शंघाई सहयोग संगठन यानी एससीओ से भारत को कई उम्मीदें हैं। सूत्रों का दावा है कि नई दिल्ली में 12-13 सितंबर को होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मलेन को शानदार बनाने की नींव यहीं पड़ेगी। एससीओ और ब्रिक्स की हलचल के चलते 31 अगस्त से सितंबर के दूसरे सप्ताह तक अमेरिकी रणनीतिकारों की निगाह भी इसी क्षेत्र में रहेगी। अमेरिका इन दोनों संगठनों के मजबूती से असहज होता है।
विदेश मामलों के जानकार रंजीत कुमार के मुताबिक एससीओ के बाद ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 होना है। रूस की निगाह ब्रिक्स और एससीओ दोनों को मजबूत करने की है। भारत भी अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्थितियों को लेकर संवेदनशील है। पाकिस्तान भी एससीओ का सदस्य देश है। वहां एक स्थान पर, एक छत के नीचे उसके भी शिखर नेता होंगे। ऐसे में एससीओ शिखर सम्मेलन से इतर प्रधानमंत्री की वैश्विक नेताओं से भेंट नए आयाम स्थापित कर सकती है।
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