देवास के होशियारी और मकोडिया गांवों को जोड़ने वाला स्टॉप डेम कम पुल पहली ही बारिश के बाद सवालों के घेरे में है। पुल के दोनों ओर बनाई गई प्रोटेक्शन वॉल बह गई है। इससे ज्यादा चिंता की बात यह है कि दीवार के पीछे की भराव मिट्टी भी कई जगह से कट गई है।
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दैनिक भास्कर रिपोर्टर जब पुल के किनारों पर पहुंचा तो वहां ऐसे कई स्थान मिले, जहां मिट्टी बहने से खाली जगह बन गई थी। फिलहाल पुल पर आवाजाही जारी है, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि यदि तेज बारिश या बाढ़ आई तो यही कटाव आगे चलकर पुल की सुरक्षा के लिए चुनौती बन सकता है।
मौके पर पहुंचने पर पुल के दोनों सिरों पर प्रोटेक्शन वॉल के हिस्से टूटे मिले। जहां सुरक्षा दीवार बनी थी, वहां कई जगह केवल कंक्रीट के अवशेष और बह चुकी मिट्टी दिखाई दी। पुल के एप्रोच के पास भराव वाली मिट्टी खिसकने से गड्ढेनुमा जगह बन गई है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि अभी तक नदी में बड़ा उफान नहीं आया है। सामान्य बारिश और शिप्रा नदी में छोड़े गए पानी के बहाव से ही यह स्थिति बन गई। ग्रामीणों का मानना है कि यदि मानसून के अगले दौर में पानी का दबाव बढ़ा तो कटाव और तेज हो सकता है।

ग्रामीण बोले- निर्माण की गुणवत्ता की हो तकनीकी जांच
ग्रामीण इरफान पटेल, धीरज बना, गोलू वर्मा, टेपू शेख, रंजनसिंह चौहान, लाखन सिंह राठौर, नवाब शेख और शेर मोहम्मद पटेल का आरोप है कि निर्माण कार्य में गुणवत्ता से समझौता किया गया। उनका कहना है कि सरियों और निर्माण सामग्री का उपयोग मानकों के अनुरूप नहीं हुआ। इसी कारण सुरक्षा दीवार पहली ही बारिश में टिक नहीं सकी।
ग्रामीणों का दावा है कि मार्च में भूमिपूजन के बाद निर्माण कार्य जल्दबाजी में पूरा किया गया। उनके अनुसार करीब 28 दिन में पुल तैयार कर दिया गया। उनका कहना है कि करोड़ों रुपए की लागत वाले निर्माण की स्वतंत्र तकनीकी जांच होनी चाहिए। यदि लापरवाही सामने आती है तो निर्माण एजेंसी और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।



विधायक पहुंचे, अधिकारियों को जांच के निर्देश
मामला सामने आने के बाद शुक्रवार को हाटपीपल्या विधायक मनोज चौधरी ने मौके का निरीक्षण किया। उन्होंने क्षतिग्रस्त हिस्से का जायजा लेने के बाद सिंचाई विभाग के अधिकारियों को तत्काल बुलाया और निर्माण गुणवत्ता की जांच कराने के निर्देश दिए।
विधायक ने कहा कि निर्माण कार्य अभी पूर्ण नहीं हुआ है। यदि जांच में किसी प्रकार की गड़बड़ी सामने आती है तो संबंधित एजेंसी और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। साथ ही जहां कमी है, उसे तत्काल दुरुस्त कराया जाएगा।

सिंचाई विभाग की एसडीओ नेहा दुबे भी क्षतिग्रस्त पुल को देखने पहुंची।

स्टॉप डेम कम पुल के क्षतिग्रस्त हो जाने पर विधायक ने क्षेत्र का दौरा किया।
विभाग बोला- पुल सुरक्षित, एजेंसी करेगी मरम्मत
सिंचाई विभाग की एसडीओ नेहा दुबे ने बताया कि पुल की मुख्य संरचना सुरक्षित है। क्षति केवल प्रोटेक्शन वॉल और उसके पीछे की भराव मिट्टी तक सीमित है। उन्होंने बताया कि निर्माण कार्य अभी पूरा नहीं हुआ है और ग्वालियर की कटारे कंस्ट्रक्शन कंपनी इसका निर्माण कर रही है। एजेंसी का अंतिम भुगतान भी नहीं किया गया है।
एसडीओ के अनुसार क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत कराई जाएगी। पूरी प्रोटेक्शन वॉल दोबारा बनाई जाएगी और बारिश के बाद शेष निर्माण कार्य भी पूरा कराया जाएगा।

स्टॉप डेम की प्रोटेक्शन वॉल बह जाने से पुल को भी खतरा उत्पन्न हो गया है।
अब निगाह तकनीकी जांच और मानसून की अगली परीक्षा पर
इस पूरे मामले में फिलहाल दो दावे सामने हैं। ग्रामीण पहली बारिश में सुरक्षा दीवार बहने को निर्माण गुणवत्ता से जोड़ रहे हैं, जबकि सिंचाई विभाग का कहना है कि पुल पूरी तरह सुरक्षित है और नुकसान केवल सुरक्षा व्यवस्था वाले हिस्से तक सीमित है।
पुल के आसपास कटाव हुआ है और उसकी मरम्मत करानी होगी। अब यह देखना होगा कि तकनीकी जांच क्या निष्कर्ष देती है। यदि आने वाले दिनों में तेज बारिश होती है तो यही पुल और उसके आसपास का कटाव इस निर्माण की वास्तविक गुणवत्ता की सबसे बड़ी परीक्षा साबित होगा।
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पुल का हिस्सा पहली बारिश में बहा, कुछ माह पहले बना था, निर्माण गुणवत्ता पर सवाल

देवास जिले में होशियारी और मकोडिया के बीच करीब ढाई करोड़ रुपए की लागत से बना एक पुल पहली तेज बारिश में बह गया। लगभग तीन-चार माह पहले ही इसका निर्माण कार्य पूरा हुआ था, जिससे पुल की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। यह घटना गुरुवार को सामने आई, जब पुल के क्षतिग्रस्त हिस्से का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। पूरी खबर पढ़ें
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