एमवाय अस्पताल के डाक्टरों ने दुर्लभ और जटिल सर्जरी कर युवक को नई राहत दी है। यूरोलाजी विभाग की टीम ने पहली बार एंटेरो यूरेथ्रोप्लास्टी तकनीक का उपयोग …और पढ़ें

HighLights
- एमवाय अस्पताल के डाक्टरों ने दुर्लभ और जटिल सर्जरी कर युवक को राहत दी है
- यूरोलाजी टीम ने पहली बार एंटेरो यूरेथ्रोप्लास्टी तकनीक का उपयोग कर मूत्रनली का सफल पुनर्निर्माण किया
- डॉक्टरों के मुताबिक यह अस्पताल में अब तक का सबसे बड़ा यूरेथ्रल डिफेक्ट था
नईदुनिया प्रतिनिध, इंदौर। ढाई वर्ष पहले हुए एक सड़क हादसे ने 28 वर्षीय युवक की जिंदगी पूरी तरह बदल दी थी। दुर्घटना में उसकी मूत्रनली (यूरेथ्रा) गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गई थी, जिसके कारण वह सामान्य रूप से पेशाब नहीं कर पा रहा था। कई अस्पतालों में उपचार और तीन प्रक्रियाओं के बावजूद उसकी परेशानी दूर नहीं हुई। लंबे समय तक उसे कैथेटर के सहारे जीवन बिताना पड़ा।
एमवाय अस्पताल के डाक्टरों ने दुर्लभ और जटिल सर्जरी कर युवक को नई राहत दी है। यूरोलाजी विभाग की टीम ने पहली बार एंटेरो यूरेथ्रोप्लास्टी तकनीक का उपयोग करते हुए उसकी क्षतिग्रस्त मूत्रनली का सफल पुनर्निर्माण किया।
डॉक्टरों के मुताबिक यह अस्पताल में अब तक का सबसे बड़ा यूरेथ्रल डिफेक्ट था, जिसकी लंबाई करीब 12 से 13 सेंटीमीटर थी। हादसे के बाद युवक को लगातार संक्रमण और अन्य परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था। उसकी सामान्य दिनचर्या और कामकाज भी प्रभावित हो गया था। जांच में पता चला कि मूत्रनली का बड़ा हिस्सा पूरी तरह नष्ट हो चुका है, जिसे सामान्य तकनीकों से ठीक करना संभव नहीं था।
डॉक्टरों ने सिग्माइड कोलन यानी आंत के एक हिस्से का उपयोग कर नई मूत्रनली तैयार की। करीब छह घंटे चली इस जटिल सर्जरी में सबसे बड़ी चुनौती रक्त आपूर्ति को सुरक्षित रखते हुए आंत के हिस्से को सही स्थान तक पहुंचाना था।
यूरोलाजिस्ट डॉ. वैभव श्रीवास्तव ने बताया कि इतनी लंबी मूत्रनली की क्षति बहुत दुर्लभ होती है। सफल सर्जरी के बाद मरीज अब सामान्य रूप से पेशाब कर पा रहा है और उसकी जीवन गुणवत्ता में बड़ा सुधार हुआ है। डीन डा. अरविंद घांघोरिया के निर्देशन में हुई इस सर्जरी में डॉ. यामिनी, डॉ. अदिति, डॉ. शालिनी जैन, डॉ. रश्मि पाल और नर्सिंग स्टाफ की टीम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
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