वादों से आगे डिलीवरी की बारी: ब्रिक्स बना विकसित भारत 2047 की कूटनीतिक शुरुआत… सहमतियां जमीन पर उतारना जरूरी – Brics 2026 Promises Time Of Delivery Viksit Bharat 2047 Diplomatic Beginning Agreements Good Actions Vital

वादों से आगे डिलीवरी की बारी: ब्रिक्स बना विकसित भारत 2047 की कूटनीतिक शुरुआत… सहमतियां जमीन पर उतारना जरूरी – Brics 2026 Promises Time Of Delivery Viksit Bharat 2047 Diplomatic Beginning Agreements Good Actions Vital

ब्रिक्स सम्मेलन के समापन के बाद बड़ा सवाल यह है कि इसमें बनी सहमतियां विकसित भारत 2047 की जरूरतों को कितना पूरा कर पाएंगी। वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं को लचीला बनाने, ऊर्जा सुरक्षा, महत्वपूर्ण खनिजों और स्थानीय मुद्राओं में कारोबार पर बनी सहमतियां भारत के लिए नए अवसर खोलती हैं। हालांकि इनका वास्तविक फायदा तभी होगा जब ये ठोस निवेश, उत्पादन, निर्यात और सुरक्षित ऊर्जा आपूर्ति में बदल पाएं।

 

ब्रिक्स देशों को बड़ा बाजार बनाना प्राथमिकता

साल 2025 में भारत-चीन द्विपक्षीय व्यापार रिकॉर्ड 155.6 अरब डॉलर पर पहुंच गया, लेकिन भारत का व्यापार घाटा 100 अरब डॉलर से अधिक रहा। यह आंकड़ा ब्रिक्स के आर्थिक एजेंडे की सबसे बड़ी चुनौती भी है। चीन के साथ व्यापार से कच्चे माल की उपलब्धता सुलभ होती है, लेकिन यदि आयात की रफ्तार निर्यात से ज्यादा रही, तो यह ब्रिक्स बाजार भारत के व्यापार घाटे को और बढ़ा सकता है। इसलिए अगली प्राथमिकता ब्रिक्स देशों को भारतीय उत्पादों- इंजीनियरिंग सामान, दवाइयां, ऑटो कंपोनेंट और डिजिटल सेवाएं- का बड़ा बाजार बनाना होगी।

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स्थानीय मुद्रा और निवेश की कसौटी

ब्रिक्स देशों के बीच स्थानीय मुद्राओं में कारोबार और सीमा पार भुगतान को बढ़ावा देने से डॉलर पर निर्भरता का जोखिम घटेगा। हालांकि इसे डॉलर के विकल्प के रूप में देखना अभी जल्दबाजी होगी। इसके अलावा न्यू डेवलपमेंट बैंक के जरिए बुनियादी ढांचे के वित्तपोषण का विस्तार भारत में पूंजी की लागत घटा सकता है, बशर्ते यह कागजी घोषणाओं से निकलकर जमीन पर उतरे।

अब परिणामों की बारी

यही ब्रिक्स में भारत की आर्थिक कूटनीति की असली कसौटी है। इसने ऊर्जा, खनिज, वित्त और बाजारों के मामले में संभावनाएं तो दी हैं, लेकिन सफलता का पैमाना इस बात से तय होगा कि अगले कुछ वर्षों में ब्रिक्स देशों से कितना नया निवेश आया, भारतीय निर्यात कितना बढ़ा और व्यापार घाटा कितना कम हुआ। ब्रिक्स को विकसित भारत 2047 की कूटनीतिक शुरुआत माना जा सकता है, लेकिन सफलता का प्रमाण आने वाले आर्थिक आंकड़े ही देंगे।

ब्रिक्स सफल…हमने मतभेदों के बीच सहमति बनाई : जयशंकर

भारत की अध्यक्षता में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन को विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने पूरी तरह सफल बताया है। सोमवार को मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में जब दुनिया दो विपरीत ध्रुवों में बंटी है, ऐसे में भारत सभी सदस्य देशों के बीच साझा सहमति बनाने में सफल रहा। जयशंकर ने कहा कि सम्मेलन के दौरान पश्चिमी एशिया का तनाव सबसे पेचीदा मुद्दा था। ईरान और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के अलग-अलग रुख के कारण चर्चा काफी चुनौतीपूर्ण रही, लेकिन भारत के कूटनीतिक प्रयासों से सभी देश एक साझा बयान पर सहमत हुए। सदस्य देशों ने सर्वसम्मति से नई दिल्ली घोषणापत्र को मंजूरी दी। इस घोषणापत्र में शांति, सुरक्षा, वैश्विक व्यापार व ऊर्जा आपूर्ति की निरंतरता बनाए रखने और आम नागरिकों की सुरक्षा पर जोर दिया गया है।

भारत की मजबूती से रूबरू हुई दुनिया…

विदेश मंत्री ने कहा कि इस सफल आयोजन ने दुनिया भर में भारत के संवाद, कूटनीति और विकास के संदेश को मजबूती से पहुंचाया है। उन्होंने कहा, पूरे देश और वास्तव में दुनिया ने कल ब्रिक्स भारत शिखर सम्मेलन की सफलता को देखा।

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