नई दिल्ली में आयोजित 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन कई ऐतिहासिक और बड़े फैसलों के साथ संपन्न हुआ। इसके समापन पर जारी किए गए नई दिल्ली घोषणापत्र में विश्व राजनीति और व्यापार से जुड़े कई गंभीर मुद्दों को उठाया गया। घोषणापत्र में साफ कहा गया है कि किसी भी रूप में हिंसा, सीमा पार आतंकवाद और युद्ध को किसी भी सूरत में सही नहीं ठहराया जा सकता।
इसके साथ ही, मौजूदा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की एकतरफा व्यापार नीतियों, टैरिफ और आर्थिक पाबंदियों पर गहरा ऐतराज जताया गया है। ब्रिक्स समूह ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद, आईएमएफ और विश्व बैंक जैसी पुरानी वैश्विक संस्थाओं का स्वरूप अब बदलना चाहिए, ताकि ग्लोबल साउथ यानी विकासशील देशों को उनका वाजिब हक और उचित प्रतिनिधित्व मिल सके।
पहलगाम आतंकी हमले पर ब्रिक्स ने क्या कड़ा संदेश दिया?
- साझा घोषणापत्र में 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर में हुए कायराना आतंकी हमले की कड़े शब्दों में निंदा की गई, जिसमें 26 निर्दोष लोग मारे गए थे और कई अन्य गंभीर रूप से घायल हुए थे।
- ब्रिक्स देशों ने पूरी दुनिया से अपील की है कि आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाए और इसे लेकर अपनाए जाने वाले किसी भी तरह के दोहरे मापदंड को तुरंत खारिज किया जाए।
- सदस्य देशों ने साफ कहा कि आतंकवाद का किसी भी धर्म, राष्ट्रीयता या समुदाय से संबंध नहीं है, और सीमा पार आतंकवादियों की आवाजाही, आतंकवाद को मिलने वाले वित्तपोषण तथा उनके सुरक्षित पनाहगाहों को हर हाल में नष्ट किया जाना चाहिए।
- घोषणापत्र में संयुक्त राष्ट्र के ढांचे के तहत अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर व्यापक संधि (सीसीआईटी) को बिना किसी देरी के अंतिम रूप देने और लागू करने का पुरजोर आह्वान किया गया।
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