मीराबाई चानू की कहानी:बनना चाहती थीं तीरंदाज, कैसे एक किताब से बदली जिंदगी? एशियाड में पदक का सूखा किया खत्म – Asian Games 2026: Who Is Mirabai Chanu? Know Indian Weightlifting Star Profile And Story Recognition

मीराबाई चानू की कहानी:बनना चाहती थीं तीरंदाज, कैसे एक किताब से बदली जिंदगी? एशियाड में पदक का सूखा किया खत्म – Asian Games 2026: Who Is Mirabai Chanu? Know Indian Weightlifting Star Profile And Story Recognition

भारत की दिग्गज भारोत्तोलक मीराबाई चानू ने एक बार फिर देश का नाम रोशन किया है। चानू ने आइची-नागोया में खेले जा रहे एशियन गेम्स में रजत पदक अपने नाम किया। यह मीराबाई का एशियाड में पहला पदक है। चानू स्वर्ण पदक की दावेदार मानी जा रही थीं, लेकिन कुल 198 किलो वजन उठाकर महिला 49 किग्रा भार वर्ग में दूसरे स्थान पर रहीं। मणिपुर में पैदा हुईं मीराबाई बचपन में तीरंदाज बनना चाहती थीं, लेकिन भारोत्तोलन में आ गईं। इसके पीछे की कहानी काफी रोचक है।




Asian Games 2026: Who is Mirabai Chanu? Know Indian weightlifting star profile and story recognition

मीराबाई चानू
– फोटो : PTI


एशियाड में चानू का पहला पदक

भारत की स्टार भारोत्तोलक मीराबाई चानू ने एशियन गेम्स में इतिहास रच दिया है। उन्होंने महिलाओं की 49 किग्रा स्पर्धा में कुल 198 किग्रा वजन उठाकर रजत पदक अपने नाम किया। यह एशियन गेम्स में मीराबाई का पहला पदक है। इसके साथ ही भारत को भारोत्तोलन में 28 साल बाद एशियन गेम्स का पदक मिला है। मीराबाई ने स्नैच में 83 किग्रा से शुरुआत की और अपने दूसरे प्रयास में 85 किग्रा वजन उठाया। इसके बाद उन्होंने तीसरे प्रयास में 87 किग्रा का सफल लिफ्ट किया। स्नैच के बाद वह पदक की दौड़ में मजबूती से बनी हुई थीं। क्लीन एंड जर्क में मीराबाई ने 107 किग्रा के सफल प्रयास के साथ शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने दूसरे प्रयास में 111 किग्रा वजन उठाया। तीसरे प्रयास की जरूरत नहीं पड़ी और उनका कुल स्कोर 198 किग्रा रहा। मीराबाई ने 87 किग्रा स्नैच और 111 किग्रा क्लीन एंड जर्क के साथ कुल 198 किग्रा वजन उठाकर रजत पदक हासिल किया।


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मीराबाई चानू
– फोटो : PTI


पहाड़ से लकड़ियां चुनकर लाती थीं मीराबाई चानू

8 अगस्त 1994 को मणिपुर के नोंगपेक काकचिंग गांव में मीराबाई का जन्म हुआ था। उनका बचपन संघर्षों में बीता। वह पहाड़ से जलावन के लिए लकड़ियां चुनकर लाती थीं। बचपन से भारी सामान उठाने वाली मीराबाई को शायद यह नहीं पता था कि वह आगे चलकर भारी सामान उठाकर ही देश को पदक दिलाएंगी। बचपन में मीराबाई तीरंदाज बनने के सपने देखती थीं। सातवीं कक्षा तक वह इसी में अपना करियर बनाना चाहती थीं, लेकिन आठवीं में सबकुछ बदल गया। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, आठवीं की किताब में उन्हें भारत की मशहूर भारोत्तोलक कुंजरानी देवी के बारे में पढ़ने का मौका मिला। कुंजरानी विश्व चैंपियनशिप में सात रजत और एशियाई खेलों में दो कांस्य पदक जीती थीं। शुरू में मीराबाई को लगा कि वजन ही तो उठाना है, लेकिन बाद में उन्हें यह अहसास हुआ कि भारोत्तोलन काफी मुश्किल खेल है।


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मीराबाई चानू
– फोटो : PTI


देश से बाहर भी गांव का चावल खाती हैं चानू

चानू ने इसमें देश को पदक दिलाने के लिए कड़ी मेहनत की। इसके लिए उन्हें कई जगह परेशानियों का भी सामना करना पड़ा। मीराबाई को अपने देश की मिट्टी और चावल से काफी लगाव है। वह जब भी विदेशी दौरे पर जाती हैं तो मिट्टी और चावल अपने साथ लेकर जाती हैं। वह देश से बाहर भी गांव का ही चावल खाती हैं। उनकी एक और रोचक कहानी यह है कि मीराबाई को भारोत्तोलन बनाने में ट्रक डाइवर्स का काफी योगदान है। उनके पास अपने गांव से 25 किमी दूर इंफाल में स्थित खेल अकादमी तक जाने के पैसे नहीं थे। रोजाना उनके लिए अभ्यास कठिन था। वह प्रतिदिन नदी की रेत को इंफाल तक ले जाने वाले ट्रक डाइवर्स से मदद मांगती थीं।


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