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मऊगंज में राष्ट्रीय दलित आदिवासी महासभा ने मंगलवार शाम कलेक्टर कार्यालय का घेराव किया। इस प्रदर्शन के कारण करीब एक घंटे तक कार्यालय का सामान्य कामकाज और आवागमन पूरी तरह प्रभावित रहा। बाद में प्रशासनिक अधिकारियों के आश्वासन पर घेराव समाप्त हुआ। मुख्य गेट पर धरने से अंदर ही फंसे रहे कर्मचारी संगठन के आह्वान पर बड़ी संख्या में कार्यकर्ता नारेबाजी करते हुए कलेक्टर कार्यालय के मुख्य गेट तक पहुंचे और वहीं धरने पर बैठ गए। इस वजह से दफ्तर के कर्मचारी अंदर ही फंसे रहे और आम जनता को भी आने-जाने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। प्रदर्शन का नेतृत्व राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय भारती, प्रदेश अध्यक्ष सियाशरण सोधिया और जिला अध्यक्ष बुद्धसेन साकेत ने किया। प्रतिबंध के बावजूद हुआ लाउडस्पीकर का इस्तेमाल प्रदर्शन के दौरान संगठन के पदाधिकारियों ने लाउडस्पीकर से सभा को संबोधित किया। गौरतलब है कि कुछ महीने पहले ही कलेक्टर ने कार्यालय परिसर में बिना अनुमति लाउडस्पीकर के उपयोग पर प्रतिबंध लगाया था, जो आदेश अभी भी प्रभावी है। हालांकि, प्रशासन ने स्थिति को शांतिपूर्वक संभालते हुए टकराव टाल दिया। आदिवासियों के मकान गिराने और अत्याचार का आरोप महासभा ने मुख्यमंत्री के नाम सौंपे ज्ञापन में आरोप लगाया कि जिले में दलित और आदिवासी समुदाय पर अत्याचार हो रहे हैं और गरीबों के मकान गिराकर उन्हें बेघर किया जा रहा है। संगठन ने ग्राम झौरा में गिराए गए मकानों के पुनर्निर्माण, हटवा और बेलौही के प्रभावितों को मुआवजा देने के साथ ही फूल बजरंग सिंह, काली पोखरी, पोखरी टोला और घोघरी में सड़क व पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाएं देने की मांग की। पट्टा देने और बेदखली पर रोक लगाने की मांग एसडीएम रश्मि चतुर्वेदी और एसडीएम एपी द्विवेदी को सौंपे गए ज्ञापन में भूमिहीन परिवारों को खेती योग्य जमीन, कब्जाधारियों को पट्टा, बेरोजगार युवाओं को भत्ता और विकास परियोजनाओं के नाम पर बेदखली रोकने की मांग शामिल है। महासभा ने चेतावनी दी है कि यदि 15 दिनों के भीतर मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो मऊगंज कलेक्टर कार्यालय के बाहर अनिश्चितकालीन महाधरना शुरू किया जाएगा।
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