मालवा रीजन में इस वर्ष कम वर्षा ने चिंता बढ़ा दी है और इसका असर आगामी समय में दिखाई दे सकता है। इंदौर में भी इस वर्ष सामान्य से करीब 27 प्रतिशत कम बार…और पढ़ें

HighLights
- जल संकट से पहले अलर्ट मोड में प्रशासन
- यशवंत सागर सहित अन्य तालाबों तक पहुंचेगा नर्मदा जल
- संकट से बचने के लिए पानी बचाने की होगी पहल
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर : मालवा रीजन में इस वर्ष कम वर्षा ने चिंता बढ़ा दी है और इसका असर आगामी समय में दिखाई दे सकता है। इंदौर में भी इस वर्ष सामान्य से करीब 27 प्रतिशत कम बारिश होने के कारण आगामी महीनों में जल संकट की आशंका बढ़ गई है। इसे देखते हुए प्रशासन ने अभी से जल प्रबंधन की तैयारियां शुरू कर दी हैं।
बुधवार को संभागायुक्त भास्कर लाक्षाकार ने जल उपलब्धता और आगामी व्यवस्था को लेकर अधिकारियों के साथ बैठक की। इसमें कम बारिश के कारण जलस्रोतों पर पड़े असर और भविष्य की जरूरतों पर चर्चा की गई। कम बारिश का सबसे बड़ा असर यशवंत सागर पर पड़ा है।
अपेक्षित मात्रा में पानी नहीं पहुंच सका
पर्याप्त वर्षा नहीं होने से इसमें अपेक्षित मात्रा में पानी नहीं पहुंच सका। इसके चलते तालाब की प्राकृतिक सफाई भी प्रभावित हुई है और जलकुंभी सहित अन्य समस्याएं बनी हुई हैं। अब गंभीर लिंक योजना के माध्यम से यशवंत सागर में नर्मदा का पानी पहुंचाने की तैयारी की जा रही है।
पानी के प्रवाह से प्राकृतिक सफाई में भी मदद मिलेगी
इससे एक ओर तालाब का जलस्तर बढ़ेगा, वहीं पानी के प्रवाह से प्राकृतिक सफाई में भी मदद मिलेगी। बैठक में शहर के अन्य तालाबों में भी निर्धारित जलस्तर बनाए रखने पर विचार किया गया। लिम्बोदी सहित अन्य तालाबों में जरूरत के अनुसार नर्मदा जल से जलस्तर बढ़ाने की संभावनाएं देखी जा रही हैं। इसके लिए उपलब्ध संसाधनों और तकनीकी विकल्पों पर भी मंथन किया जाएगा।
निर्माण में ट्रीटेड पानी के उपयोग पर जोर
शहर में पानी की खपत कम करने के लिए जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे, ताकि लोग स्वयं पानी बचाने की तरफ बढ़ें। भवन निर्माण कार्यों में उपचारित (ट्रीटेड) पानी के उपयोग को अनिवार्य करने की तैयारी है। इसके लिए आगामी दिनों में एसओपी जारी की जा सकती है। निर्माण कार्यों में भूजल के बजाय उपचारित पानी इस्तेमाल करने से बोरिंग और भूजल दोहन पर दबाव कम होगा।
अंधाधुंध भूजल दोहन पर रोक की तैयारी
भूजल के अंधाधुंध दोहन रोकने को लेकर भी चर्चा की गई। आने वाले समय में नए बोरिंग पर प्रतिबंध लागू हो सकता है। इससे पहले गर्मियों में चार माह बोरिंग कराने पर प्रतिबंध लागू होता है। जिले में कम बारिश को देखते हुए इस बार पहले ही प्रतिबंधात्मक आदेश लागू हो सकते हैं। गौरतलब है कि बीते वर्ष शहर के कई बोरिंग सूखने से पानी को लेकर हाहाकार मचा था, इसलिए अभी से भूजल के अधिक दोहन पर रोक लग सकती है।
पानी बचाने के लिए जागरूक कार्यक्रम भी किए जाएंगे
कम वर्षा को देखते हुए जलस्रोतों को सुरक्षित रखने के साथ उपलब्ध पानी के नियंत्रित उपयोग पर जोर दिया जा रहा है। पानी बचाने के लिए जागरूक कार्यक्रम भी किए जाएंगे। आगामी समय में पानी की समस्या उत्पन्न नहीं हो, इसलिए अभी से योजना तैयार कर रहे है। – भास्कर लाक्षाकार, संभागायुक्त
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