
हाई कोर्ट में डॉ. श्रद्धा पवार ने याचिका दायर की थी। उन्होंने इस याचिका में डीसीआइ के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उनको पढ़ाई दोबारा शुरू करने से रोका गया था। दरअसल, डॉ. पवार ने 2018-19 में एमडीएस कोर्स में प्रवेश लिया था। डीसीआइ के एमडीएस कोर्स के नियम के हिसाब से उन्हें तीन से छह साल के अंदर ये कोर्स पूरा करना था लेकिन उन्होंने इस समयावधि में ये कोर्स पूरा नहीं किया। इसलिए उन्हें अनुमति नहीं दी गई।
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