
दुकानदारों का कहना है कि इतना भारी भरकम बिजली का बिल बनाया जाएगा तो हम यहां कमाने की बजाय अपनी जेब से भरकर जाएंगे। दुकानदारों के अनुसार प्लाट के अलग, बिजली के अलग, परिवार के साथ इतने दिनों तक यहां रहना सब खर्चे होते हैं। इतना क्या कमा लेंगे कि सभी राशि भरने के बाद कुछ बच पाएगा। ऐसे तो यह मेला करना ही बेकार हो जाएगा। जैस-तैसे मेला करके परिवार चला रहे हैं।
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