सस्ते घर मिल सकेंगे, छोटे मकानों का भी हो सकेगा कमर्शियल उपयोग, MP सरकार ने नियमों को लेकर तैयार किया ड्राफ्ट

सस्ते घर मिल सकेंगे, छोटे मकानों का भी हो सकेगा कमर्शियल उपयोग, MP सरकार ने नियमों को लेकर तैयार किया ड्राफ्ट

विशेषज्ञों के अनुसार, इस कवायद के कई फायदे हैं। मास्टर प्लान क्षेत्रों में तय भूमि उपयोग के साथ क्षेत्रों में सीमित व्यावसायिक व अन्य गतिविधियां बढ़ें…और पढ़ें

Publish Date: Sat, 04 Jul 2026 09:55:47 AM (IST)Updated Date: Sat, 04 Jul 2026 10:34:30 AM (IST)

सस्ते घर मिल सकेंगे, छोटे मकानों का भी हो सकेगा कमर्शियल उपयोग, MP सरकार ने नियमों को लेकर तैयार किया ड्राफ्ट
सस्ते घर मिल सकेंगे, छोटे मकानों का भी हो सकेगा कमर्शियल उपयोग। (प्रतीकात्मक तस्वीर)

HighLights

  1. छोटे प्लॉट पर दो से तीन मंजिला मकान बन सकेंगे, नगर व ग्राम निवेश विभाग ने जनता से मांगे सुझाव
  2. अब छोटे घरों का कमर्शियल उपयोग हो सकेगा, जिससे यहां दुकान-ऑफिस खोलने की अनुमति मिल सकेगी
  3. अफोर्डेबल हाउसिंग का दायरा 450 वर्गफीट से बढ़ाकर 642 वर्गफीट तक किया जाएगा

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। इंटीग्रेटेड टाउनशिप, 15 मिनट सिटी जैसे कॉन्सेप्ट के बाद अब सरकार आमजन को सस्ते-किफायती घर की सुविधा देने, मिश्रित भूमि उपयोग व अफोर्डेबल हाउसिंग का दायरा बढ़ाने के लिए नियमों में बदलाव कर रही है।

इसके तहत अब छोटे घरों का कमर्शियल उपयोग हो सकेगा, जिससे यहां दुकान-ऑफिस खोलने की अनुमति मिल सकेगी। वहीं, छोटे प्लॉटों पर दो से तीन मंजिला मकान भी बनाए जा सकेंगे। अफोर्डेबल हाउसिंग का दायरा 450 वर्गफीट से बढ़ाकर 642 वर्गफीट तक किया जाएगा। इन बदलावों का ड्राफ्ट तैयार कर लिया गया है। नगर व ग्राम निवेश विभाग ने इस ड्राफ्ट को प्रकाशित कर लोगों से सुझाव आमंत्रित किए हैं। इन सुझावों पर विचार और जरूरी संशोधनों के बाद इसे अंतिम रूप से लागू किया जाएगा।

विशेषज्ञों के अनुसार, इस कवायद के कई फायदे हैं। मास्टर प्लान क्षेत्रों में तय भूमि उपयोग के साथ क्षेत्रों में सीमित व्यावसायिक व अन्य गतिविधियां बढ़ेंगी। मध्यमवर्गीय लोगों के लिए सस्ते व किफायती मकानों की उपलब्धता बढ़ने के साथ-साथ आकार बड़ा होने से ये और अधिक सुविधाजनक बनेंगे।

ये हैं प्रस्तावित बदलाव

  • भूमि उपयोग : मिश्रित भूमि उपयोग पर जोर ड्राफ्ट (मसौदे) के अनुसार अब मास्टर प्लान व निवेश क्षेत्र में आवासीय क्षेत्रों के भूमि उपयोग को व्यापक किया गया है। मिश्रित भूमि उपयोग कॉन्सेप्ट पर सभी तरह की गतिविधियों की अनुमति दी जा सकेगी। इससे लोग छोटे घरों से ही दुकान-ऑफिस या अन्य कमर्शियल गतिविधि संचालित कर सकेंगे। हालांकि, विभाग ने प्रतिबंधित गतिविधियों की सूची भी जारी की है ताकि आवासीय क्षेत्रों में खतरनाक, जनहानि पहुंचाने वाली और नागरिक असुविधा पैदा करने वाली गतिविधियां न हों।
  • हाउसिंग निर्माण : अफोर्डेबल हाउसिंग का क्षेत्रफल अब 642 वर्गफीट जमीन की कमी और लगातार बढ़ती महंगाई को देखते हुए अफोर्डेबल हाउसिंग की परिभाषा में बदलाव प्रस्तावित है। इसके आकार में बढ़ोतरी करते हुए अब इसे अधिकतम 450 से बढ़ाकर 642 वर्गफीट किया जा रहा है। इससे अधिक क्षेत्रफल वाले मकान भी अब किफायती घरों की श्रेणी में आ सकेंगे।
  • छोटे प्लॉट पर ऊंचा निर्माण हो सकेगा छोटे और सिंगल ओनरशिप प्लॉट पर ‘इंक्रीमेंटल वर्टिकल हाउसिंग’ बनाना संभव होगा। इस शैली में लोग छोटे प्लॉट पर भी बहुमंजिला निर्माण कर सकते हैं। इसके लिए ग्राउंड कवरेज को बढ़ाकर 75 प्रतिशत कर दिया गया है। अधिक निर्माण की अनुमति के लिए एफएआर (FAR) को भी तीन गुना किया जा रहा है, जो वर्तमान में 1.5 तक और ग्राउंड कवरेज 40 फीसदी तक ही सीमित है। इसका सीधा फायदा कम लागत वाले आवासीय प्रोजेक्ट विकसित करने में मिलेगा।
  • इन्हें नहीं मिलेगी अनुमति

    मिश्रित उपयोग के बावजूद कुछ खास क्षेत्रों में प्रदूषणकारी और खतरनाक गतिविधियों पर पूरी तरह रोक रहेगी:

    • आवासीय क्षेत्र: प्रदूषणकारी, हानिकारक, भारी, खतरनाक उद्योग, गोदाम, बूचड़खाने, कबाड़ खाने, संक्रामक रोग हॉस्पिटल, कारागार, बस स्टैंड, थोक कारोबार, तेल, पेट्रोलियम व ज्वलनशील डिपो, गैस गोदाम, दुग्ध उत्पादन, मुर्गी पालन, कब्रिस्तान-श्मशान आदि।
    • कमर्शियल उपयोग: प्रदूषणकारी, हानिकारक, भारी, खतरनाक उद्योग, गतिविधियां, रसायनों व विस्फोटक भंडारण, थोक भंडारण डिपो, खनन गतिविधियां, बड़े पैमाने पर विनिर्माण, कब्रिस्तान व श्मशान आदि।
    • औद्योगिक क्षेत्र: आवासीय कॉलोनी, टाउनशिप (तय कर्मचारी आवास छोड़), स्कूल, खतरनाक, प्रदूषणकारी, हानिकारक उद्योग, भारी विनिर्माण, गोदाम, कसाईखाना, कबाड़ खाने, हॉस्पिटल, बड़े परिवहन टर्मिनल, थोक कारोबार, कारागार, तेल व गैस डिपो, गैस गोदाम आदि।
    • सार्वजनिक व अर्ध सार्वजनिक: भारी वाणिज्यिक और औद्योगिक गतिविधियां, प्रदूषणकारी उद्योग, खतरनाक पदार्थों का भंडारण, असंबंधित वाणिज्यिक दोहन, थोक बाजार, खनन, निष्कर्षण उद्योग आदि।

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