं थी, जिसे देखते हुए यह नई व्यवस्था लागू की गई है।
इन शर्तों का पालन जरूरी
- स्थान परिवर्तन होने पर पूर्व संविदा अनुबंध समाप्त माना जाएगा तथा नए कार्यस्थल पर नया अनुबंध किया जाएगा।
- एक बार स्थान परिवर्तन होने के बाद कर्मचारी को अगले 5 वर्षों तक पुनः स्थानांतरण का लाभ नहीं मिलेगा।
- स्थानांतरण केवल 1 से 15 जून की तय अवधि में ही किए जा सकेंगे।
- आदेश जारी होने के एक सप्ताह के भीतर कर्मचारी को कार्यमुक्त किया जाएगा तथा नए स्थान पर एक सप्ताह के भीतर कार्यभार ग्रहण करना होगा।
- स्थान परिवर्तन के लिए किसी प्रकार का यात्रा भत्ता, अन्य भत्ते अथवा अतिरिक्त अवकाश देय नहीं होगा।

पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा जारी नीति।
जिले के भीतर स्थानांतरण की ऐसी होगी व्यवस्था
- नीति के अनुसार जिले के भीतर स्थान परिवर्तन जिला कलेक्टर की अनुशंसा एवं प्रभारी मंत्री की स्वीकृति के बाद किया जा सकेगा। स्थानांतरण आदेश मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत द्वारा जारी किए जाएंगे।
- साथ ही किसी जिले में कार्यरत संविदा कर्मियों के कुल स्वीकृत पदों की संख्या के अधिकतम 10 प्रतिशत तक ही स्थान परिवर्तन किए जा सकेंगे।

अंतर जिला स्थानांतरण की व्यवस्था
- अंतरजिला तबादले केवल स्वैच्छिक आवेदन के आधार पर विशेष परिस्थितियों में किये जाएंगे।
- इनमें विवाहित, विधवा एवं तलाकशुदा महिला कर्मचारियों को उनके ससुराल या पारिवारिक निवास वाले जिले में स्थानांतरण शामिल हैं।
- स्वयं या आश्रित के कैंसर या ब्रेन ट्यूमर जैसी गंभीर बीमारी से पीड़ित होने की स्थिति में भी तबादला हो सकेगा।
- समान पद पर कार्यरत संविदा कर्मचारियों के पारस्परिक (म्यूचुअल) स्थानांतरण का लाभ मिलेगा।
- प्रशासनिक आवश्यकता के आधार पर विभागीय मंत्री की स्वीकृति से विशेष मामलों में स्थानांतरण किए जा सकेंगे।
- अंतरजिला स्थानांतरण के मामलों में भी संबंधित पद पर कार्यरत संविदा कर्मियों की कुल संख्या के 10 प्रतिशत तक की सीमा निर्धारित की गई है।

इन संस्थाओं पर लागू नहीं होगी नीति
विभाग ने स्पष्ट किया है कि महात्मा गांधी रोजगार गारंटी परिषद तथा राजीव गांधी जलग्रहण क्षेत्र प्रबंधन मिशन के संविदा कर्मचारियों पर यह नीति लागू नहीं होगी, क्योंकि इनके लिए अलग से स्थानांतरण संबंधी प्रावधान मौजूद हैं। नई नीति के लागू होने से पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग में कार्यरत संविदा कर्मचारियों के स्थानांतरण की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी एवं व्यवस्थित होने की उम्मीद जताई जा रही है।
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