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छतरपुर में आशा एकता संघ मध्यप्रदेश के बैनर तले शहरी और ग्रामीण आशा कार्यकर्ताओं ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के मिशन संचालक के नाम ज्ञापन सौंपा। आशा कार्यकर्ताओं ने ज्ञापन के माध्यम से गर्भवती शीघ्र पंजीयन सहित कई प्रोत्साहन राशियों को बंद किए जाने पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की। प्रदेश अध्यक्ष हीरा देवी सिंह चंदेल ने बताया कि पहले आशा कार्यकर्ताओं को निश्चित मानदेय के साथ लगभग 64 प्रकार के कार्यों के लिए प्रोत्साहन राशि मिलती थी। उन्होंने कहा कि अप्रैल 2026 से कुछ महत्वपूर्ण मदों की राशि बंद कर दी गई है, जिससे उनकी आजीविका प्रभावित हो रही है। चंदेल के अनुसार, यह उनके साथ अन्याय है क्योंकि उनकी आजीविका पूरी तरह इन्हीं प्रोत्साहन राशियों पर निर्भर है। ज्ञापन में बंद की गई प्रमुख प्रोत्साहन राशियों का भी उल्लेख किया गया है। इनमें गर्भवती शीघ्र पंजीयन की 200 रुपए, राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस पर मोबिलाइजर राशि के 100 रुपए और कुपोषित बच्चों को एनआरसी में भर्ती के बाद फॉलोअप के लिए मिलने वाले 900 रुपए शामिल हैं। मांनदेय यथावत रखने की मांग
आशा कार्यकर्ताओं की प्रमुख मांगों में मानदेय को स्थायी और सुनिश्चित करना, बंद की गई सभी प्रोत्साहन राशियों को पुनः शुरू करना और भुगतान एक निश्चित तारीख को एक साथ करना शामिल है। इसके अतिरिक्त, उन्होंने सेवा समाप्ति नोटिस पर रोक लगाने, डिजिटल कार्यों के लिए मोबाइल या राशि उपलब्ध कराने, अन्य विभागीय कार्यों का अलग से पारिश्रमिक देने और मातृत्व अवकाश के दौरान मानदेय यथावत रखने की मांग की है। कार्यकर्ताओं ने मांग की कि जब तक मानदेय पूरी तरह निर्धारित नहीं हो जाता, तब तक सभी पूर्व प्रोत्साहन राशियां यथावत रखी जाएं। उन्होंने प्रत्येक माह समय पर और पारदर्शी भुगतान सुनिश्चित करने की भी अपील की।
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