आपने हॉरर फिल्म तुम्बाड देखी है? अगर हां तो आपको मराठी लोककथाओं पर बनी ये हॉरर फिल्म ‘घबाड़-कुंड’ पसंद आने वाली है। एक शापित कुआं और उसमें छुपा खजाना, एक प्रेग्नेंट महिला और उसके वंशज की ये कहानी आपको हैरान करती है।
आपने सोहम शाह की हॉरर फिल्म तुम्बाड देखी होगी। महाराष्ट्र की एक लोककथा जिसे फिल्म का रूप दिया गया था। अब तुम्बाड जैसी एक और फिल्म आई है जिसका नाम है ‘घबाड़-कुंड’। ये एक मराठी फिल्म है जो प्राइम वीडियो पर ट्रेंड कर रही है। मराठी भाषा में घबाड़ का मतलब छुपा हुआ या अचानक मिलने वाला और कुंड का मतलब कुएं से है। ये फिल्म एक ऐसे शापित कुएं के बारे में हैं जहां सोना छुपा हुआ है। इस सोने को पाने की कोशिश करने वाले इसमें डूब कर मर गए। लेकिन आखिर इस कुएं का रहस्य क्या है? इस फिल्म में ये बताया गया है। ‘घबाड़-कुंड’ मराठी सिनेमा का पहला यूनिवर्स बताया जा रहा है जिसमें आगे कई और फिल्में रिलीज की जाएंगी। जानिए इस अनोखी फिल्म की कहानी क्या है? इस फिल्म को IMDB पर 7.5 की रेटिंग मिली है।
फिल्म ‘घबाड़-कुंड’ की कहानी
फिल्म ‘घबाड़-कुंड’ की शुरुआत एक अय्याश जमीनदार होती है। फिल्म की शुरुआत में उस अमीर जमीनदार को अन्य महिलाओं के साथ एन्जॉय करते दिखाया जाता है। तभी उसके घर पर डाकुओं की टोली हमला कर देती है। डाकू सबसे पहले हवेली की रक्षा कर रहे सभी लोगों को मार देते हैं और फिर जमीनदार को लूटने के इरादे से उसपर हमला कर देते हैं। जमीनदार के मरने के बाद डाकू उसका घर का कीमती सामान, गहने लूट कर एक पोटली में बांध कर ले चलते हैं। डाकुओं का राजा जब वो पोटली देखता है तो उसे अपने घोड़े पर रखकर चल देता है। लेकिन इस टोली में एक धूरा नाम का डाकू भी होता है जो अपने ही सरदार को धोखे से मार देता है और वो पोटली लेकर भाग जाता है। अन्य डाकू उसके पीछे आते हैं, लेकिन धूरा अब भाग चुका है।
एक शापित कुआं
कहानी में आगे दिखाया जाता है कि धूरा थक कर वो गहनों की पोटली उस कुएं में डाल देता है। और खुद बाहर बैठ जाता है। तभी उसे कुएंं से एक औरत की आवाज आती है। जैसे ही धूरा नीचे देखता है उसे वो औरत अपनी तरफ खींच लेती है और मार देती है। ये शापित कुआं था। बाद में इस कुएंं को मंत्रो से बांध दिया जाता है। वहां रहने वाले लोग जानते हैं कि कुएंं में खजाना छुपा है, लेकिन इसकी एक चुड़ैल और एक सांप इस खजाने की रक्षा कर रहे हैं।
दिलीप होता है असली हीरो
कहानी आगे बढ़ती है और फिल्म के लीड किरदार दिलीप को दिखाया जाता है। वो अपनी पत्नी के साथ साले के घर में रह रहा है। दिलीप का कोई काम धंधा नहीं चल रहा। वो गरीब है और उसकी पत्नी सोनी उसे हर वक्त साले के घर में रहने के लिए ताना मारती है। उसका साला भी लालची आदमी है। लेकिन दिलीप अपने खेतों में काम कर खुश है। एक रात उसकी पत्नी उसे ताना मारती है और दिलीप खाने की प्लेट छोड़कर अपनी साइकिल से खेत की तरफ भाग जाता है। तभी उसके पीछे चार कुत्ते लग जाते हैं। दिलीप कुत्तों से इतना डर जाता है कि वो जंगल के रास्ते से कुएंं तक पहुंच जाता है।उसे कुएंं से आवाज आती है और एक औरय्त उसे अंदर खींचने इकी कोशिश करती है। तभी दिलीप अपनी मां का नाम लेकर जोर से चिल्लाता है और वो उस चुड़ैल के चुंगल से छूट जाता है। वो पहला ऐसा इंसान होता है जो कुएंं से जिंदा वापस निकलता है।
