पितृ पक्ष 2026:चतुर्थी श्राद्ध आज, जानें शुभ मुहूर्त और श्राद्ध विधि – Pitru Paksha Chaturthi Shradh 2026 Know Date Muhurat And Rituals In Hindi

पितृ पक्ष 2026:चतुर्थी श्राद्ध आज, जानें शुभ मुहूर्त और श्राद्ध विधि – Pitru Paksha Chaturthi Shradh 2026 Know Date Muhurat And Rituals In Hindi

Chaturthi Shradh 2026: पितृ पक्ष में हर तिथि का अपना विशेष महत्व माना जाता है। इसी क्रम में चतुर्थी तिथि को किया जाने वाला श्राद्ध उन पूर्वजों के लिए किया जाता है, जिनका निधन हिंदू पंचांग की किसी भी चतुर्थी तिथि को हुआ हो। धार्मिक मान्यता है कि पितृ पक्ष में विधि-विधान से तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध करने से पितरों के प्रति श्रद्धा अर्पित की जाती है। साल 2026 में चतुर्थी तिथि 29 सितंबर की शाम 5:09 बजे से शुरू होकर 30 सितंबर की दोपहर 2:55 बजे तक रहेगी। उदयातिथि और श्राद्ध के अपराह्न काल को ध्यान में रखते हुए चतुर्थी श्राद्ध 30 सितंबर 2026, बुधवार को किया जाएगा।


 




Pitru Paksha Chaturthi Shradh 2026 Know Date Muhurat and Rituals in hindi

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– फोटो : Amar Ujala


चतुर्थी श्राद्ध किसका किया जाता है?

पितृ पक्ष में जिस पूर्वज की मृत्यु चतुर्थी तिथि को हुई हो, उनका श्राद्ध चतुर्थी तिथि पर करने की परंपरा है। इसे आम बोलचाल में चौथ का श्राद्ध भी कहा जाता है। श्राद्ध कर्म का उद्देश्य पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करना माना जाता है। परिवार के लोग अपनी परंपरा और सामर्थ्य के अनुसार तर्पण, पिंडदान, भोजन और दान आदि करते हैं।


Pitru Paksha Chaturthi Shradh 2026 Know Date Muhurat and Rituals in hindi

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– फोटो : freepik


चतुर्थी श्राद्ध 2026 का मुहूर्त

  • कुतुप मुहूर्त: सुबह 11:47 बजे से दोपहर 12:35 बजे तक
  • रौहिण मुहूर्त: दोपहर 12:35 बजे से 1:22 बजे तक
  • अपराह्न काल: दोपहर 1:22 बजे से 3:45 बजे तक
  • श्राद्ध कर्म में अपराह्न काल को प्रधान समय माना जाता है।


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– फोटो : Amar Ujala


चतुर्थी श्राद्ध की विधि क्या है?

  • श्राद्ध के दिन सुबह स्नान करके घर की साफ-सफाई करें।
  • इसके बाद पितरों का स्मरण करते हुए श्रद्धापूर्वक श्राद्ध कर्म का संकल्प लिया जाता है।
  • परिवार की परंपरा के अनुसार पूजा स्थल को शुद्ध करके आगे की विधि शुरू करें
  • तर्पण के समय कुश धारण करने की परंपरा है।
  • जल में काले तिल, जौ और पुष्प मिलाकर पितरों का नाम और गोत्र लेते हुए जल अर्पित किया जाता है।
  • इसके बाद चावल, जौ और काले तिल से पिंड तैयार कर पितरों को समर्पित करने की परंपरा है।
  • श्राद्ध के भोजन में परिवार की परंपरा के अनुसार सात्विक व्यंजन बनाए जाते हैं।
  • धार्मिक परंपरा में पंचबलि का भी महत्व बताया गया है।
  • भोजन का कुछ हिस्सा गाय, कौवे, कुत्ते और चींटियों आदि के लिए निकाला जाता है।
  • इसके बाद ब्राह्मण भोजन और यथाशक्ति दान-दक्षिणा देने की परंपरा है।


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श्राद्ध के दिन किन बातों का रखें ध्यान?

  • पितृ पक्ष के दौरान सात्विक आहार और संयमित आचरण रखने की परंपरा है।
  • धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस अवधि में मांसाहार और नशीले पदार्थों से दूरी रखनी चाहिए।
  • कई परिवार अपनी परंपरा के अनुसार प्याज-लहसुन का भी सेवन नहीं करते हैं।
  • श्राद्ध कर्म में इस्तेमाल होने वाले पात्र और सामग्री को लेकर भी अलग-अलग परंपराएं हैं।
  • इसलिए अपने परिवार की चली आ रही परंपरा और स्थानीय धार्मिक विधि का पालन करना उचित माना जाता है।
  • श्राद्ध के दौरान भोजन का अनादर नहीं करना चाहिए।
  • पितृ कर्म श्रद्धा से किया जाता है, इसलिए इस दौरान मन, वचन और कर्म में संयम रखने की परंपरा है।


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