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जैन साधु मुनिराज निपुणरत्नविजयजी महाराज साहब का चातुर्मास प्रवेश रविवार को महाराष्ट्र के भायंदर में हुआ। इस मौके पर जापान से 81 श्रद्धालु भी पहुंचे। श्री थराद त्रिस्तुतिक जैन संघ, मुंबई ने ‘मग्गदयाणं’ नाम से कार्यक्रम का आयोजन किया। देखिए 5 तस्वीरें… जापान से आए श्रद्धालु डॉ. प्रदीप संघवी ने बताया कि जापान से आए सभी श्रद्धालु गुरुदेव पुण्य सम्राट श्रीमद् जयंतसेन सूरीश्वरजी से प्रभावित हैं। वे उनके शिष्य मुनिराज निपुणरत्नविजयजी महाराज से जुड़े हुए हैं। किसी जैन मुनि के चातुर्मास प्रवेश में विदेश से इतनी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं का आना खास माना जा रहा है। शोभायात्रा के साथ हुआ प्रवेश चातुर्मास प्रवेश से पहले शोभायात्रा निकाली गई। यह नवकार पार्श्वनाथ जिनालय और गुरुमंदिर से होकर नूतन थराद भवन, जयंतगिरि स्थित चातुर्मास स्थल पहुंची। रास्ते में श्रद्धालुओं ने नवकार मंत्र, गुरु वंदना, भजन और जयघोष के साथ मुनिश्री का स्वागत किया। झाबुआ जिले से भी 100 से ज्यादा श्रद्धालु कार्यक्रम में शामिल हुए। मंगल प्रवेश के बाद अग्रवाल ग्राउंड में धर्मसभा हुई। इसमें मुनिश्री ने धर्म, संयम, अहिंसा, सदाचार और आत्मकल्याण का संदेश दिया। साथ ही चातुर्मास के दौरान होने वाले स्वाध्याय, तप, पूजा-अनुष्ठान और धार्मिक शिविरों की जानकारी भी दी। भायंदर में पहला चातुर्मास भायंदर में मुनिश्री का यह पहला चातुर्मास है। इसे लेकर स्थानीय जैन समाज में खास उत्साह रहा। कार्यक्रम के लिए स्वागत द्वार, सजावट, स्वयंसेवक, पार्किंग, चिकित्सा और पेयजल सहित सभी जरूरी व्यवस्थाएं की गई थीं। मुनिराज निपुणरत्नविजयजी पिछले करीब 25 सालों से संयम जीवन का पालन कर रहे हैं। उन्होंने धर्म प्रचार, स्वाध्याय, तप और नैतिक मूल्यों के प्रसार में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। यह उनका दूसरा स्वतंत्र चातुर्मास है। इससे पहले वर्ष 2022 में उन्होंने झाबुआ में चातुर्मास किया था। उनका सांसारिक परिवार मूल रूप से झाबुआ जिले के कुंदनपुर का है, जो वर्तमान में दाहोद में रहता है।
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