राहुल गांधी पर बरसे प्रधान:’सिस्टम बनाम छात्र’ को सियासी नैरेटिव बताया, योजनाओं-आंकड़ों के सहारे कितने दावे? – Dharmendra Pradhan Rahul Gandhi System Vs Students Indore

राहुल गांधी पर बरसे प्रधान:’सिस्टम बनाम छात्र’ को सियासी नैरेटिव बताया, योजनाओं-आंकड़ों के सहारे कितने दावे? – Dharmendra Pradhan Rahul Gandhi System Vs Students Indore

पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा सांसद धर्मेंद्र प्रधान ने राहुल गांधी के इंदौर दौरे और ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम को लेकर निशाना साधा है। प्रधान ने कहा कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी इंदौर आए और अपने साथ एक माइक और ‘सिस्टम बनाम छात्र’ का बना-बनाया नैरेटिव लेकर आए। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल ने कार्यक्रम में छात्रों के सामने आने वाली हर चुनौती को ‘कब्जे वाले सिस्टम’ का सबूत बताने की कोशिश की और शिक्षा के जटिल इकोसिस्टम को राजनीतिक नारों तक सीमित कर दिया।

उच्च शिक्षा तक पहुंच बढ़ी, जीईआर 30 फीसदी हुआ: प्रधान

धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि जब नेता प्रतिपक्ष अपना एजेंडा फैलाने में व्यस्त हैं, तब भारत में उच्च शिक्षा तक पहुंच बढ़ी है। उन्होंने कहा कि देश में उच्च शिक्षा का सकल नामांकन अनुपात यानी जीईआर 2014-15 में 23.7 फीसदी था, जो 2023-24 में बढ़कर 30 फीसदी हो गया। प्रधान ने इस आंकड़े को उच्च शिक्षा तक पहुंच में हुई बढ़ोतरी के तौर पर सामने रखा।

पीएम-विद्यालक्ष्मी से शिक्षा ऋण, पीएम-उषा से संस्थानों पर जोर

प्रधान ने केंद्र की योजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि पीएम-विद्यालक्ष्मी योग्य छात्रों को बिना गारंटी वाले शिक्षा ऋण और ब्याज पर मदद देती है। वहीं पीएम-उषा के जरिए राज्य के संस्थानों में बुनियादी ढांचे और गुणवत्ता को बेहतर बनाने पर काम किया जा रहा है। यानी प्रधान ने राहुल गांधी के शिक्षा व्यवस्था पर सवालों के जवाब में छात्रों के लिए चल रही योजनाओं और उच्च शिक्षा के विस्तार को सामने रखा।

धर्मेंद्र प्रधान ने अपने बयान में भारत की अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय रैंकिंग का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पिछले दशक में भारत की क्यूएस वर्ल्ड रैंकिंग में काफी सुधार हुआ है और देश की संस्थागत क्षमता भी बढ़ी है। प्रधान ने इन उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि शिक्षा व्यवस्था को केवल चुनौतियों और शिकायतों के नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए।

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‘समाधान बताएंगे या चिंता को राजनीतिक हथियार बनाएंगे’

धर्मेंद्र प्रधान ने अपने बयान के अंत में राहुल गांधी से सीधा सवाल किया कि क्या वह छात्रों की समस्याओं के समाधान के बारे में बात करेंगे या हर छात्र की चिंता को राजनीतिक हथियार बनाते रहेंगे। उन्होंने कहा कि भारत के छात्रों को यह बताने के लिए किसी राजनेता की जरूरत नहीं है कि उन्हें गुस्सा होना चाहिए। उनके मुताबिक छात्रों को ऐसे संस्थानों की जरूरत है जो काम करें, ऐसे मौकों की जरूरत है जो बढ़ें और ऐसी सरकार की जरूरत है जो उनके साथ खड़ी हो। प्रधान ने कहा, ‘यही छात्रों पर राजनीति करने और छात्रों के लिए राजनीति करने के बीच का अंतर है।’

राहुल गांधी का इंदौर कार्यक्रम क्या था?

धर्मेंद्र प्रधान का यह बयान 19 सितंबर को इंदौर में राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के बाद आया। कार्यक्रम में राहुल गांधी ने छात्रों से संवाद किया और शिक्षा, सरकारी भर्ती, परीक्षाओं तथा संस्थानों से जुड़ी समस्याओं को उठाया। कार्यक्रम की मुख्य थीम ‘सिस्टम बनाम छात्र’ थी। राहुल ने छात्रों की समस्याओं को व्यापक शिक्षा व्यवस्था और सरकारी तंत्र से जोड़ते हुए सवाल उठाए।

छात्रों ने राहुल के सामने कौन से मुद्दे रखे?

कार्यक्रम में छात्रों ने भी अपनी समस्याएं साझा कीं। मध्य प्रदेश में सरकारी भर्तियों में 13 फीसदी नियुक्तियां लंबित होने और मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग से जुड़ी कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाया गया। राहुल गांधी ने अपने संबोधन में देश में 10 लाख शिक्षक पद खाली होने और एक लाख स्कूल बंद होने का दावा भी किया। ये आंकड़े राहुल गांधी के कार्यक्रम में किए गए दावे हैं।

इन आंकड़ों के पीछे क्या है?

शिक्षा मंत्रालय के उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक उच्च शिक्षा का जीईआर 2014-15 के 23.7 से बढ़कर 2023-24 में 30 हुआ है। पीएम-विद्यालक्ष्मी के तहत पात्र छात्रों को बिना जमानत और बिना गारंटर शिक्षा ऋण देने का प्रावधान है। पीएम-उषा का उद्देश्य राज्य के उच्च शिक्षा संस्थानों में पहुंच, समानता और गुणवत्ता को मजबूत करना है। प्रधान ने इन्हीं प्रावधानों और आंकड़ों को राहुल गांधी के बयान के जवाब में सामने रखा।

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