वैभव सूर्यवंशी और संजू सैमसन के प्रति बर्ताव को लेकर गौतम गंभीर क्यों हैं निशाने पर?

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वैभव सूर्यवंशी, गौतम गंभीर और संजू सैमसन

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आयरलैंड और फिर इंग्लैंड के ख़िलाफ़ टी-20 सिरीज़ में व्हाइटवॉश के बाद आज भारतीय टीम इंग्लैंड के ख़िलाफ़ तीन मैचों की वनडे सीरीज़ का पहला मुक़ाबला खेलने बर्मिंघम में उतर रही है.

टीम में विराट कोहली, रोहित शर्मा और जसप्रीत बुमराह की वापसी हो रही है.

लेकिन दोनों टी-20 सिरीज़ में हार के बाद कप्तान श्रेयस अय्यर और खिलाड़ियों के साथ-साथ टीम के कोच गौतम गंभीर भी आलोचनाओं के केंद्र में हैं.

टीम सेलेक्शन को लेकर वह निशाने पर हैं. संजू सैमसन और वैभव सूर्यवंशी को टीम में शामिल करने और फिर बाहर करने को लेकर भी उन पर लगातार सवाल उठ रहे हैं.

पूर्व क्रिकेटर रविचंद्रन अश्विन ने टीम मैनेजमेंट पर दोहरे मानदंड अपनाने का आरोप लगाया है और कहा है कि ‘सूर्यवंशी और संजू सैमसन के बीच म्यूज़िकल चेयर का जो खेल खेला गया, वो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है.’

हालांकि, अश्विन ने आयरलैंड से 0-2 से सीरीज़ हार के बाद अपने यूट्यूब चैनल पर बात करते हुए गौतम गंभीर का बचाव भी किया था. उन्होंने कहा था कि गौतम गंभीर को अक्सर ग़लत समझा जाता है.

तब अश्विन ने कहा था कि भारतीय क्रिकेट में कई बार किसी की अलग सोच या अलग राय को तुरंत नापसंदगी के रूप में देखा जाता है, जबकि दोनों चीज़ें अलग हैं. उनके मुताबिक, गंभीर की सोच को समझने की ज़रूरत है.

आयरलैंड और इंग्लैंड के ख़िलाफ़ टी-20 सिरीज़ में भारत एक भी मैच नहीं जीत पाया था

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लेकिन उसके बाद एक पॉडकास्ट शो में आर अश्विन ने टीम मैनेजमेंट की कड़ी आलोचना करते हुए कहा, “हर मैच में कुछ न कुछ बदलाव हुए हैं. कभी संजू सैमसन बाहर, वैभव सूर्यवंशी अंदर. कभी वैभव बाहर, संजू अंदर. दोनों में से किसी के साथ यह न्याय नहीं हुआ.”

उन्होंने आगे कहा, “इंग्लैंड ने ख़राब फ़ॉर्म से गुज़र रहे जॉस बटलर पर लगातार विश्वास बनाए रखा. और देखो, उन्होंने लास्ट मैच में सेंचुरी जड़ दी. और हम लोग ओपनिंग पेयर के साथ म्यूज़िकल चेयर का खेल खेल रहे हैं.”

‘वैभव सूर्यवंशी के साथ सही नहीं हो रहा है’

आर अश्विन का बयान

2025 में इंग्लैंड दौरे पर साईं सुदर्शन की लगातार नाकामी के बाद भी उन्हें मौक़ा दिए जाने की वकालत करते हुए गौतम गंभीर ने कहा था कि किसी खिलाड़ी को 4-5 पारियों से आंकना ठीक नहीं होगा.

अश्विन ने इसी का ज़िक्र करते हुए कहा, “साईं सुदर्शन को आप लंबा मौक़ा देने की बात करते हो. वाह. फिर संजू को क्यों ड्रॉप कर दिया. हर खिलाड़ी हर पारी में नहीं चलता, लेकिन कुछ मौक़े तो दो. संजू नहीं चला तो वैभव को ले लिया. वैभव नहीं चला तो संजू को ले लिया. यह सब क्या हो रहा है.”

पूर्व क्रिकेटर और 1983 की वर्ल्ड कप विजेता टीम का हिस्सा रहे कृष्णमाचारी श्रीकांत ने तीन मैचों के बाद वैभव सूर्यवंशी को ड्रॉप करने पर सवाल उठाते हुए कहा, “वैभव ने ऐसा भी क्या ग़लत कर दिया. क्या इसी तरह से आप एक युवा खिलाड़ी को ग्रूम करोगे.”

अपने यूट्यूब चैनल पर श्रीकांत ने भारत के 1989 के पाकिस्तान दौरे का उदाहरण दिया, जिसमें वह टीम के कप्तान थे. इसी दौरे में तब 16 साल के सचिन तेंदुलकर ने अपने करियर का आगाज़ किया था. श्रीकांत ने कहा, “मैं सचिन के पास गया और कहा कि तुमको इस टूर में हम ड्रॉप नहीं करेंगे. इसलिए खुलकर खेलो.”

