ब्रेक के बाद फिर एक्टिव हुआ मानसून, 12 जिले भीगेंगे:  MP के जबलपुर, रीवा-शहडोल संभाग में अलर्ट; कल से इंदौर संभाग में भी बारिश – Bhopal News

ब्रेक के बाद फिर एक्टिव हुआ मानसून, 12 जिले भीगेंगे: MP के जबलपुर, रीवा-शहडोल संभाग में अलर्ट; कल से इंदौर संभाग में भी बारिश – Bhopal News

गुरुवार रात में भोपाल और विदिशा में तेज बारिश हुई।

तीन दिन के ब्रेक के बाद मध्य प्रदेश में मानसूनी सिस्टम फिर एक्टिव हुआ है। IMD (मौसम केंद्र) भोपाल के मुताबिक, शुक्रवार को प्रदेश के 12 जिले- सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, मैहर, शहडोल, डिंडौरी, अनूपपुर, मंडला, बालाघाट, सिवनी और छिंदवाड़ा में भारी बारिश का अ

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शुक्रवार को बाकी जिलों में कहीं धूप खिलेगी तो कहीं हल्की बारिश हो सकती है। इनमें भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, इंदौर, धार, आलीराजपुर, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, झाबुआ, उज्जैन, नीमच, आगर-मालवा, मंदसौर, शाजापुर, देवास, रतलाम, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, ग्वालियर, गुना, शिवपुरी, दतिया, अशोकनगर, मुरैना, भिंड, श्योपुर, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, सिंगरौली, उमरिया, सागर, पन्ना, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी शामिल हैं।

तीन दिन से बारिश नहीं, गर्मी-उमस बढ़ी प्रदेश में पिछले 3 दिन से भारी बारिश नहीं हुई है। इस वजह से गर्मी और उमस का असर बढ़ गया है। गुरुवार को भोपाल में तीखी धूप रही। इस वजह से लोग बचाव करते हुए नजर आए। इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर और जबलपुर में भी धूप खिली। मौसम विभाग के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में एक लो प्रेशर एरिया (निम्न दाब क्षेत्र), मानसून ट्रफ एक्टिव है। वहीं, पश्चिमी हिस्से में साइक्लोनिक सकुर्लेशन (चक्रवात) की सक्रियता भी है। इसके चलते बारिश का दौर चलेगा।

ब्रेक के बाद फिर एक्टिव हुआ मानसून, 12 जिले भीगेंगे:  MP के जबलपुर, रीवा-शहडोल संभाग में अलर्ट; कल से इंदौर संभाग में भी बारिश – Bhopal News

नर्मदापुरम में मंगलवार को तेज बारिश हुई थी।

एमपी में 8% बारिश कम, 32 जिले पीछे मौसम विभाग के अनुसार, अब तक हुई बारिश की बात करें तो इस सीजन 795.3 मिमी यानी, 31.3 इंच बारिश हो चुकी है। यह अब तक की सामान्य बारिश 33.9 इंच (862.5 मिमी) की तुलना में 2.6 इंच कम है। वहीं, ओवरऑल 8 प्रतिशत कम पानी गिरा है। पूर्वी हिस्से में 2 प्रतिशत और पश्चिमी हिस्से में औसत से 13% बारिश कम हुई है।

33 जिलों में 1% से 56% तक कम बारिश प्रदेश के पूर्वी हिस्से- जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में 1% तक कम बारिश हुई है। बालाघाट, छिंदवाड़ा, डिंडौरी, दमोह, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, मंडला, रीवा, सागर, सिवनी में 2% से 25% तक कम बारिश हुई है। पिछले एक सप्ताह में यह आंकड़ा काफी सुधरा है। बीते एक सप्ताह से यहां के कई जिलों में बाढ़ के हालात बने हुए हैं। इससे आंकड़े में सुधार आया और सीजन में पहली बार पूर्वी हिस्सा आंकड़ों में बेहतर रहा है, लेकिन बुधवार तक आंकड़ा एक प्रतिशत हो गया।

वहीं, पश्चिमी हिस्से के आगर-मालवा, आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, बड़वानी, खंडवा, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में औसत से 1% से 56% कम पानी गिरा है।

इन 22 जिलों में ज्यादा बारिश IMD की माने तो अनूपपुर, छतरपुर, मैहर, मऊगंज, निवाड़ी, पन्ना, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़, उमरिया, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, दतिया, गुना, ग्वालियर, खरगोन, राजगढ़्र, श्योपुर और शिवपुरी में ही औसत से ज्यादा बारिश दर्ज की गई।

