महिला शक्ति का प्रतीक ‘पास्तल दे टेंटूगल’:पुर्तगाल में सदियों पुरानी पेस्ट्री कला को बढ़ा रहीं महिलाएं; कॉन्वेंट ननों ने की थी शुरुआत

महिला शक्ति का प्रतीक ‘पास्तल दे टेंटूगल’:पुर्तगाल में सदियों पुरानी पेस्ट्री कला को बढ़ा रहीं महिलाएं; कॉन्वेंट ननों ने की थी शुरुआत



महिला शक्ति का प्रतीक ‘पास्तल दे टेंटूगल’:पुर्तगाल में सदियों पुरानी पेस्ट्री कला को बढ़ा रहीं महिलाएं; कॉन्वेंट ननों ने की थी शुरुआत


पुर्तगाल के छोटे से गांव ‘टेंटूगल’ की पहचान यहां की हवा में घुली मैदे और मिठास की खुशबू है। सैकड़ों वर्षों से इस गांव में बसी ये खुशबू यहां बनने वाली बेहद नाजुक और मशहूर पेस्ट्री, ‘पास्तल दे टेंटूगल’ की वजह से है। पास्तल दे टेंटूगल’ केवल एक डिश नहीं बल्कि महिलाओं की ताकत, आत्मनिर्भरता और एक सदियों पुरानी अनूठी परंपरा का प्रतीक है। 2,000 की आबादी वाले गांव में नौ बेकरी हैं, जिन्हें महिलाएं ही चलाती हैं। यह हुनर न केवल एक 500 साल पुरानी विरासत को जीवित रखे हुए है, बल्कि गांव की महिलाओं को आर्थिक आजादी, पहचान और मजबूत मुकाम भी दे रहा है। 16वीं सदी में हुई शुरुआत पेस्ट्री बनाने की तब चीनी साफ करने में अंडों की सफेदी यूज होती थी। इससे भारी मात्रा में जर्दी बच जाती थी। ननों ने इस जर्दी में शक्कर मिलाकर और उसे बेहद पतले आटे की परत में लपेटकर पेस्ट्री ईजाद की। आटे को बहुत ही पतला बनाया जाता था। नन मानती थीं-‘जब इसके पार बाइबल पढ़ी जा सके, तब यह तैयार है!’



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