राजगढ़ में पांच साल बाद दादाजी से मिला बिछड़ा बच्चा:  पश्चिम बंगाल के बाल गृह में रह रहा था, पहचान होते ही भावुक हुआ पूरा परिवार – rajgarh (MP) News

राजगढ़ में पांच साल बाद दादाजी से मिला बिछड़ा बच्चा: पश्चिम बंगाल के बाल गृह में रह रहा था, पहचान होते ही भावुक हुआ पूरा परिवार – rajgarh (MP) News

राजगढ़ में पांच साल बाद दादाजी से मिला बिछड़ा बच्चा:  पश्चिम बंगाल के बाल गृह में रह रहा था, पहचान होते ही भावुक हुआ पूरा परिवार – rajgarh (MP) News


राजगढ़ जिले में बाल कल्याण समिति (CWC) के प्रयासों से पांच साल पहले बिछड़ा एक बच्चा रविवार को आखिरकार अपने परिवार से मिल गया। राजगढ़ पहुंचने पर बच्चे ने अपने दादाजी को देखते ही उन्हें गले लगा लिया, जिससे दोनों भावुक हो उठे। इस दौरान वहां मौजूद लोगों की आंखें भी नम हो गईं। यह बच्चा राजगढ़ जिले के एक गांव का निवासी है। वर्ष 2021 में, जब वह लगभग 10 साल का था, अपने माता-पिता के साथ मजदूरी के लिए बाहर गया था। ट्रेन यात्रा के दौरान वह गलती से पश्चिम बंगाल के मालदा रेलवे स्टेशन पहुंच गया। मालदा रेलवे पुलिस और चाइल्ड लाइन टीम ने बच्चे को अपनी सुरक्षा में लिया। मेडिकल जांच और काउंसलिंग के बाद उसे मुर्शिदाबाद जिले की बाल कल्याण समिति को सौंप दिया गया। पिछले पांच सालों से बच्चा काजी नजरुल इस्लाम चिल्ड्रन होम में रह रहा था और उसने वहीं आठवीं कक्षा तक पढ़ाई की। गांव में पूछताछ के बाद सुराग मिला
बच्चे के आधार कार्ड में राजगढ़ जिले के गांव का पता दर्ज था। इसके बावजूद, प्रारंभिक जांच में यह रिपोर्ट दी गई कि उस पते पर कोई परिवार नहीं रहता। कई विभागों के बीच लगातार पत्राचार के बावजूद, बच्चे के परिवार का पता नहीं चल पाया। सितंबर 2025 में यह मामला राजगढ़ बाल कल्याण समिति के पास पहुंचा। समिति अध्यक्ष साकेत शर्मा ने इस मामले को गंभीरता से लिया। उन्होंने स्वयं गांव जाकर लोगों से जानकारी जुटानी शुरू की। गांव में गहन पूछताछ के बाद आखिरकार बच्चे के परिवार का सुराग मिल सका, जिसके परिणामस्वरूप यह भावुक पुनर्मिलन संभव हो पाया। साकेत शर्मा ने गांव के सरपंच, सचिव, दुकानदार और ग्रामीणों से बातचीत की। इसी दौरान पता चला कि इसी नाम का एक परिवार कई साल पहले मजदूरी के लिए गांव छोड़कर चला गया था।
इसके बाद परिवार के रिश्तेदारों से संपर्क किया गया। दादाजी, ताऊजी और अन्य परिजनों ने बच्चे से जुड़ी सभी जानकारी सही बताई। तब पुष्टि हुई कि बच्चा उसी परिवार का है। परिवार ने बताया कि बच्चे के माता-पिता करीब 12 साल पहले मजदूरी के लिए बाहर चले गए थे। अब तक उनका सही पता नहीं चल पाया है। कभी-कभी मोबाइल पर बात जरूर होती थी। अब बंगाली ज्यादा बोलता है बच्चा
5 साल पश्चिम बंगाल में रहने की वजह से बच्चा अब बंगाली भाषा अच्छे से बोलता है। वह हिंदी भी समझता है, लेकिन टूटी-फूटी बोल पाता है। राजगढ़ बाल कल्याण समिति ने बच्चे की सामाजिक जांच रिपोर्ट तैयार कर उसे वापस लाने की प्रक्रिया शुरू की। हालांकि पश्चिम बंगाल में चुनाव के कारण एस्कॉर्ट पुलिस गार्ड नहीं मिलने से बच्चे को लाने में देरी हुई। 3 मई को राजगढ़ पहुंचा बच्चा, परिवार भी भावुक हो गया
आखिरकार 3 मई 2026 को बच्चा राजगढ़ पहुंचा। परिवारजनों को बुलाया गया। जैसे ही बच्चे ने अपने दादाजी को देखा, वह दौड़कर उनके गले लग गया और रोने लगा। वहां मौजूद सभी लोग इस पल को देखकर भावुक हो गए। जरूरी कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद बच्चे को परिवार को सौंप दिया गया। CWC अध्यक्ष बोले- थोड़ा प्रयास करें तो कई बच्चों को परिवार मिल सकता है
बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष साकेत शर्मा ने कहा कि यह उनके जीवन के सबसे भावुक पलों में से एक था। उन्होंने कहा कि कई बार छोटी लापरवाही की वजह से बच्चे सालों तक परिवार से दूर हो जाते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अगर बच्चे को थोड़ा पहले लाया जा सकता तो उसकी दादी भी उसे देख पातीं, लेकिन कुछ दिन पहले ही उनका निधन हो गया।
साकेत शर्मा ने कहा कि मजदूरी के लिए पलायन, गरीबी और परिवारों का बिखरना आज भी बच्चों के लिए बड़ी समस्या है। ऐसे मामलों में सिर्फ कागजी कार्रवाई नहीं, बल्कि संवेदनशीलता के साथ काम करने की जरूरत है। राजगढ़ बाल कल्याण समिति में अध्यक्ष साकेत शर्मा के साथ सदस्य सुरेश चंद्रवंशी, निलेश मालवीय, रिंकी सुनेरी और सलमा अंसारी काम कर रहे हैं। समिति का ध्येय वाक्य है- “जिसका कोई नहीं, उसकी बाल कल्याण समिति।”
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