कुएंं से बच निकलता है दिलीप
पुरे गांव में ये खबर फेल जाती है कि दिलीप एक अकेला शख्स है जो कुएंं से ज़िंदा बाहर निकल आया है। उससे मिलने एक पुलिस असिस्टेंट आता है। वो दिलीप से उसकी जन्म दे जुड़ी जानकारी बताने को कहता है। जब दिलीप उसे अपने पैदा होने के दिन और साल के बारे में बताता है वो हैरान हो कर वहां से चला जाता है। पुलिस असिस्टेंट दिलीप की ये जानकारी खंगरी नाम के तांत्रिक को देता है। खंगरी सालों से उस खजाने को लूटना चाहता था। अब उसे पता चला कि दिलीप ही इस खजाने का असली वंसज है। लेकिन कैसे ये कहानी में आगे पता चलेगा। खंगरी एक और तांत्रिक के साथ मिलकर कुएंं को लूटने का प्लान बनाता है। वो दिलीप पर जोर देता है कि पूर्णिमा के दिन इस कुएंं को लूटा जा सकता है। दिलीप को अपनी लालची बीवी और साले की वजह से ये बात माननी पड़ती है। लेकिन ये काम एक कुंवारी बच्ची के हाथों से होगा। रांगी नाम की महिला अपनी बच्ची को इस काम के लिए कुएंं में ले जाती है और बलि देने के लिए एक बकरी भी।
खजाने की तलाश
दिलीप कुछ और लोगों के साथ कुएंं में उतरता है। उसे उस महिला की आवाज सुनाई देती है और वो आगे बढ़ जाता है। ये आवाज सिर्फ दिलीप को सुनाई देती है। आखिरी इस चुड़ैल और दिलीप का क्या रिश्ता होता है? कहानी आगे बढ़ती है और वो चुड़ैल रांगी की बेटी को अपनी गोद में ले लेती है। दूसरी तरफ धूरा की आत्मा भी जीवित हो जाती है। वही धूरा जिसने खजाना लूट कर इस कुएंं में छुपाया था। लेकिन ये चुड़ैल कौन है? कहानी में आगे उस लूट वाले दिन के बारे में बताया जाता है। दरअसल, जब जमीनदार को लूटने के डाकू पहुंचे थे तो उस दिन धूरा डाकू ने एक प्रेग्नेंट महिला को जान से मार दिया था। वही महिला धूरा से बदला लेने के लिए उस कुएंं में बस जाती है और धूरा को मार देती है।
कहानी का अंत
अब आप सोच रहे होंगे कि उस महिला का दिलीप से क्या कनेक्शन है? तो जब धूरा ने उसे ने उस प्रेग्नेंट महिला को मारा था तब वो कुछ देर के लिए जिंदा थी। इस दौरान वो एक बच्चे को जन्म देती है और दिलीप उसी बच्चे का वंशज होता है। वहीं खंगरी भी धूरा के वंश से था। अंत में वो औरत धूरा को हमेशा के लिए खत्म कर देती है। उस सूखे कुएंं में आचानक पानी भर जाता है। इस लड़ाई में दिलीप बच जाता है और वो रांगी की बेटी को बचा लाता है। लेकिन ये कहानी जब खत्म होती है एक और नई कहानी को जन्म देती है। मतलब आगे इससे जुड़ी कोई नई फिल्म बनने वाली है।


