इंदौर के ग्रामीण इलाकों में स्वच्छता अभियान को लेकर नई रणनीति तैयार की जा रही है। शहर भले ही देश में स्वच्छता के मामले में शीर्ष पर हो, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों की स्थिति अलग नजर आती है। जिले की 334 ग्राम पंचायतों में से आधी से ज्यादा पंचायतों में कचरा उठाने के लिए गाड़ियां उपलब्ध नहीं हैं। वर्तमान में केवल 145 ग्राम पंचायतों में ही कचरा गाड़ियां चल रही हैं। पंचायतों के पास कुल 200 कचरा गाड़ियां हैं, जिनमें से 52 गाड़ियां खराब पड़ी हैं। इसके कारण ग्रामीण इलाकों में कचरा उठाने और उसके निपटान की व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
कचरा गाड़ियों की मरम्मत के निर्देश
ग्रामीण क्षेत्रों में सफाई व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए जिला पंचायत स्तर पर योजना बनाई जा रही है। हाल ही में जिला पंचायत सीईओ हिमांशु प्रजापत ने अधिकारियों के साथ बैठक कर कचरा गाड़ियों की स्थिति, बंद पड़ी गाड़ियों की मरम्मत और नई गाड़ियों की आवश्यकता पर चर्चा की। उन्होंने अधिकारियों को खराब गाड़ियों को जल्द ठीक कराने और जिन पंचायतों में गाड़ियां नहीं हैं, वहां गाड़ियां उपलब्ध कराने की कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं।
गांवों में बनेंगे कचरा निपटान केंद्र
ग्रामीण क्षेत्रों में केवल कचरा उठाने तक व्यवस्था सीमित नहीं रहेगी, बल्कि उसके निपटान के लिए भी स्थानीय स्तर पर इंतजाम किए जा रहे हैं। इसके लिए उपयुक्त स्थानों की पहचान की जा रही है, जहां कचरा निपटान केंद्र बनाए जा सकें। इससे पंचायतों को कचरा दूर ले जाने की समस्या से राहत मिलेगी। हाल ही में सांसद शंकर लालवानी ने भी स्वच्छता और पेयजल व्यवस्था को लेकर समीक्षा की थी, जबकि कलेक्टर शिवम वर्मा ने ग्रामीण स्कूलों में हर महीने पानी की जांच करने के निर्देश दिए हैं।
विशेष स्वच्छता अभियान की तैयारी
अधिकारियों के अनुसार कचरा गाड़ियों की व्यवस्था सुधारने के साथ जल्द ही ग्रामीण स्तर पर विशेष स्वच्छता अभियान शुरू किया जाएगा। इस अभियान के तहत नियमित कचरा उठाने, साफ-सफाई और लोगों को जागरूक करने पर ध्यान दिया जाएगा। बंद गाड़ियों को ठीक कराने के साथ आवश्यकता के अनुसार नई गाड़ियां देने की तैयारी भी जारी है।
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