मैप से समझें, 4 दिन ऐसा रहेगा मौसम

जून में सूखा, जुलाई-अगस्त में अच्छी बारिश मौसम विभाग के अनुसार, जून में 14% कम बारिश हुई थी। जुलाई के शुरुआती दिनों में तेज बारिश होने से यह अंतर कम हुआ। इसके बाद मानसून दो बार ब्रेक हुआ और कई दिनों तक बारिश नहीं हुई।

जुलाई के आखिरी सप्ताह में फिर से स्ट्रॉन्ग सिस्टम एक्टिव हुआ। इसके बावजूद जुलाई में 13% कम बारिश हुई। हालांकि, जुलाई और अगस्त का कोटा पूरा हो गया, लेकिन जून की कमी पूरी नहीं हो पाई। इसी वजह से अब तक प्रदेश में 8% कम बारिश दर्ज हुई है।

प्रदेश की सामान्य बारिश 37.3 इंच प्रदेश की सामान्य बारिश 37.3 इंच है। भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर जिले की सामान्य बारिश 38 से 39 इंच तक है।

अब जानिए, एमपी के 5 बड़े शहरों में बारिश का रिकॉर्ड…

भोपाल में 4 साल से कोटे से ज्यादा बारिश भोपाल में सितंबर महीने की औसत बारिश 7 इंच है, लेकिन पिछले 5 साल से कोटे से ज्यादा पानी बरस रहा है। ओवरऑल रिकॉर्ड की बात करें तो साल 1961 में पूरे सितंबर माह में 30 इंच से ज्यादा पानी गिरा था। वहीं, 24 घंटे में सर्वाधिक 9.2 इंच बारिश का रिकॉर्ड 2 सितंबर 1947 को बना था।

इस महीने औसत 8 से 10 दिन बारिश होती है। वहीं, दिन में तापमान 31.3 डिग्री और न्यूनतम तापमान 22.2 डिग्री सेल्सियस तक रहता है।

इंदौर में सितंबर में रिकॉर्ड 30 इंच बारिश इंदौर में सितंबर महीने में रिकॉर्ड 30 इंच बारिश हो चुकी है। यह ओवरऑल रिकॉर्ड साल 1954 में बना था। वहीं, 20 सितंबर 1987 को 24 घंटे में पौने 7 इंच पानी गिर चुका है।

इस महीने इंदौर में औसत 8 दिन बारिश होती है, लेकिन इस बार 15 या इससे अधिक दिन तक बारिश हो सकती है।

ग्वालियर में वर्ष 1990 में गिरा था 25 इंच पानी ग्वालियर में सितंबर 1990 में 647 मिमी यानी साढ़े 25 इंच बारिश हुई थी। यह सितंबर में मासिक बारिश का ओवरऑल रिकॉर्ड है। वहीं, 7 सितंबर 1988 को 24 घंटे में साढ़े 12 इंच बारिश हुई थी। सितंबर में ग्वालियर की औसत बारिश करीब 6 इंच है, लेकिन पिछले चार साल से इससे अधिक बारिश हो रही है।

ग्वालियर में इस बार अगस्त में ही बारिश का कोटा पूरा हो गया। ऐसे में सितंबर में जितनी भी बारिश होगी, वह बोनस की तरह ही रहेगी।

जबलपुर में 24 घंटे में साढ़े 8 इंच बारिश का रिकॉर्ड सितंबर महीने में जबलपुर में भी मानसून जमकर बरसता है। 20 सितंबर 1926 को जबलपुर में 24 घंटे के अंदर साढ़े 8 इंच बारिश का रिकॉर्ड है। वहीं, पूरे महीने में 32 इंच बारिश साल 1926 को हो चुकी है।

यहां महीने में औसत 10 दिन बारिश होती है। वहीं, सामान्य बारिश साढ़े 8 इंच है। पिछले 3 साल से सामान्य से ज्यादा पानी गिर रहा है।

उज्जैन में 1981 में पूरे मानसून का कोटा हो गया था फुल उज्जैन की सामान्य बारिश 34.81 इंच है, लेकिन वर्ष 1961 में सितंबर की बारिश ने ही पूरे सीजन की बारिश का कोटा फुल कर दिया था। इस महीने 1089 मिमी यानी करीब 43 इंच पानी गिरा था। वहीं, 24 घंटे में सर्वाधिक साढ़े 5 इंच बारिश का रिकॉर्ड 27 सितंबर 1961 को बना था।

सितंबर महीने में उज्जैन की सामान्य बारिश पौने 7 इंच है, लेकिन पिछले दो साल से 12 इंच से ज्यादा बारिश हो रही है। इस महीने औसत 7 दिन बारिश होती है।

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