पूर्वी रिंग रोड योजना में आने वाले गांवों के कुछ किसान कलेक्टर शिवम वर्मा से मंगलवार को मिले। किसानों का कहना था कि हम योजना में जमीन देने को तैयार है…और पढ़ें

HighLights
- पूर्वी रिंग रोड योजना में आने वाले गांवों के कुछ किसान कलेक्टर शिवम वर्मा से मंगलवार को मिले
- न जमीन का मुआवजा मिल रहा, न जमीन की खरीदी-बिक्री हो पा रही है
- किसानों का कहना था कि हम योजना में जमीन देने को तैयार हैं, अब काम शुरु करवाएं
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। कलेक्टर साहब सड़क बनावा दो या योजना ही खत्म कर दो, अधर में अटकने से परेशानी हो रही है। न जमीन का मुआवजा मिल रहा, न जमीन की खरीदी-बिक्री हो पा रही है। पूर्वी रिंग रोड योजना में आने वाले गांवों के कुछ किसान कलेक्टर शिवम वर्मा से मंगलवार को मिले।
किसानों का कहना था कि हम योजना में जमीन देने को तैयार है। अब काम शुरु करवाएं, ताकि सड़क जल्द तैयार हो सके और ग्रामीणों को भी फायदा हो। दरसअल पूर्वी रिंग रोड योजना लंबे समय से धरातल पर नहीं उतर पा रही है। विरोध के कारण इसका लेआट भी एक बार बदल चुका है। यह 83.63 किमी लंबी यह सड़क इंदाैर और देवास जिले के गांवों से गुजर रही है। सबसे अधिक विरोध महू, सिमरोल और कम्पेल क्षेत्र में है।
मंगलवार को सांवेर विधानसभा क्षेत्र के फरसपुर, मेलकलमा, छोटीकदवाली आदि गांवों के किसान कलेक्टर से मिलने पहुंचे।मेलकलमा के संजय दुबे एवं फरसपुर के किसान उमाशंकर चौधरी ने बताया कि लंबे समय से योजना कागजों में ही दौड़ रही है। जबकि सड़क परियोजना के कारण किसानों की जमीन को अटका के रखा गया है।हम किसान जमीन देने के लिए तैयार है,शासन को जल्द सड़क का काम कराना चाहिए।
सड़क बनने से किसानों को भी फायदा होगा। किसान लखन पटेल का कहना था कि योजना को जल्द शुरू करना चाहिए। अब तक जमीन अधिग्रहण और मुआवजा वितरण की प्रक्रिया शुरू नहीं हुई।सड़क बनने से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और व्यवसाय के अवसर भी बढ़ेंगे।
696 हेक्टेयर जमीन होगी अधिग्रहित
पूर्वी रिंग रोड योजना के लिए इंदौर और देवास जिले के 44 गांवों की 696 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहण की जाना है।परियोजना की अनुमानित लागत पांच हजार करोड़ रुपये है, जबकि भू-अर्जन पर 1172.49 करोड़ रुपये खर्च होंगे।83.63 किलोमीटर लंबी इस सड़क का 78.30 किमी हिस्सा इंदौर जिले में आ रहा है और 4.20 किमी हिस्सा देवास जिले में। दोनों जिलों की छह तहसीलों से यह सड़क गुजरेगी।
सड़क शिप्रा (पीर कराड) से शुरू होकर सिमरोल और दतोदा होते हुए पीथमपुर (नांदेड) तक बनेगी। सड़क दो हिस्सों में बनेगी और पहला हिस्स शिप्रा से दतोदा तक 49 किमी और दूसरा हिस्सा दतोदा से नांदेड पीथमपुर के पास 35 किमी का होगा।
लंबे समय से हो रहा विरोध
पूर्वी रिंग रोड परियोजना का किसान लंबे समय से विरोध कर रहे है।किसानों की मांग है कि चार गुना मुआवजा दिया जाए।इस साल कलेक्ट्रेट के बाहर भी किसान विरोध प्रदर्शन कर चुके है।जिसमें 30 से अधिक गांवों के किसान शामिल हुए थे।किसानों की यह भी मांग है कि उपजाऊ एवं सिंचित कृषि भूमि से होकर सड़क को नहीं गुजारा जाना चाहिए। इससे उनकी आजीविका पर असर पढ़ेगा। सड़क को बंजर और कम ऊपजाऊ जमीन से निकाला जाए।इस विरोध के बाद सड़क का लेआउट बदल चुका है और इसकी लंबाई 68 किमी से बढ़कर 83.63 किमी तक पहुंच गई।
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