रवि किशन ने हाल ही में दिलजीत दोसांझ की फिल्म सतलुज को लेकर हुए विवाद के बारे में बात की। उन्होंने कहा कि उन्हें इस मामले की पूरी जानकारी नहीं है। लेकिन साथ ही उन्होंने कहा कि फिल्ममेकर्स को जिम्मेदार होना चाहिए।
भोजपुरी और हिंदी फिल्मों में काम करने वाले रवि किशन ने हाल ही में दिलजीत की फिल्म सतलुज को लेकर सेंसरशिप पर छिड़ी चर्चा को लेकर बात की। उन्होंने कहा कि उन्हें इसके बारे में ज्यादा जानकारी तो नहीं है। उन्होंने कहा कि वो बस इतना जानते हैं कि कोई फिल्म आई थी फिर उसे हटा दिया गया था। रवि किशन ने फिल्मों में सेंशरशिप के बारे में बात करते हुए कहा कि ये नई बात नहीं है। कांग्रेस के शासनकाल में भी ये हुआ है।
सतलुज विवाद के बारे में क्या बोले रवि किशन?
स्क्रीन से खास बातचीत में रवि किशन से पूछा गया कि वो सीबीएफसी के बारे में क्या सोचते हैं और उन्हें कैसा लगेगा अगर सीबीएफसी उनकी किसी फिल्म में बहुत ज्यादा कट्स लगवाएं? रवि किशन से जब सतलुज को लेकर बात हुई तो उन्होंने कहा कि संवेदनशीलता की बात होगी। इसके अलावा रवि ने खुद को उस मुद्दे से दूर रखा। उन्होंने कहा, “मुझे इस बारे में बिल्कुल जानकारी नहीं है। मुझे बस ये पता है कि फिल्म आई और फिर हट गई। सच कहूं तो, मुझे डिटेल्स नहीं पता है।”
रवि बोले- फिल्म बनाते वक्त मेकर्स को जिम्मेदार होना चाहिए
रवि किशन ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि फिल्म बनाते वक्त आर्टिस्ट्स को जिम्मेदार होना चाहिए। उन्होंने कहा कि फिल्म को मनोरंजक बनाने के चक्कर में उन्हें किसी की भावनाओं को आहत नहीं करना चाहिए, न किसी ऐतिहासिक घटना को गलत तरीके से दिखाना चाहिए।एक्टर ने आगे धुरंधर, मां बहन और वेब सीरीज मामला लीगल है का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि इन प्रोजेक्ट्स को सफल तरीके से रिलीज किया जा सके।
रवि बोले- हमारी समाज के प्रति जवाबदेही है
रवि ने आगे कहा, “हमारी समाज के प्रति जवाबदेही है क्योंकि हम जो बनाते हैं उसका असर युवाओं पर पड़ता है। स्क्रिप्ट लिखते वक्त या फिल्म बनाते वक्त हमें जिम्मेदार होना चाहिए।” उन्होंने कहा कि पहले किताबें जलाई गई हैं, लोगों को गलत इतिहास पढ़ाया गया है और फिल्मों को ऐतिहासिक इवेंट्स को दिखाते वक्त बहुत ध्यान रखना चाहिए।
कांग्रेस के वक्त पर भी ऐसा होता था
रवि से पूछा गया कि अगर उनके किसी प्रोजेक्ट पर सीबीएफसी कट्स की एक लंबी लिस्ट भेजे तो वो क्या कहेंगे? उन्होंने कहा वो पूछेंगे कि क्यों? मैंने क्या गलती की है। उन्होंने कहा- शोले के वक्त भी ये हुआ था। ऐसा 1000 फिल्मों के साथ हुआ है। कांग्रेस के वक्त में भी ऐसा हुआ है। किशोर कुमार रेडियो पर बैन हो गए थे। इतिहास में बहुत तांडव मचा है। लेकिन अब कुछ हो जाता है, मैं पूछूंगा कि क्या समस्या है? क्या मैं किसी समुदाय को ठेस पहुंचा रहा हूं। क्या मैं इतिहास को गलत तरीके से दिखा रहा हूं या कोई झूठी कहानी दिखा रहा हूं? और फिर मैं उसे एडिट करूंगा। क्योंकि बहुत पैसा लगता है फिल्मों में।



