Bhagirathpura Water Case: भागीरथपुरा दूषित पानी कांड की एक सदस्यीय जांच आयोग की रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं होगी, हाईकोर्ट युगलपीठ ने आदेश दिया, मंगलवार को…और पढ़ें

HighLights
- मामले में आधा दर्जन याचिकाओं पर हाई कोर्ट में हुई एक साथ सुनवाई
- याचिकाकर्ता के वकील ने कहा- रिपोर्ट सार्वजनिक हुई तो मीडिया ट्रायल शुरू हो जाएगा
- सुनवाई के दौरान कोर्ट ने मामले की जांच के लिए एक सदस्यीय जांच आयोग गठित किया था
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। भागीरथपुरा दूषित पानी कांड को लेकर एक सदस्यीय जांच आयोग की रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं होगी। हाई कोर्ट की युगलपीठ ने रिपोर्ट सार्वजनिक करने पर रोक लगा दी है। भागीरथपुरा मामले को लेकर हाई कोर्ट में चल रही आधा दर्जन जनहित याचिकाओं में मंगलवार को एक साथ सुनवाई हुई।
इस दौरान एक याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अजय बागडिया ने रिपोर्ट सार्वजनिक किए जाने पर आपत्ति लेते हुए कहा कि जांच रिपोर्ट सार्वजनिक हुई तो याचिका का मूल उद्देश्य ही समाप्त हो जाएगा और रिपोर्ट का मीडिया ट्रायल शुरू हो जाएगा। मामले की सुनवाई का सोशल मीडिया पर किया जा रहा सीधा प्रसारण भी रोका जाना चाहिए।
अन्य याचिकाकर्ताओं की ओर से एडवोकेट मनीष यादव, रितेश इनाणी और अन्य ने इस पर आपत्ति ली और तर्क रखा कि यह जनहित का मामला है। जांच रिपोर्ट सार्वजनिक किए जाने में किसी को क्या आपत्ति हो सकती है। कोर्ट ने पक्षकारों को सुनने के बाद आदेश दिया कि रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की जाए।
देर रात तक यह आदेश हाई कोर्ट की साइट पर अपडेट हो गया। कोर्ट ने दो पेज के आदेश में कहा कि याचिकाओं में जिन वकीलों के वकालतनामा पेश हैं, वे प्रिंसिपल रजिस्ट्रार के यहां इस रिपोर्ट का अवलोकन कर नोट बना सकते हैं। मामले में अगली सुनवाई आठ सितंबर को होगी।
दिसंबर-जनवरी में भागीरथपुरा में दूषित पानी की वजह से 36 मौतें हुई थी। इस मामले को लेकर हाई कोर्ट में जनहित याचिकाएं चल रही हैं। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने मामले की जांच के लिए एक सदस्यीय जांच आयोग गठित किया था। आयोग की सील बंद रिपोर्ट मंगलवार को कोर्ट पटल पर आ गई। याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने रिपोर्ट सार्वजनिक किए जाने पर रोक का विरोध किया है।
उनका कहना है कि वे इस संबंध में कोर्ट में आवेदन देंगे। कोर्ट ने जांच आयोग को भागीरथपुरा दूषित पानी कांड के लिए प्रथमदृष्टया जिम्मेदार पाए जाने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों की पहचान करने और उनकी जिम्मेदारी तय करने के लिए कहा था। रिपोर्ट सार्वजनिक होगी तो दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों के नाम सामने आ सकेंगे।
इन बिंदुओं पर की आयोग ने जांच
- जल दूषित होने का क्या कारण था, क्या भागीरथपुरा में वितरित जल दूषित था।
- दूषित होने का स्रोत और प्रकृति (सीवेज मिलने, औद्योगिक कारण, पाइप लाइन क्षति या कोई और कारण)
- दूषित पानी के कारण वास्तविक मृत्यु की संख्या।
- दूषित पानी से क्या बीमारी हुई।
- भागीरथपुरा दूषित पानी कांड के लिए प्रथमदृष्टया जिम्मेदार पाए गए अधिकारियों और कर्मचारियों की पहचान करना और उन पर जिम्मेदारी तय करना।
- प्रभावितों के मुआवजा राशि।
दोनों पक्षों के अपने-अपने तर्क
जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जानी चाहिए या नहीं, इसे लेकर याचिकाकर्ताओं के वकीलों के अलग-अलग तर्क हैं। रिपोर्ट सार्वजनिक किए जाने की मांग कर रहे एडवोकेट मनीष यादव, रितेश इनाणी का कहना है कि भागीरथपुरा कांड की वजह से पूरे देश में इंदौर की छवि धूमिल हुई। इसलिए यह पता लगाना जरूरी है कि आखिर यह कांड किसकी लापरवाही की वजह से हुआ था।
शहर की छवि धूमिल करने का जिम्मेदार कौन है। हादसे में 36 परिवारों ने अपनों को खोया था। संवेदनशील बताकर इन परिवारों को जानकारी से अनभिज्ञ नहीं रखा जा सकता। इधर बागडिया का कहना है कि वे सिर्फ यह चाहते हैं कि मामला मूल उद्देश्य से भटके नहीं।
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