कपड़े का झोला साथ रखने की आदत विकसित करने के लिए नगर निगम ने मैं हूं झोलाधारी जैसे जनजागरूकता अभियान चलाए। निगम के आयोजनों में कपडे के झोले वितरित किए…और पढ़ें

HighLights
- कपड़े का झोला साथ रखने की आदत विकसित करने के लिए नगर निगम ने ‘मैं हूं झोलाधारी’ जैसे जनजागरूकता अभियान चलाए
- निगम के आयोजनों में कपडे के झोले वितरित किए जाने लगे, कपड़े के झोले के फायदे बताए जाने लगे
- सिंगल प्लास्टिक के इस्तेमाल को प्रतिबंधित करते हुए सिंगल यूज प्लास्टिक बनाने और संग्रहित करने वालों के विरुद्ध कार्रवाई की गई
कुलदीप भावसार, नईदुनिया, इंदौर। नवाचार के लिए देशभर में पहचाने जाने वाले इंदौर में पांच वर्ष पहले हालात यह थे कि बाजार में हर जगह सिर्फ प्लास्टिक के बैग नजर आते थे। छोटी-छोटी जरूरतों के लिए भी प्लास्टिक के बैग उपयोग होते थे। कपड़े के बैग का उपयोग जैसे लोग भूल ही गए थे। इन प्लास्टिक बैग का निस्तारण भी मुश्किल था। फिर शुरू हुआ प्लास्टिक बैग के विरुद्ध अभियान।
कपड़े का झोला साथ रखने की आदत विकसित करने के लिए नगर निगम ने मैं हूं झोलाधारी जैसे जनजागरूकता अभियान चलाए। निगम के आयोजनों में कपडे के झोले वितरित किए जाने लगे। कपड़े के झोले के फायदे बताए जाने लगे। सिंगल प्लास्टिक के इस्तेमाल को प्रतिबंधित करते हुए सिंगल यूज प्लास्टिक बनाने और संग्रहित करने वालों के विरुद्ध कार्रवाई की गई। बाजारों में झोला एटीएम लगाए गए। हालत यह है कि आज प्लास्टिक बैग के उपयोग में 50 प्रतिशत से ज्यादा की कमी आई है। लोग कपडे के बैग इस्तेमाल करने लगे हैं।
अभियान को मिला जबरदस्त प्रतिसाद
मैं हूं झोलाधारी अभियान को आम नागरिकों का जबरदस्त प्रतिसाद मिला। विशेष बात यह रही कि इस अभियान के तहत वितरित किए जाने वाले झोले स्व-सहायता समूहों की महिलाओं द्वारा तैयार किए जाते हैं। अभियान का सीधा असर यह हुआ कि शहर में रोजाना निकलने वाले कचरे में करीब 20 टन पालीथीन की मात्रा कम हो गई।
थ्री-आर सेंटरों ने की राह आसान, महिलाओं को मिला रोजगार
अभियान की राह प्रत्येक जोन में स्थापित थ्री-आर सेंटरों ने आसान कर दी। इन सेंटरों पर नागरिक पुराने कपडे और अन्य सामग्री छोड़ जाते हैं ताकि इनका उपयोग कोई अन्य जरूरतमंद कर सके। थ्री-आर सेंटरों पर आने वाले अच्छे कपड़ों से झोले बनाए जाने लगे। इससे महिलाओं को रोजगार मिला।
बाजारों में लगाए झोला एटीएम
अभियान के दूसरे चरण में नगर निगम ने मुख्य बाजारों में झोला एटीएम स्थापित किए। इन झोला एटीएम पर कोई भी व्यक्ति 10, 20 रुपये देकर कपडे का झोला प्राप्त कर सकता है। निगम के इस नवाचार को भी आम नागरिकों का जबरदस्त प्रतिसाद मिला। अभियान के तहत दुकानदारों से भी अपील की गई कि वे ग्राहकों को कपडे का झोला उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित करें।
पचास प्रतिशत से ज्यादा कमी आई पॉलीथिन बैग उपयोग में
शहर को प्लास्टिक बैग फ्री बनाने के उद्देश्य से शुरू किए गए मैं हूं झोलाधारी और झोला एटीएम अभियान का असर यह हुआ कि शहर में प्लास्टिक बैग के उपयोग में 50 प्रतिशत से ज्यादा की कमी आई। इसके साथ ही निगम ने शहर में सिंगल यूज प्लास्टिक बनाने वाले 150 से ज्यादा कारखानों को बंद किया। सिंगल यूज प्लास्टिक का व्यापार या इसका संग्रहण करने वालों के खिलाफ सख्त चालानी कार्रवाई की गई। पिछले एक साल मेें 50 लाख रुपये से ज्यादा जुर्माना लगाया जा चुका है।
ये हैं अभियान के मुख्य उद्देश्य
- अभियान का मुख्य उद्देश्य नागरिकों में कपड़े के थैलों का उपयोग की आदत डालना है। इसके तहत नागरिकों को खरीदारी के समय पालीथीन के बजाय खुद के कपड़ों से बने झोलों का उपयोग करने की आदत डालने के लिए कहा जाता है।
- अभियान का एक उद्देश्य कचरे में पालीथीन की मात्रा को कम करना है। आम जनता, प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को अभियान से जोड़ने के लिए शहर के विभिन्न हिस्सों में समय-समय पर जागरूकता कार्यक्रम और रैलियां आयोजित की गई।
जनता ने दिया अच्छा प्रतिसाद दिया
प्लास्टिक बैग पर्यावरण के लिए नुकसानदायक है। हमने मैं हूं झोलाधारी जैसे अभियान शुरू किए। इसका अच्छा प्रतिसाद मिल रहा है। शहर में निकलने वाले कचरे में पालीथीन की मात्रा भी कम हुई है। -पुष्यमित्र भार्गव, महापौर इंदौर
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