वाग्देवी या अंबिका देवी? भोजशाला की प्रतिमाओं पर छिड़े विवाद को हाई कोर्ट ने ऋग्वेद और साझा प्रतीकों के जरिए सुलझाया

वाग्देवी या अंबिका देवी? भोजशाला की प्रतिमाओं पर छिड़े विवाद को हाई कोर्ट ने ऋग्वेद और साझा प्रतीकों के जरिए सुलझाया

धार भोजशाला मामले में हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ के निर्णय में केवल पूजा अधिकार और ऐतिहासिक दावों पर ही चर्चा नहीं हुई, बल्कि हिंदू और जैन परंपराओं के …और पढ़ें

Publish Date: Sat, 16 May 2026 06:28:50 PM (IST)Updated Date: Sat, 16 May 2026 06:28:50 PM (IST)

वाग्देवी या अंबिका देवी? भोजशाला की प्रतिमाओं पर छिड़े विवाद को हाई कोर्ट ने ऋग्वेद और साझा प्रतीकों के जरिए सुलझाया
भोजशाला को जैन गुरुकुल घोषित करने की मांग थमी।

HighLights

  1. भोजशाला को जैन गुरुकुल घोषित करने की मांग थमी
  2. हाई कोर्ट ने हिंदू विवाह अधिनियम का दिया हवाला
  3. फैसले में हिंदू विवाह अधिनियम का भी किया उल्लेख

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। धार भोजशाला मामले में शुक्रवार को आए मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ के निर्णय में केवल पूजा अधिकार और ऐतिहासिक दावों पर ही चर्चा नहीं हुई, बल्कि हिंदू और जैन परंपराओं के संबंधों पर भी विस्तार से टिप्पणियां की गईं। कोर्ट ने कहा कि भारतीय परंपराओं में हिंदू और जैन आस्थाओं के बीच कई सांस्कृतिक व धार्मिक समानताएं दिखाई देती हैं। इसी कारण दोनों परंपराओं के मंदिरों में एक-दूसरे की प्रतिमाएं मिलना असामान्य नहीं माना जा सकता।

साझा प्रतीकों का इतिहास और दावों का विश्लेषण

ज्ञान की देवी सरस्वती की पूजा हिंदू और जैन दोनों परंपराओं में होती है। किसी हिंदू देवी प्रतिमा के साथ जैन तीर्थंकर या साधक की आकृति का मिलना स्वाभाविक माना जा सकता है। भारतीय धार्मिक परंपराओं में साझा प्रतीकों और सांस्कृतिक प्रभावों का इतिहास पुराना रहा है। निर्णय में यह बात उस संदर्भ में लिखी गई है जब भोजशाला परिसर से जुड़ी प्रतिमाओं को लेकर हिंदू और जैन पक्ष अलग-अलग दावे कर रहे थे।

जैन पक्ष की ओर से कुछ प्रतिमाओं को अंबिका और जैन विद्या देवी स्वरूप बताया गया, जबकि हिंदू पक्ष ने उन्हें वाग्देवी (सरस्वती) का स्वरूप बताया। कोर्ट ने इस संदर्भ में ऋग्वेद में वर्णित मां सरस्वती के उल्लेख और प्रतिमा से जुड़े ऐतिहासिक अध्ययनों का भी हवाला दिया। बता दें, इस मामले में एक याचिकाकर्ता सलेकचंद जैन ने भोजशाला को जैन गुरुकुल घोषित करने की मांग करते हुए पूजा की अनुमति मांगी थी। यह याचिका उक्त टिप्पणियों के साथ निरस्त कर दी गई।

रतलाम के जैन मंदिर का उदाहरण और कानूनी संदर्भ

हाई कोर्ट ने मध्य प्रदेश के रतलाम के एक जैन मंदिर का उदाहरण भी दिया। वहां शिवलिंग और गणेश प्रतिमा भी स्थापित हैं। कोर्ट ने इसे साझा धार्मिक परंपराओं का उदाहरण बताया और कहा कि दोनों परंपराएं एक ही सर्वोच्च सत्ता की उपासना के भाव से जुड़ी हुई दिखाई देती हैं। कोर्ट ने हिंदू विवाह अधिनियम-1955 और हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम-1956 का भी उल्लेख किया, जिनमें जैन और बौद्ध समुदायों को हिंदू विधि के दायरे में माना गया है।

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प्राण प्रतिष्ठा पर फैसले में क्वांटम साइंस का जिक्र

कोर्ट ने मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा की धार्मिक अवधारणा समझाने के दौरान कहा कि कुछ विद्वान प्राण प्रतिष्ठा की प्रक्रिया को आधुनिक क्वांटम थ्योरी के एंटैंगलमेंट सिद्धांत से जोड़कर समझाते हैं। ‘क्वांटम एंटैंगलमेंट’ वह स्थिति है, जिसमें ऊर्जा या पदार्थ के कण दूरी के बावजूद एक-दूसरे को प्रभावित कर सकते हैं। इसी उदाहरण के जरिये यह समझाने का प्रयास किया गया कि प्राण प्रतिष्ठा के बाद प्रतिमा दिव्य ऊर्जा से जुड़ जाती है। यानी मंदिर हमेशा मंदिर रहता है।

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