बढ़ रहा कन्वीनिएंट ईटिंग का चलन:स्नैक्स में भी सेहत, 86% प्रोटीन चाहते हैं, 32% ज्यादा दाम देने को तैयार

बढ़ रहा कन्वीनिएंट ईटिंग का चलन:स्नैक्स में भी सेहत, 86% प्रोटीन चाहते हैं, 32% ज्यादा दाम देने को तैयार



बढ़ रहा कन्वीनिएंट ईटिंग का चलन:स्नैक्स में भी सेहत, 86% प्रोटीन चाहते हैं, 32% ज्यादा दाम देने को तैयार


करीब दो दशक पहले भारतीय शहरों में फास्ट फूड ने खाने की रफ्तार बदली थी। फिर मोबाइल और इंटरनेट के दौर में होम डिलीवरी ने यह सवाल खत्म कर दिया कि खाना बनाने का समय किसके पास है। अब अगला बदलाव और दिलचस्प है। लोगों को खाना जल्दी चाहिए, लेकिन सिर्फ पेट भरने वाला नहीं। उन्हें प्रोटीन चाहिए, साफ-सुथरी सामग्री चाहिए और सेहत का फायदा भी। कुछ ऐसे फूड आइटम जो कभी खास, महंगे या फिटनेस उत्पादों से जुड़े थे, अब रोजमर्रा की रसोई में अपनी जगह बना रहे हैं। चिप्स की जगह मखाना, मीठे दही की जगह ग्रीक योगर्ट, सामान्य स्नैक की जगह प्रोटीन बार और रिफाइंड आटे की जगह मिलेट्स ले रहे हैं। देश में कन्वीनिएंट यानी सुविधाजनक ईटिंग का मतलब अब सिर्फ इंस्टेंट या फास्ट फूड नहीं, बल्कि इंस्टेंट और हेल्दी फूड ले रहा है। पारंपरिक और रीजनल फूड को अब मिल रहा नया रूप पारंपरिक और रीजनल फूड्स को भी सेहत के नजरिए से नया रूप दिया जा रहा है। एक क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म की एक रिपोर्ट के मुताबिक बीते साल भर में सोया चंक्स और सत्तू की मांग दोगुनी से अधिक हो गई, जबकि मखाना, भुना हुआ चना, मुरमुरा, झालमुड़ी की मांग भी प्रमुख बनी रही। पेय पदार्थों में भी हेल्दी विकल्पों की ओर रुझान स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। तुलसी, ग्रीन टी जैसी हेल्दी चाय की बिक्री में सालाना 26% की वृद्धि हुई। समय बचाने वाले हेल्दी फूड्स का बढ़ रहा है कारोबार मार्केट रिसर्च फर्म रेडसीर की रिपोर्ट के मुताबिक देश में पैकेज्ड फूड एंड बेवरेज का मार्केट करीब 2030 तक करीब 15 हजार करोड़ रुपए का हो जाएगा। टाटा, आईटीसी, नेस्ले, हिंदुस्तान लीवर जैसी बड़ी कंपनियां अब हेल्दी स्नैक पर फोकस कर रही हैं। कंपनियों को साफ दिख रहा है कि नया ग्राहक एक ही कैटेगरी में बंद नहीं है। वह सुबह ओट्स खाता है, दोपहर में घर का खाना और शाम को प्रोटीन शेक खरीद सकता है। 2025-26 में प्रमुख कंपनियों के 70% से ज्यादा नए लॉन्च सेहत और सुविधा से जुड़े थे। मोर्डोर इंटेलिजेंस की रिपोर्ट के मुताबिक मिलेट से बने स्नैक्स और नमकीन का बाजार वैश्विक और घरेलू स्तर पर 5.9% से 10% से ज्यादा की सालाना रफ्तार से बढ़ रहा है। मिलेट्स से बने स्नैक्स के बाजार में नमकीन की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा (लगभग 53.9%) है। – भारत में लोग खाना पकाना छोड़ नहीं रहे। लेकिन समय की कमी बढ़ने के साथ रोजमर्रा के खाने में सुविधा की कीमत बढ़ गई है। अब उपभोक्ता हर भोजन में चार चीजों का संतुलन बना रहा है-समय, स्वाद, सेहत और कीमत। भारतीय उपभोक्ता न्यूट्रिशन, सामर्थ्य और सस्टेनेबिलिटी को प्राथमिकता दे रहे हैं। स्थानीय उत्पादों, डिजिटल ग्रोसरी प्लेटफॉर्म और स्वास्थ्य तकनीकों को अपना रहे हैं।(रवि कपूर, पार्टनर और लीडर-रिटेल और कंज्यूमर सेक्टर, पीडब्ल्यूसी इंडिया) पहले फास्ट फूड, फिर डिलीवरी… अब ‘स्मार्ट फूड’ – इंडिया हेल्दी स्नैकिंग समिट 2026 में 6,000 से अधिक उत्तरदाताओं पर किए गए एक सर्वे में पाया गया कि 86% लोगों ने स्नैक्स चुनते समय प्रोटीन को महत्वपूर्ण माना, जबकि 62% ने सामग्री की स्पष्ट जानकारी को प्राथमिकता दी। 32% ने कहा कि वे प्रोटीन युक्त उत्पादों के लिए अधिक कीमत चुकाने को तैयार हैं। – मार्केट रिसर्च फर्म इनोवा के एक ग्लोबल सर्वे में शामिल 5 में से 3 उपभोक्ता सप्ताह में एक बार या उससे अधिक बार रेडीमेड फूड खरीदते हैं। 5 में एक उपभोक्ता दिन में एक से ज्यादा बार ऐसा करता है। 41% के खरीदारी फैसलों पर सुविधा बड़ा असर डालती है। – 86% भारतीय स्नैकर्स के लिए स्नैक चॉइस में प्रोटीन महत्वपूर्ण है – 74% हेल्दी स्नैक में रीजनल फूड को जरूर ट्राई करना चाहेंगे – 61% रिफाइंड शुगर के बजाय गुड़ या खजूर के स्नैक ट्राई करेंगे – 59% लोग बच्चों के हेल्दी स्नैक पर ज्यादा खर्च करने को तैयार हैं। (स्रोत- हेल्दी स्नैकिंग रिपोर्ट 2026)



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