इंदौर के भागीरथपुरा में दिसंबर-जनवरी में दूषित पानी पीने से 36 मौतों के मामले में आज मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ में सुनवाई हुई।

HighLights
- इस रिपोर्ट की प्रति वकीलों को भी नही मिलेगी
- जिनका वकालतनामा मामले में पेश है वो ही देख सकेंगे
- कोर्ट ने कहा- रिपोर्ट को लेकर मीडिया में चर्चा न करें
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। भागीरथपुरा में गत दिसंबर-जनवरी माह में दूषित पानी पीने से हुई 36 मौतों के मामले में मंगलवार को हाई कोर्ट में अहम सुनवाई हुई। हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने भागीरथपुरा दूषित पानी कांड की रिपोर्ट के सार्वजनिक करने पर रोक लगा दी है। इसकी प्रति वकीलों को भी नही मिलेगी। कोर्ट ने कहा सिर्फ वो ही वकील रिपोर्ट देख सकेंगे जिनका वकालतनामा मामले में पेश है। कोर्ट ने वकीलों को भी इस बात की हिदायत दी है कि रिपोर्ट को लेकर मीडिया में चर्चा न करें।
कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति सुशील कुमार गुप्ता की अध्यक्षता में एक सदस्यीय जांच आयोग गठित किया था। आयोग ने अपनी जांच पूरी कर हाल ही में 500 पेज से अधिक की रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में हाई कोर्ट में प्रस्तुत कर दी है।
जांच आयोग ने अपनी रिपोर्ट में भागीरथपुरा दूषित पानी कांड के हर पहलू की बारीकी से जांच की है। रिपोर्ट में तत्कालीन जिम्मेदार अधिकारियों के साथ ही स्थानीय पार्षद, जलकार्य समिति के प्रभारी और निगम के कर्मचारियों की भूमिका को भी खंगाला गया है।
आयोग ने अपनी रिपोर्ट में इन बिंदुओं पर विशेष फोकस किया है
इन बिंदुओं पर हुई जांच
- भागीरथपुरा क्षेत्र में वितरित किया गया जल दूषित था या नहीं।
- पानी के दूषित होने का क्या कारण था और इसका स्रोत क्या था।
- दूषित पानी सीवेज मिलने, औद्योगिक प्रदूषण या पाइपलाइन क्षति के कारण हुआ।
- दूषित पानी पीने से कौन-कौन सी बीमारियां हुईं।
- दूषित पानी के कारण हुई वास्तविक मृत्यु की संख्या।
- इस पूरे कांड के लिए प्रथमदृष्टया जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की पहचान।
- प्रभावित परिवारों को दी जाने वाली मुआवजा राशि का निर्धारण।
रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग
सुनवाई से एक दिन पहले सोमवार को याचिकाकर्ता प्रभात पांडेय ने वरिष्ठ अधिवक्ता अजय बागड़िया के माध्यम से हाई कोर्ट में एक अंतरिम आवेदन प्रस्तुत किया। आवेदन में याचिकाकर्ता ने मांग की है कि जांच आयोग की रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाए और उसकी प्रति सभी याचिकाकर्ताओं को उपलब्ध कराई जाए। इस पर हाईकोर्ट ने रिपोर्ट को सार्वजनिक करने से इनकार कर दिया।
अस्पतालों में भी मिला ई-कोलाई
आवेदन में याचिकाकर्ता ने गंभीर आरोप लगाए हैं। आवेदन के अनुसार भागीरथपुरा के नलकूपों में मानव और पशुओं के मल-मूत्र में पाए जाने वाले ई-कोलाई बैक्टीरिया की पुष्टि हुई थी। यही ई-कोलाई बैक्टीरिया कुछ शासकीय अस्पतालों के पानी में भी पाया गया है। याचिकाकर्ता का कहना है कि शासकीय अस्पतालों में रोजाना हजारों की संख्या में मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं।
ऐसे में अस्पतालों के पानी में ई-कोलाई बैक्टीरिया का पाया जाना यह दर्शाता है कि नागरिकों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने को लेकर प्रशासन अब भी गंभीर नहीं है। मजबूरी में मरीजों को पैक्ड पानी खरीदना पड़ रहा है।
आवेदन में यह भी आरोप लगाया गया है कि शासकीय अस्पतालों की छवि खराब करने, निजी अस्पतालों को लाभ पहुंचाने और पैक्ड पानी बनाने वाली कंपनियों को फायदा पहुंचाने के उद्देश्य से जानबूझकर इस तरह की लापरवाही की जा रही है।
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