
अब तक कई मामलों में टिकट पर सिर्फ ‘एम’ या ‘आर’ जैसे शुरुआती अक्षर दर्ज कर दिए जाते थे। रिजर्वेशन चार्ट में भी केवल यही अक्षर दिखाई देता था। इसका फायदा उठाकर दलाल एक ही टिकट पर अलग-अलग नाम के यात्रियों को भेज देते थे। उदाहरण के लिए टिकट पर ‘एम’ लिखा हो तो मदन, मोहन या मुकेश, कोई भी यात्री उस टिकट पर दावा कर देता था। लंबे समय से इस तरह की शिकायतें रेलवे तक पहुंच रही थीं। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि दलाल इसी तकनीकी खामी का फायदा उठाकर फर्जी रिजर्वेशन और टिकटों की खरीद-फरोख्त कर रहे थे। खासकर तत्काल टिकटों में यह खेल ज्यादा चलता था। कई बार असली यात्री की पहचान करना भी मुश्किल हो जाता था।
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