उन्होंने कहा, “क्या गौतम गंभीर और श्रेयस अय्यर को इसी तरह का विश्वास वैभव सूर्यवंशी में नहीं जताना चाहिए. यह बिल्कुल सही नहीं हो रहा. ये लोग वैभव सूर्यवंशी के साथ जैसा बर्ताव कर रहे हैं, वो बिल्कुल सही नहीं है.”

पूर्व क्रिकेटर हनुमा विहारी ने अपने यूट्यूब चैनल पर गौतम गंभीर पर खिलाड़ियों के साथ पक्षपात का आरोप लगाया.

उन्होंने कहा, “गौतम गंभीर के कुछ फ़ेवरिट प्लेयर हैं और वो उन्हीं को लेते हैं. जबकि इन प्लेयर्स से टीम का भला नहीं होगा.”

उन्होंने आगे कहा, “शिवम दुबे न बॉलिंग कर पा रहे हैं, न फ़ील्डिंग कर पा रहे हैं. बैटिंग में भी उनका अच्छा फ़ॉर्म नहीं चल रहा है. शेडगे का भी यही हाल है. वॉशिंगटन सुंदर क्यों टीम में बने हुए हैं, ये भी समझ से परे है.”

पूर्व क्रिकेटर और सेलेक्शन कमेटी के पूर्व चेयरमैन एमएसके प्रसाद ने भी संजू सैमसन और वैभव सूर्यवंशी के साथ लगातार किए जा रहे प्रयोगों को सही नहीं ठहराया.

उन्होंने कहा, “संजू सैमसन को बाहर बैठाना एक ग़लती थी. वह इंग्लैंड की परिस्थितियों में भारत के बेहतरीन खिलाड़ियों में से एक हैं और खुद को मैच जिताने वाला खिलाड़ी साबित कर चुके हैं. अगर आप भारत की प्लेइंग इलेवन बनाते हैं, तो उनका नाम सबसे पहले आना चाहिए.”

प्रसाद के मुताबिक़, संजू जैसे खिलाड़ी को सिर्फ़ इसलिए बाहर नहीं बैठना चाहिए क्योंकि वैभव सूर्यवंशी को प्लेइंग इलेवन में लेने का दबाव है.

गंभीर ने क्या कहा था?

गौतम गंभीर का बयान

हालांकि एमएसके प्रसाद गंभीर का बचाव भी करते हैं.

वो कहते हैं, “गौतम गंभीर को पूरी तरह से दोष देना सही नहीं होगा, क्योंकि यह पूरी विश्व चैंपियन टीम नहीं थी. हमें जसप्रीत बुमराह, हार्दिक पांड्या और सूर्यकुमार यादव जैसे बेहद महत्वपूर्ण खिलाड़ियों की कमी खली. हालांकि, यह युवा खिलाड़ियों के लिए अपनी जगह पक्की करने का शानदार मौक़ा था, लेकिन दुर्भाग्य से हम तीनों ही विभागों, बल्लेबाज़ी, गेंदबाज़ी और फ़ील्डिंग, में कमज़ोर नज़र आए. टीम संयोजन को लेकर भी कुछ ग़लतियां हुईं.”

गौतम गंभीर

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इंग्लैंड के ख़िलाफ़ तीसरा टी-20 मैच 125 रन से हारने के बाद कोच गौतम गंभीर ने टीम मैनेजमेंट और टीम सिलेक्शन का बचाव करते हुए कहा था, “जब आप टीम में बदलाव या नई शुरुआत (रीसेट) करते हैं, तो उसमें थोड़ा समय लगता है. अगर आप देखें, तो 15 साल का खिलाड़ी (वैभव सूर्यवंशी) ओपनिंग कर रहा है, प्रिंस यादव अपना दूसरा टी-20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेल रहे हैं, और हर्षित राणा चोट से वापसी कर रहे हैं. हम अक्सर सिर्फ़ नतीजों को देखते हैं, और इसमें कोई शक नहीं कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में नतीजे बहुत महत्वपूर्ण होते हैं, लेकिन हमें व्यावहारिक सोच भी रखनी होगी.”

गंभीर ने कहा था, “कई बार खिलाड़ियों को खुद को विकसित करने और अपनी क्षमता दिखाने के लिए समय देना पड़ता है. इंग्लैंड एक मज़बूत और उच्च गुणवत्ता वाली टीम है. जब आप ऐसे खिलाड़ियों को इस तरह की टीमों के ख़िलाफ़ मौक़ा देते हैं, तो उन्हें अपनी प्रतिभा निखारने के लिए समय देना ज़रूरी होता है. क्योंकि किसी बदलाव या नई शुरुआत के बाद चीज़ों को सही दिशा में आने में समय लगता है.”

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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